हमारे बच्चे मर रहे हैं भूखे…सहारनपुर की 70 साल पुरानी मंगल बाजार बंद, 400 परिवारों पर रोजी रोटी का संकट

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हमारे बच्चे मर रहे हैं भूखे…सहारनपुर की 70 साल पुरानी मंगल बाजार बंद, 400 परिवारों पर रोजी रोटी का संकट


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Public Opinion: सहारनपुर में अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद मंगल बाजार में फड़ लगाने वाले 300–400 परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. 15 दिन से दुकानें नहीं लगने दी जा रहीं. विक्रेताओं ने सप्ताह में एक दिन बाजार लगाने की अनुमति की मांग की है.

सहारनपुर: नगर निगम जहां अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत शहर को अतिक्रमण मुक्त करने का काम कर रहा है. वही लगभग 60 साल से सड़क किनारे लोहानी सराय में लगने वाले बाजार को कुछ समय पहले नगर निगम ने मेल गुघाल स्थल पर स्थानांतरित किया था. इसके बाद वहां पर मंगल बाजार प्रत्येक सप्ताह लगता चला आ रहा था. लेकिन लंबे समय से जमीन पर फड़ लगाकर अपना सामान बेच रहे लोगों के सामने एक बार फिर से रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. क्योंकि उनको वहां से भी अब हटा दिया गया है. पिछले 15 दिन से उनकी दुकानें नहीं लगने दी जा रही. जिसके चलते वह दर-दर की ठोकरे खा रहे हैं. अधिकारियों से लेकर नेता लोग भी उनकी सुनने को तैयार नहीं है. उनका कहना है कि वह मात्र हफ्ते का एक दिन मांग रहे हैं, जिससे उनके घर का खर्च चलता है. उनके बच्चे खाना खाते हैं और उनकी पढ़ाई होती है. लेकिन अब स्थिति ऐसी हो गई है कि खाने को दाना नहीं है और बच्चों की स्कूल फीस जमा करने के लिए पैसे भी नहीं हैं. वह हाथ जोड़कर मंगल बाजार में अपनी दुकान लगाने की गुहार लगा रहे हैं. अब देखने वाली बात होगी कि क्या इन लोगों की गुहार को कोई सुन पता है या फिर यह लोग ऐसे ही भटकते रहेंगे.

70 साल से लगता आ रहा था बाजार 

फड़ लगाने वाली मीरा ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि हमने सहारनपुर में जन्म लिया और सहारनपुर में ही मर जाएंगे. 70 साल से वह अपने पुराने लोहानी सराय बाजार में मंगल बाजार वाले दिन जमीन पर फाड़ लगाकर सामान बेचने का काम करते आ रहे थे. उनको वहां से उठा दिया गया उसके बाद उनको मेला गुघाल पुल के पास बिठाया गया और अब उनको वहां से भी हटाया जा रहा है. तीन हफ्ते से दुकान नहीं लगने दी जा रही है और अब उनके बच्चे भूखे मर रहे हैं. बच्चों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ खड़ा हुआ है जबकि वोट लेने के लिए नेता लोग हमें अपनी मां बहन बना लेते हैं, लेकिन जब हमारी 70 साल पुरानी जगह छीनी जा रही है, तब कोई सामने नहीं आता. इसकी कई बार अधिकारियों से शिकायत की गई लेकिन हमारी कोई सुनने वाला नहीं है. इस काम से जुड़े लगभग 500 परिवार है जो अब अपने रोजगार और रोजी-रोटी के लिए तरस रहे हैं. जबकि हम हफ्ते में मात्र एक दिन अपनी दुकान लगाते हैं बस हमारी यही मांग है कि हमें हफ्ते में एक दिन हमारी दुकान लगाने दी जाए जिससे कि हमारे घर का गुजारा चल सके.

मंगल बाजार में दुकान नहीं लगने देने से 400 परिवारों पर रोजी-रोटी का संकट

जीतू ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि हमारा 60 -70 साल पुराना बाजार पहले लोहानी सराय में लगता था. अब हमें वहां से उठा दिया गया और मेला गुघाल पुल के बराबर में हमें बैठा दिया गया, लेकिन अब वहां से भी हमें उठाया जा रहा है. हम लोग जमीन पर पुराने कपड़े लगाकर बेचने का काम करते हैं जिससे हमारा घर चलता है इस काम से हमारे 300 से 400 परिवार जुड़े हैं. जबकि मंगल बाजार शिफ्ट होने के बाद हमें भी शिफ्ट किया गया लेकिन हमें कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन अब हमें वहां से भी हटाया जा रहा है इसलिए हम लोग परेशान होकर अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन हमारी सुनने वाला कोई नहीं है.

नहीं सुन रहे नेता लोग 15 दिन से हम लोग हैं परेशान

फड़ लगाने वाली बबीता ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि हमारे 300 से 400 परिवारों के लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं, क्योंकि हमारी दुकान मंगल बाजार में लगे नहीं दी जा रही. हमारे बच्चों के सामने रोटी से लेकर उनकी पढ़ाई का संकट खड़ा हो गया है. जब काम नहीं होगा हमें दुकान नहीं लगाने दी जाएगी तो हमारे बच्चे क्या खाएंगे और कैसे पढ़ाई करेंगे. हम हफ्ते में सिर्फ मंगल बाजार वाला दिन हाथ जोड़कर मांग रहे हैं. पिछले 15 दिन से बहुत परेशान है नेताओं के पास जाते हैं तो वह भी हमारी नहीं सुनते जबकि हम लोगों ने भारतीय जनता पार्टी को वोट दिया. लेकिन हमारी अगर कोई सुन रहा है तो वह सिर्फ विपक्ष पार्टी के नेता इमरान मसूद है. उन्होंने हमारी आवाज को उठाया और विश्वास दिलाया है कि वह उनकी दुकान वहीं पर ही लगवाएंगे.

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Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें

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