हादसों के बावजूद भी इलाज नहीं, कौशांबी ट्रामा सेंटर की बदहाली उजागर
कौशांबी जिले में नेशनल हाईवे के किनारे कछुवा में बना ट्रामा सेंटर आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया यह ट्रामा सेंटर, जो हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं में घायलों को तत्काल और बेहतर इलाज देने के उद्देश्य से बनाया गया था, अब केवल दिखावा बनकर रह गया है. हाईवे पर आए दिन सड़क हादसे होते हैं, लेकिन इस ट्रामा सेंटर में गंभीर रूप से घायल मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है. यहां तैनात डॉक्टरों का कहना है कि स्टाफ तो पर्याप्त है, लेकिन जरूरी मशीनरी और आधुनिक उपकरणों की भारी कमी है.
ट्रामा सेंटर सिर्फ शोपीस
साल 2022 में 2 करोड़ 10 लाख की लागत से नरसिंहपुर कछुआ नेशनल हाईवे के किनारे ट्रामा सेंटर का निर्माण कराया गया था. ट्रामा सेंटर का उद्देश्य था नेशनल हाईवे के किनारे होने वाले दुर्घटनाओं के लिए तत्काल उपचार किया जाए, लेकिन यहां पर उपचार करने के बजाय मरीजों को जिला अस्पतालों के लिए रेफर किया जाता है, क्योंकि यहां पर मशीनरी सुविधा न होने के कारण मरीज का इलाज सही तरीके से नहीं हो पता है. नेशनल हाईवे पर आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं के बावजूद यह ट्रामा सेंटर सिर्फ शोपीस बनकर रह गया है.
केशव प्रसाद मौर्य ने किया था उद्घाटन
नरसिंहपुर कछुआ ट्रामा सेंटर का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के द्वारा किया गया था. ट्रामा सेंटर का उद्घाटन बहुत ही भव्य तरीके से किया गया था. आज भी ट्रामा सेंटर में मशीनरी सुविधा न होने के कारण क्षेत्रीय व ग्रामीण मरीज के लिए काफी परेशानियां हो रही है, क्योंकि उन्हें 20 किलोमीटर दूर का सफर करके जिला अस्पताल के लिए जाना पड़ता है. अगर मशीनरी सुविधा उपलब्ध होती है तो मरीज को तत्काल उपचार मिल सकता है.
मशीनरी सुविधा नहीं है
ट्रामा सेंटर अधीक्षक डॉक्टर असलम ने बताया इंडिया ट्रामा सेंटर वर्ष 2022 से चल रहा है, लेकिन यहां पर मूल रूप से मशीनरी सुविधा नहीं है. ट्रामा सेंटर नेशनल हाईवे के किनारे बना हुआ है हाईवे में आज दिन किसी न किसी दिन दुर्घटनाएं होती रहती है. कोई मरीज लेकर आता है तो उसे नॉर्मल उपचार करके जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है.
सीएमओ से अपील
ट्रॉमा सेंटर में गंभीर इलाज के लिए जैसे एक्स-रे मशीन, सीटी स्कैन की मशीन, जनरेटर, MRI मशीन न होने के कारण अस्पताल में इलाज करने में काफी परेशानियां होती हैं. कोई गंभीर मरीज जाता है, तो उसके लिए ड्रेसिंग या हल्का उपचार करके उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है. वैसे अस्पताल में तो स्टाफ पर्याप्त हैं. फिलहाल, इस समस्या को लेकर जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी को लिखित दिया गया है कि ट्रॉमा सेंटर के लिए मशीनरी सुविधा दी जाए, ताकि आने वाले मरीजों को अच्छा इलाज हो सके.