हॉस्टल के डिजाइन और खराब वातावरण से छात्रों की नींद पर असर, IIT कानपुर के शोध में खुलासा
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IIT Kanpur research: किसी भी छात्र के लिए अच्छी नींद बेहद जरूरी होती है, क्योंकि इससे उसकी पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों पर सीधा असर पड़ता है. हाल ही में आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि हॉस्टल और क्लासरूम का वातावरण छात्रों की नींद की गुणवत्ता को काफी प्रभावित करता है. खासतौर पर खराब वेंटिलेशन और अधिक गर्मी जैसे पर्यावरणीय कारक छात्रों की नींद पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं.
IIT कानपुर
IIT Kanpur: अच्छी पढ़ाई और बेहतर स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद बेहद जरूरी होती है. लेकिन अगर रहने का माहौल ठीक न हो तो इसका असर सीधे नींद और पढ़ाई दोनों पर पड़ सकता है. इसी विषय को लेकर आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं ने एक खास अध्ययन किया है, जिसमें यह समझने की कोशिश की गई है कि हॉस्टल का डिजाइन, तापमान, नमी और वेंटिलेशन जैसे कारक छात्रों की नींद की गुणवत्ता को किस तरह प्रभावित करते है.
दरअसल, यह अध्ययन उस सवाल से शुरू हुआ जब यह देखा गया कि आईआईटी कानपुर के कई छात्र सुबह की पहली क्लास शुरू होने से पहले ही उनींदा महसूस कर रहे थे. इस स्थिति ने शोधकर्ताओं को यह सोचने पर मजबूर किया कि कहीं हॉस्टल के कमरों का वातावरण तो उनकी नींद को प्रभावित नहीं कर रहा है. इस अध्ययन में 500 से अधिक छात्रों को शामिल किया गया. शोधकर्ताओं ने नींद की गुणवत्ता को मापने के लिए पिट्सबर्ग स्लीप क्वालिटी इंडेक्स (PSQI) नामक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रश्नावली का इस्तेमाल किया. इसमें छात्रों से हॉस्टल के कमरे की स्थिति, तापमान, वेंटिलेशन और अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों के बारे में जानकारी ली गई. इस सर्वे में सामने आया कि करीब 70 प्रतिशत छात्रों ने अपनी नींद की गुणवत्ता को खराब बताया.
सोने के पैटर्न का भी अध्ययन हुआ
शोध के दूसरे चरण में लगभग 140 छात्रों को शामिल किया गया, जिनके हॉस्टल कमरों में तापमान, नमी और वेंटिलेशन जैसी पर्यावरणीय स्थितियों को रियल टाइम में मॉनिटर किया गया. इसके साथ ही छात्रों के सोने के पैटर्न का भी अध्ययन किया गया ताकि यह समझा जा सके कि कमरे का वातावरण उनकी नींद को किस हद तक प्रभावित करता है. इस अध्ययन के निष्कर्ष अभी प्रकाशन के लिए तैयार किए जा रहे है.
नींद पर होने वाले अधिकांश शोध
इसके अलावा एक साल तक चलने वाला एक और अध्ययन भी किया जा रहा है, जिसमें मौसम के बदलाव के साथ नींद की गुणवत्ता में होने वाले परिवर्तनों का विश्लेषण किया जा रहा है. इस पूरे शोध का नेतृत्व आईआईटी कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर अनुबा गोयल कर रही है. उनका कहना है कि भारत में नींद पर होने वाले अधिकांश शोध मेडिकल या मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से किए जाते है. लेकिन यह अध्ययन भवन डिजाइन और इनडोर पर्यावरण की गुणवत्ता के नजरिए से किया जा रहा है.
छात्रों की नींद की गुणवत्ता
शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि हॉस्टल और शैक्षणिक भवनों के डिजाइन में तापमान, नमी और वेंटिलेशन जैसे कारकों का बेहतर ध्यान रखा जाए तो इससे छात्रों की नींद की गुणवत्ता सुधर सकती है. साथ ही उनकी पढ़ाई पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.
पढ़ने के स्थान का वातावरण
आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर राजेश गोयल ने बताया कि यह शोध इस बात को समझने के लिए किया गया कि रहने और पढ़ने के स्थान का वातावरण छात्रों के स्वास्थ्य और उनकी नींद पर किस तरह असर डालता है. उन्होंने कहा कि यदि इन संबंधों को बेहतर तरीके से समझा जाए तो भविष्य में हॉस्टल और रिहायशी इमारतों के डिजाइन को और बेहतर बनाया जा सकता है.
बिल्डिंग एंड एनवायरनमेंट पर शोध
इस शोध के निष्कर्ष नवंबर 2025 में प्रतिष्ठित जर्नल ‘बिल्डिंग एंड एनवायरनमेंट’ में प्रकाशित किए गए. शोध पत्र की मुख्य लेखिका आईआईटी कानपुर की सीनियर पीएचडी छात्रा अस्मिता आद्या है. शोधकर्ताओं का मानना है कि इस अध्ययन से भविष्य में छात्रावास और शैक्षणिक भवनों के बेहतर डिजाइन में मदद मिल सकती है.
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काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें