अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी से मिलकर क्या-क्या कहा?
Akhilesh Yadav: पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ चुके है. जो नतीजे सामने है वो वाकई में ममता बनर्जी और टीएमसी के लिए चौंकाने वाले है. दरअसल, पश्चिम बंगाल में TMC नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी ने 207 सीटों के साथ जीत दर्ज की है. टीएमसी की हार के बाद उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम व सपा प्रमुख अखिलेश यादव गुरुवार को कोलकाता पहुंचे. जहां उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से उनके आवास पर मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने मीडिया से भी बातचीत की, इस दौरान अखिलेश ने बीजेपी, चुनाव आयोग और केंद्रीय एजेंसियों पर तीखा हमला बोला.
अखिलेश ने आरोप लगाया कि बंगाल में चुनाव के दौरान जिस तरह की बेईमानी हुई, उसका ट्रायल पहले उत्तर प्रदेश में किया गया था. उन्होंने साफ संकेत दिए कि आने वाले समय में बीजेपी के खिलाफ विपक्षी दलों को एकजुट होकर लड़ाई लड़नी होगी. अखिलेश यादव का यह दौरा और ममता बनर्जी के साथ उनकी एकजुटता आगामी राष्ट्रीय राजनीति और उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों के लिए बड़े इशारे कर रही है.
ममता से मुलाकात के बाद अखिलेश ने क्या कहा?
कोलकाता में ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि उन्हें वो दौर याद है जब ‘निष्पक्ष चुनाव’ हुए थे और ममता बनर्जी जनता के समर्थन से सत्ता में आई थीं. लेकिन अब चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं. अखिलेश ने कहा कि आज सभी विपक्षी दलों को मिलकर चुनाव में हो रही कथित गड़बड़ियों और लोकतंत्र पर खतरे के खिलाफ खड़ा होना पड़ेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी, चुनाव आयोग और कुछ सरकारी एजेंसियां मिलकर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर रही हैं. उन्होंने कहा कि पहले कहा जाता था कि ‘आज बंगाल जो करता है, देश कल करता है’, लेकिन बीजेपी ने जो उत्तर प्रदेश में किया, वही मॉडल अब बंगाल में लागू किया गया है.
‘यूपी में हुआ ट्रायल, बंगाल में पूरा प्रयोग’ – अखिलेश का गंभीर आरोप
अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उत्तर प्रदेश में जो चुनावी बेईमानी बीजेपी ने शुरू की थी, वह महज एक ‘ट्रायल’ था. उन्होंने आरोप लगाया कि उसी मॉडल को अब बंगाल में बड़े पैमाने पर लागू किया गया है. अखिलेश ने कहा, ‘हम सुनते थे कि जो बंगाल आज करता है, देश कल करता है, लेकिन बीजेपी ने जो यूपी में किया, उससे सीखकर पूरा चुनाव लूट लिया गया.’ उन्होंने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश के उपचुनावों में जिस तरह की धांधली हुई, वैसी ही ‘माफियागिरी’ बंगाल के चुनाव में देखने को मिली है. अखिलेश ने कुछ तस्वीरें दिखाते हुए दावा किया कि वोटर्स को डराने के लिए ‘बुलेट’ (गोली) का डर दिखाया गया.
चुनाव आयोग और सुरक्षा बलों पर उठाए सवाल
सपा अध्यक्ष ने अपनी बातचीत में चुनाव आयोग की निष्पक्षता और द्रीय सुरक्षा बलों की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, ‘इलेक्शन कमीशन निष्पक्ष नहीं है, वह बीजेपी के इशारे पर काम कर रहा है. हमने यूपी में कई बार अधिकारियों की शिकायत की, लेकिन किसी को नहीं हटाया गया. इसके उलट बंगाल में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि चुनाव हरवाना है.’ अखिलेश ने यह भी दावा किया कि चुनाव के दौरान सेंट्रल फोर्स के जवानों को ऐसी छुट्टियां दी गईं जो पहले कभी नहीं सुनी गईं.
कहा कि बंगाल में भारी संख्या में केंद्रीय बल तैनात किए गए और विपक्षी कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाया गया. उन्होंने ऐसा दावा किया कि कई जगह विपक्षी दलों के एजेंटों को पोलिंग बूथ के अंदर बैठने तक नहीं दिया गया. अखिलेश ने आरोप लगाया कि वोटरों को डराने-धमकाने का माहौल बनाया गया. उन्होंने कहा कि अगर ‘बुलेट के दम पर वोट डलवाए जाएंगे’ तो लोकतंत्र कमजोर होगा. उनके मुताबिक, चुनाव आयोग को पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए.
यूपी का उदाहरण देकर बताया- ‘कैसे लूटा गया चुनाव’
अखिलेश यादव ने अपनी बात को पुख्ता करने के लिएउत्तर प्रदेश के चुनावों की कुछ तस्वीरों और आंकड़ों का भी जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि रामपुर और कुंदरकी जैसे क्षेत्रों में चुनाव के दौरान वोटरों को मतदान से रोका गया. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी कई चुनावों में मजबूत प्रदर्शन करती रही, लेकिन अचानक कुछ सीटों पर बीजेपी के वोट प्रतिशत में असामान्य बढ़ोतरी हुई. इसे उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी का संकेत बताया. उन्होंने कहा कि यूपी में जिस तरह से पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल कर मतदाताओं को बूथ तक नहीं पहुंचने दिया गया, वही मॉडल अब बंगाल में लागू किया जा रहा है. अखिलेश ने कहा, ‘हमने यूपी चुनाव में देखा है कि कैसे अधिकारियों की शिकायत करने के बाद भी न डीजीपी हटे, न मुख्य सचिव. बंगाल में भी यही हुआ, फोर्स का इस्तेमाल जनता को डराने के लिए किया गया.’
सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने चुनाव आयोग को चुनौती देते हुए कहा कि अगर चुनाव निष्पक्ष हुए हैं तो मतदान केंद्रों की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही लाइव हो सकती है, तो चुनावी प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग जनता को क्यों नहीं दिखाई जा सकती? अखिलेश ने कहा कि अगर चुनाव आयोग और बीजेपी को अपनी प्रक्रिया पर भरोसा है तो मीडिया और विपक्षी दलों को फुटेज दिखानी चाहिए. इससे लोकतंत्र मजबूत होगा और जनता का भरोसा बढ़ेगा.
ममता बीजेपी की आंखों में खटकती हैं: अखिलेश
अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी का खुलकर समर्थन करते हुए कहा कि बीजेपी उन्हें इसलिए निशाना बनाती है क्योंकि वह संघर्ष करने वाली नेता हैं. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ‘आधी आबादी’ यानी महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं और बीजेपी की राजनीति महिलाओं को आगे बढ़ते नहीं देखना चाहती. अखिलेश ने बीजेपी पर ‘पुरुषवादी’ और ‘सामंतवादी सोच’ रखने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को अपमानित करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वह लड़ाई छोड़ने वाली नेता नहीं हैं.
विपक्षी एकता का बड़ा संदेश
इस पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश विपक्षी एकता को लेकर माना जा रहा है. अखिलेश यादव ने साफ कहा कि लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए सभी विपक्षी दलों को साथ आना होगा. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ बंगाल की लड़ाई नहीं है, बल्कि पूरे देश में वोट के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने की लड़ाई है. अखिलेश ने कहा कि बीजेपी सत्ता के लिए किसी भी सीमा तक जा सकती है और ऐसे में विपक्ष को भी एकजुट होकर मुकाबला करना होगा.
कांग्रेस पर भी दिया संकेत
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब कांग्रेस की भूमिका पर सवाल पूछा गया तो अखिलेश यादव ने सीधे हमला नहीं बोला, लेकिन संकेत दिए कि विपक्षी एकता में सभी दलों को साथ आना चाहिए. उन्होंने कहा कि वह किसी को सलाह देने नहीं आए हैं, लेकिन लोकतंत्र बचाने के लिए सभी राजनीतिक दलों को एक मंच पर दिखना होगा. यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में विपक्षी दलों के बीच सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर मतभेद सामने आए हैं.
यूपी 2027 के लिए क्या हैं संकेत?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अखिलेश यादव का यह दौरा सिर्फ ममता बनर्जी से मुलाकात भर नहीं था. इसके जरिए उन्होंने यूपी की राजनीति को भी बड़ा संदेश दिया है. अखिलेश लगातार चुनाव आयोग, वोटर लिस्ट और चुनावी प्रक्रिया को मुद्दा बना रहे हैं. इससे साफ है कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी लोकतंत्र, संविधान और वोट के अधिकार को बड़ा चुनावी मुद्दा बना सकती है. इसके साथ ही ममता बनर्जी के साथ मंच साझा कर अखिलेश ने यह भी दिखाने की कोशिश की कि बीजेपी के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों के बीच तालमेल बढ़ रहा है.
‘सोन पपड़ी’ जैसा है भाजपा का झूठ: अखिलेश का तीखा तंज
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने बीजेपी की रणनीति पर तंज कसते हुए उसे ‘सोन पपड़ी’ करार दिया. उन्होंने कहा, ‘भारतीय जनता पार्टी का झूठ सोन पपड़ी की परतों जैसा है, एक परत हटाओ तो दूसरी नीचे तैयार मिलती है.’ अखिलेश ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने चुनाव जीतने के लिए माफियागिरी का सहारा लिया है. उन्होंने कहा कि जो जनता का असली जनादेश था, उसे सरकारी मशीनरी, खुफिया विभाग और अंडरग्राउंड ताकतों ने मिलकर बदल दिया.