अमेठी का गौरीगंज: राजा ने बसाया, रानी ने की पूजा; जानिए इसका रोचक इतिहास
Gauriganj Amethi History: आज जिस गौरीगंज को हम राजनीति का अखाड़ा, प्रशासनिक पावर हाउस और अमेठी जिले का धड़कता हुआ दिल यानी जिला मुख्यालय मानते हैं, क्या आप जानते हैं कि इसका वजूद आज से 100 साल पहले भी उतना ही रसूखदार था? कलेक्ट्रेट, तहसील और बड़े-बड़े सरकारी दफ्तरों से घिरा जो शहर आज डिजिटल दौर की तेज रफ्तार के साथ दौड़ रहा है, वह कभी सिर्फ दो छोटे कस्बों और गांवों का हिस्सा हुआ करता था. अमेठी रियासत के राजघराने और राजा-रानी की अटूट आस्था से उपजा यह शहर आज अपनी समृद्धि की नई इबारत लिख रहा है. आइए जानते हैं कि कैसे दो गुमनाम गांवों से निकलकर गौरीगंज आज वीवीआईपी जिले अमेठी का मुख्य केंद्र बिंदु बन गया.
राजा ने कराई स्थापना, रानी ने की पूजा, ऐसे बना समृद्धि नगर
वैसे तो अमेठी रियासत का अपना एक बेहद गौरवशाली और रोचक इतिहास है, लेकिन अगर खास तौर पर बात की जाए तो अमेठी का गौरीगंज जिला मुख्यालय भी अपना एक विशिष्ट और ऐतिहासिक महत्व रखता है. यह वह कस्बा है जो आज प्रशासनिक हलचलों, राजनीतिक चर्चाओं और डिजिटल दौर की तेज़ रफ़्तार के बीच एक प्रमुख शहर की तरह मजबूती से खड़ा है. इसका इतिहास कहीं अधिक गहरा, रोचक और सरकारी दस्तावेज़ों में पूरी तरह प्रमाणित मिलता है.
गौरीगंज की यह ऐतिहासिक कहानी साल 1845 में शुरू होती है. उस समय अमेठी रियासत के राजा लाल माधव सिंह जब नगर भ्रमण पर निकले, तो उन्होंने इस इलाके में पहुंचकर कटरा-लालगंज और माधोपुर के बीच फैली खाली ज़मीन को देखा. राजा ने इस खाली जगह पर एक संगठित और बड़ी व्यापारिक मंडी बसाने का बड़ा निर्णय लिया और इसी के साथ इस ऐतिहासिक नगर की स्थापना कर दी.
नगर स्थापना के साथ दो मन्दिरों की हुई थी स्थापना
उस दौर में किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए सनातन कर्मकांड और पूजा-पाठ का विधिवत व विशेष ध्यान दिया जाता था. इसी परंपरा के तहत, उस समय के प्रकांड विद्वान ब्राह्मण पंडित रामदीन मिश्र ‘मड़कढ़ा’ ने पूरी श्रद्धा और मंत्रोच्चार के साथ इस नगर की स्थापना कराई थी. नगर स्थापना के साथ-साथ इस कस्बे में दो प्रमुख मंदिरों की भी स्थापना की गई. इनमें एक छोटा-सा भगवान दूधनाथ का मंदिर और दूसरा गौरी माता का मंदिर स्थापित हुआ. गौरी माता के इसी पावन मंदिर के नाम पर आगे चलकर इस पूरे इलाके को ‘गौरीगंज’ कहा जाने लगा.
1903 के गजेटियर में भी दर्ज है इतिहास, वरिष्ठ प्रवक्ता ने बताई कहानी
अमेठी के गौरीगंज जिला मुख्यालय का इतिहास सिर्फ डिजिटल पन्नों तक सीमित नहीं है, बल्कि कागजी और दस्तावेजी तौर पर भी इसका बेहद महत्वपूर्ण इतिहास रहा है. साल 1903 के सरकारी गजेटियर में भी इसका पूरा इतिहास साफ तौर पर दर्ज है. इस गौरवशाली इतिहास को लेकर इलाके के वरिष्ठ नागरिक और उस दौर के चश्मदीद उमाशंकर पांडे बताते हैं कि अमेठी जिले का गौरीगंज जिला मुख्यालय, जो आज मुख्य प्रशासनिक केंद्र के साथ-साथ बड़ी राजनीतिक पहचान बन चुका है, उस समय महज दो कस्बा हुआ करता था. उस दौर में अमेठी के राजा लाल माधव सिंह ने इसकी स्थापना की थी.
राजा ने इसे एक बड़े बाजार के रूप में बसाने के लिए कटरा नाम से शुरुआत की, जिसके तहत कटरा लालगंज और माधवपुर गांव की स्थापना की गई. यह बेहद ही पुराना नगर, कस्बा और बाजार है. उन्होंने आगे बताया कि स्थापना के बाद जब रानी अमेठी ने स्वयं इस कस्बे में पहुंचकर माता गौरी की विशेष पूजा-अर्चना की, तो कटरा लालगंज और माधवपुर को आपस में मिलाकर इस नए कस्बे और बाजार की विधिवत शुरुआत हुई. अमेठी के राजा ने उस समय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय लोगों को छोटी-छोटी दुकानें दी थीं, और आज भी वो पुरानी दुकानें इतिहास के जीवंत और प्रामाणिक गवाह के तौर पर वहां मौजूद हैं.
कभी सिर्फ था दो कस्बा, आज है सबसे समृद्ध नगर
अमेठी जिले के इस गौरीगंज जिला मुख्यालय का सफरनामा वाकई बेहद दिलचस्प है. वरिष्ठ नागरिक और अमेठी के प्रबुद्ध उमाशंकर पांडे यह भी साझा करते हैं कि जो क्षेत्र कभी सिर्फ दो कस्बा या गांव हुआ करता था, आज वह इस पूरे क्षेत्र का सबसे समृद्ध नगर बन चुका है. आज के समय में यह केवल एक राजनीतिक केंद्र ही नहीं है, बल्कि कलेक्ट्रेट, तहसील समेत तमाम सभी सरकारी दफ्तर और जनता से जुड़े जितने भी महत्वपूर्ण कार्यालय हैं, वे सब यहीं पर मौजूद हैं. इसके साथ ही, आज यह इलाका एक बहुत बड़ी और आधुनिक बाजार के रूप में लगातार विकसित हो रहा है. उस ऐतिहासिक दौर के बाद यह सीधे दो गांवों से सीधे जिला मुख्यालय के रूप में तब्दील हो गया. जिला मुख्यालय बनने के बाद आज यह समूचे क्षेत्र की प्रशासनिक और राजनीति का मुख्य केंद्र बिंदु है. इसके साथ ही, साल 2010 में जब अमेठी जिले का विधिवत गठन किया गया, तब से इसका महत्व कई गुना और बढ़ गया.