आगरा में दो-दो ताज! जब पत्नी ने पति के लिए बनवाया ‘लाल ताजमहल’, जानिए इसकी अनोखी कहानी

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आगरा में दो-दो ताज! जब पत्नी ने पति के लिए बनवाया ‘लाल ताजमहल’, जानिए इसकी अनोखी कहानी


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आगरा सिर्फ ताजमहल के लिए ही नहीं, बल्कि एक और अनोखी इमारत के लिए भी जाना जाता है, जिसे ‘लाल ताजमहल’ कहा जाता है. कर्नल जोन्स विलियम हैंसिंग की याद में उनकी पत्नी द्वारा बनवाया गया यह मकबरा ताजमहल से प्रेरित है और आज भी एक अनकही प्रेम कहानी को संजोए हुए है, हालांकि इसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं.

आगरा. इस शहर के ताजमहल की खूबसूरती का हर कोई दीवाना है. मुग़ल बादशाह शाहजहां ने यह ईमारत अपनी प्रिय पत्नी मुमताज़ की याद में बनवाई थी. वर्तमान में यह ईमारत मोहब्बत की मिसाल बनी हुई है, लेकिन क्या आप जानते है आगरा में एक नहीं बल्कि दो ताज है. दरअसल, कर्नल जोन्स विलियम हैंसिंग के मकबरे को भी कई लोग लाल ताजमहल कहते है. यह लाल बलुआ पत्थरों से बनी ईमारत है जो कि ताजमहल से प्रेरित होकर बनवाई गई है. यह ईमारत कर्नल जोन्स विलियम हैंसिंग कि पत्नी नील हैंसिंग ने सन 1803 में बनवाया था. वर्तमान में यह खूबसूरत ईमारत आगरा के भगवान टॉकीज चौराहे से दीवानी कोर्ट के सामने बनी हुई है. वर्तमान में यह भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन सरंक्षित है. हालांकि, बेहद कम ही लोग इस ईमारत को देखने जाते है जिसका मुख्य कारण है कि लोगी को इस मकबरे के बारे में जानकारी ना होना.

ताजमहल से प्रेरित होकर बनवाई गई थी यह ईमारत
आगरा के वरिष्ठ इतिहासकार और आगरा कॉलेज में इतिहास विभाग के प्रोफेसर अनुराग पालीवाल ने बताया कि यह ईमारत कर्नल जोन्स विलियम हैंसिंग कि पत्नी ने अपने पति की याद में बनवाई थी. उन्होंने बताया कि यह इमारत ताजमहल से प्रेरित होकर बनवाई गई थी, जिस कारण स्थानीय लोग इसे आगरा का लाल ताजमहल या दूसरा ताजमहल कहते है. उन्होंने कहा कि यह लाल बलुआ ईमारत ताजमहल जैसी विशाल तो नहीं है लेकिन एक पत्नी ने अपने पति की मोहब्बत को ज़िंदा रखने के लिए यह बनवाई थी. ईमारत की मुख्य गुबंद के अंदर कर्नल की कब्र बनी हुई है जिसमें अंग्रेजी भाषा में कुछ लिखा भी हुआ है. ईमारत के चारों ओर ताजमहल की तरह गालियारा बना हुआ है और चारों तरफ से यह एक जैसी ही बनी हुई है. इसके आस पास खूबसूरत हरियाली है. इस ईमारत पर खूबसूरत नक्काशी की गई है, यह डच मकबरा पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है. मुग़ल बादशाह अकबर के समय में इस स्थान को रोमन कैथोलिक कब्रिस्तान के लिए दान दे दी गई थी. यहां अलग अलग देश के कई क्रिश्चियन लोगों की कब्र बनी हुई है.

कर्नल डच थे और कई युद्ध में उन्होंने जीत हांसिल की
आगरा के वरिष्ठ इतिहासकार और प्रो. अनुराग पालीवाल ने बताया कि कर्नल जोन्स विलियम हैंसिंग डच थे. उन्होंने बताया कि कर्नल ने सन 1765 में कैंडी युद्ध में हिस्सा लिया और अपनी अहम भूमिका अदा की थी. इसके बाद वह हैदराबाद में निज़ाम की सेवा में जुटे रहे. उन्होंने कहा की वर्ष 1784 में कर्नल मराठा सरदार महादजी सिंधिया के यहां चले गए. मराठा सरदार महादजी सिंधिया बाद में उन्हें अपने साथ पुणे ले गए थे. इतिहास के अनुसार सन 1764 में सरदार महादजी की मौत के बाद कर्नल आगरा वापस लौट आये थे. सन 1766 में कर्नल आगरा किले की सुरक्षा में तैनात हो गए. सन 1803 में आगरा किले में ही कर्नल की मृत्यु हो गई जिसके बाद उनकी पत्नी नील हैंसिंग ने उनकी याद में यह खूबसूरत ईमारत बनवाई और उन्हें वहीं दफन किया गया.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें



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