उस रस्तोगी परिवार की कहानी, जिसने संभल दंगों में सबकुछ खोया, 48 साल बाद मिला इंसाफ
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Sambhal News: 1978 के संभल दंगों में जिस रस्तोगी परिवार ने अपने मुखिया को खोया, कारोबार और घर सब कुछ लुट गया, उसे योगी राज में इंसाफ मिला है. 48 साल बाद योगी सरकार इस दंगा पीड़ित परिवार को संभल में 100 गज जमीन का पट्टा देने जा रही है. गुरुवार को संभल प्रशासन रस्तोगी परिवार को जमीन का पट्टा सौंपेगा. योगी सरकार की इस पहल पर रस्तोगी परिवार काफी खुश है और उसका कहना है कि अब जाकर इंसाफ मिला है. इतने सैलून में कांग्रेस, सपा और बसपा सभी की सरकारें रहीं, लेकिन किसी ने इंसाफ नहीं किया.
48 साल बाद संभल दंगे के पीड़ित रस्तोगी परिवार के जख्मों पर लगा मरहम
संभल. पिछले 48 सालों में जो काम कंग्रेस, सपा और बसपा की सरकारें नहीं कर पाईं, उसे योगी सरकार ने कर दिया. 1978 में संभल में हुए सांप्रदायिक दंगे में कारोबार, घरऔर परिवार के मुखिया रामशरण रस्तोगी को खोने वाले इस परिवार को योगी सरकार में इंसाफ मिला है. या यूं कहें 48 साल बाद इस परिवार के जख्मों पर मरहम लगा है. गुरुवार को योगी सरकार रस्तोगी परिवार को जमीन का पट्टा दिया जाएगा. संभल जिला प्रशासन रस्तोगी परिवार को 100 वर्ग मीटर जमीन का पट्टा और प्रमाण पत्र सौंपेगा.
कांग्रेस, सपा और बसपा की सरकारों में केस की फाइल 48 साल धूल फांकती रही. इंदिरागांधी ने भी घर आ कर आश्वासन दिया था, मगर नतीजा सिफर ही रहा. आवास आवंटन की पत्रावली स्वीकृत होने के बाद उनके पौत्र कपिल ने दंगों से विस्थापित हुए अन्य हिंदुओं से दोबारा संभल में आ कर बसने की अपील की है. कपिल रस्तोगी ने कहा कि योगी सरकार में संभल संभल सुरक्षित है और कानून-व्यवस्था भी दुरुस्त है.
1978 के दंगों का दर्द
रामशरण रस्तोगी के पौत्र कपिल रस्तोगी अपनी मां के साथ बुधवार को संभल तहसील के सभागार पहुंचे, जहां वे मीडिया से रूबरू हुए. कपिल रस्तोगी ने 1978 के दंगों का दर्द साझा किया. उन्होंने बताया कैसे दुकान लूटने से मना करने पर दंगाईयों ने दादा की नृशंस हत्या कर दी थी. दंगाइयों की धमकी से पलायन करना पड़ा. लेकिन 24 नवंबर 2024 को संभल हिंसा के बाद योगी सरकार ने जैसा एक्शन लिया, उससे परिवार में विश्वास जगा. साथ ही योगी जी से भी मुलाकात के बाद भरोसा हुआ कि हम संभल में फिर से बस सकते हैं.
संभल में फिर बसने की बात कही
कपिल रस्तोगी ने कहा कि योगी सरकार द्वारा महाराणा प्रताप चौक पर दिए जा रहे 100 वर्ग मीटर के आवासीय पट्टे पर घर बनाएंगे और संभल में ही बसेंगे. वहीं दंगों से पलायन के बाद जिला प्रशासन सरकार द्वारा कराए जा रहे पुनर्वास को उन्होंने न्याय की शुरुआत बताया है. सीएम योगी और जिला प्रशासन को उन्होंने धन्यवाद दिया है.
संभल दंगे की कहानी
29 मार्च 1978 को एक मुस्लिम नेता के भड़काऊ भाषण से संगल जल उठा. इस सांप्रदायिक दंगे की आग में झुलसने वाले हिंदू परिवार थे. सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक दंगे में 100 से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था. इतना ही नहीं कई लोगों को मारकर जलाया भी गया था. इस दंगे की चपेट में रामशरण रस्तोगी भी आए थे. मुहल्ला कोट पूर्वी में रामशरण रस्तोगी का लगभग 100 गज का एक मकान था. वे नखासा तिराहे पर परचून की दुकान चलाते थे. दंगाईयों ने दुकान में लूटपाट के बाद आग के हवाले कर दिया था. रामशरण रस्तोगी की सरेआम हत्या कर दी गई थी. रामशरण रस्तोगी की हत्या के बाद दंगाईयों के निशाने पर उनका 100 गज का मकान था. लगातार परिवार को घर छोड़कर भागने की धमकी मिल रही थी. धममिकयों से डरे सहमे परिवार ने पलायन कर लिया. इसके बाद से ही परिवार गाजियाबाद में रह रहा था.
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अमित तिवारी, News18 Hindi के डिजिटल विंग में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. वर्तमान में अमित उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, ब्यूरोक्रेसी, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और रिसर्च बेस्ड कवरेज कर रहे हैं. अख़बार…और पढ़ें