कतर्नियाघाट सेंचुरी का बदला माहौल! सारस को भाया बहराइच, कुनबा बढ़कर पहुंचा 39
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Katarnia Ghat Wildlife Sanctuary Bahraich: कतर्नियाघाट वाइल्डलाइफ सेंचुरी में प्रेम और वफादारी के प्रतीक माने जाने वाले सारस पक्षियों का परिवार बढ़ रहा है. पिछली गणना में जहां इनकी संख्या 38 थी, वहीं अब बढ़कर 39 पहुंच गई है. वन विभाग ने इसे जंगल के बेहतर माहौल और संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक परिणाम बताया है. जानिए क्यों सारस को प्रेम का प्रतीक माना जाता है और कतर्नियाघाट का वातावरण इन्हें क्यों पसंद आ रहा है.
बहराइच: कतर्नियाघाट वाइल्डलाइफ सेंचुरी में वन्यजीवों के साथ अब प्रेम और वफादारी के प्रतीक माने जाने वाले सारस पक्षियों का परिवार भी बढ़ता नजर आ रहा है. तराई क्षेत्र का शांत वातावरण, भरपूर जलस्रोत और अनुकूल प्राकृतिक परिस्थितियां इन पक्षियों को खूब पसंद आ रही हैं. यही वजह है कि यहां सारसों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है. वन विभाग की ओर से किए जा रहे संरक्षण प्रयासों का असर भी अब साफ दिखाई देने लगा है.
कतर्नियाघाट वन अधिकारी अपूर्व दीक्षित ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि पिछली बार सारस पक्षियों की गणना में इनकी संख्या 38 दर्ज की गई थी. वहीं इस बार की गणना में यह आंकड़ा बढ़कर 39 पहुंच गया है. वन विभाग ने कतर्नियाघाट सेंचुरी में 39 सारस पक्षियों की मौजूदगी की पुष्टि की है. हालांकि संख्या में यह बढ़ोतरी छोटी जरूर दिखाई देती है, लेकिन वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से इसे काफी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. इससे पता चलता है कि कतर्नियाघाट का वातावरण इन पक्षियों के लिए सुरक्षित और अनुकूल बना हुआ है.
जोड़े में रहते हैं सारस, इसलिए कहलाते हैं प्रेम का प्रतीक
सारस को उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी होने का गौरव प्राप्त है. इसे दुनिया के सबसे बड़े उड़ने वाले पक्षियों में भी शामिल किया जाता है. सारस का व्यवहार और रहन-सहन काफी खास होता है. यह पक्षी हमेशा जोड़े में रहना पसंद करते हैं और अपने साथी के प्रति वफादारी के लिए जाने जाते हैं.
मान्यता है कि सारस पूरी जिंदगी एक ही साथी के साथ रहते हैं. अगर किसी कारणवश इनके जोड़े में से एक की मौत हो जाए, तो दूसरा पक्षी भी उसके वियोग में काफी परेशान हो जाता है. यही वजह है कि इन्हें प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है.
दलदली इलाकों और जलस्रोतों के पास बनाते हैं ठिकाना
सारस पक्षी आमतौर पर दलदली जमीन, तालाब, झीलों और धान के खेतों के आसपास रहना पसंद करते हैं. कतर्नियाघाट का तराई क्षेत्र, यहां के जंगल और जलस्रोत इनके रहने के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराते हैं. यहां सारस कीड़े-मकोड़े, कंद-मूल, जलीय पौधों की जड़ें, मेंढक, छिपकलियां और धान आदि को अपना भोजन बनाते हैं. प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता के कारण यह क्षेत्र इनके लिए सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है.
संकट के बीच बढ़ती संख्या शुभ संकेत
दुनियाभर में बढ़ती आबादी, घटते जलस्रोत और बदलते पर्यावरण के कारण सारस जैसे पक्षियों के अस्तित्व पर खतरा बढ़ रहा है. ऐसे समय में कतर्नियाघाट में इनकी संख्या का बढ़ना एक अच्छी खबर है. वन विभाग का मानना है कि बेहतर निगरानी, संरक्षण कार्य और प्राकृतिक आवास की उपलब्धता के कारण सारस यहां सुरक्षित महसूस कर रहे हैं. उम्मीद है कि आने वाले समय में कतर्नियाघाट में इन खूबसूरत पक्षियों की संख्या और बढ़ेगी.
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सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें