कानपुर यूनिवर्सिटी में अब ‘नारद’ देंगे हर सवाल का जवाब, भटकने की झंझट खत्म, जानिए तरीका
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Kanpur News : कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय ने प्रवेश सत्र 2026-27 के लिए अपना पहला स्वदेशी AI असिस्टेंट लॉन्च किया है. अब छात्रों को एडमिशन, फीस, स्कॉलरशिप, कोर्स, काउंसलिंग और प्रवेश परीक्षाओं जैसी जानकारी के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा. विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर मौजूद यह AI असिस्टेंट चौबीसों घंटे काम करेगा. यह AI असिस्टेंट किसी सामान्य चैटबॉट की तरह सिर्फ इंटरनेट से जवाब नहीं देता. यह पहले विश्वविद्यालय के प्रमाणित डेटा से जानकारी खोजता है, फिर उसी के आधार पर जवाब तैयार करता है.
कानपुर. यूपी स्थित कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) ने डिजिटल शिक्षा की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. विश्वविद्यालय ने प्रवेश सत्र 2026-27 के लिए अपना पहला स्वदेशी AI असिस्टेंट “नारद” लॉन्च किया है. अब छात्रों और अभिभावकों को एडमिशन, फीस, स्कॉलरशिप, कोर्स, काउंसलिंग और प्रवेश परीक्षाओं जैसी जानकारी के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा. विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर मौजूद यह AI असिस्टेंट चौबीसों घंटे छात्रों की मदद करेगा. विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि “नारद” छात्रों को तुरंत और सही जानकारी उपलब्ध कराएगा, जिससे हेल्पलाइन और कार्यालयों पर दबाव भी कम होगा. खास बात यह है कि यह सिस्टम पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है.
क्या है ‘नारद’ की खासियत
यह AI असिस्टेंट किसी सामान्य चैटबॉट की तरह सिर्फ इंटरनेट से जवाब नहीं देता, बल्कि विश्वविद्यालय के आधिकारिक रिकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर जानकारी देता है. इसके लिए इसमें आधुनिक Retrieval-Augmented Generation यानी RAG तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. आसान भाषा में समझें तो “नारद” पहले विश्वविद्यालय के प्रमाणित डेटा से जानकारी खोजता है और फिर उसी के आधार पर जवाब तैयार करता है. इससे गलत जानकारी मिलने की संभावना काफी कम हो जाती है और छात्रों को भरोसेमंद जवाब मिलते हैं.
बाहरी कंपनियों पर निर्भर नहीं
विश्वविद्यालय की CAM-AI टीम ने इस पूरे सिस्टम को तैयार किया है. खास बात यह है कि “नारद” किसी बाहरी क्लाउड प्लेटफॉर्म या टोकन आधारित AI सेवा पर निर्भर नहीं है. इसे विश्वविद्यालय के अपने DGX हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम पर चलाया जा रहा है. इससे छात्रों का डेटा सुरक्षित रहेगा और विश्वविद्यालय को तकनीकी आत्मनिर्भरता भी मिलेगी. विश्वविद्यालय प्रशासन इसे डिजिटल आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी उपलब्धि मान रहा है.
क्या होगा होगा बड़ा फायदा
अब छात्र घर बैठे ही एडमिशन प्रक्रिया, पात्रता, फीस स्ट्रक्चर, छात्रवृत्ति, महत्त्वपूर्ण तिथियां और विश्वविद्यालय की सुविधाओं की जानकारी हासिल कर सकेंगे. खासकर दूसरे जिलों और राज्यों से आवेदन करने वाले छात्रों के लिए यह सुविधा काफी मददगार साबित होगी. विश्वविद्यालय का मानना है कि आने वाले समय में AI आधारित ऐसी सेवाएं छात्रों के अनुभव को और बेहतर बनाएंगी. इससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी और समय की बचत होगी. AI असिस्टेंट का नाम “नारद” भारतीय पौराणिक परंपरा से प्रेरित है. देवऋषि नारद को ज्ञान, संवाद और सूचना के दूत के रूप में जाना जाता है. विश्वविद्यालय ने इसी विचार को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए इस AI सिस्टम को “नारद” नाम दिया है.
क्या बोले कुलपति
कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने बताया कि विश्वविद्यालय लगातार AI आधारित शिक्षा, रिसर्च और डिजिटल नवाचारों को बढ़ावा दे रहा है. नारद को इसी दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि CSJMU अब उन चुनिंदा भारतीय विश्वविद्यालयों में शामिल हो गया है, जिन्होंने प्रवेश प्रक्रिया के लिए संस्थागत स्तर पर AI आधारित असिस्टेंट विकसित किया है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें