क्यों कहा जाता है अयोध्या को ‘8 चक्र और 9 द्वार’ वाली नगरी? जानिए इसका रहस्य

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क्यों कहा जाता है अयोध्या को ‘8 चक्र और 9 द्वार’ वाली नगरी? जानिए इसका रहस्य


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अयोध्या को ‘8 चक्र और 9 द्वार’ वाली नगरी कहा जाता है, जिसका संबंध गहरे आध्यात्मिक और दार्शनिक अर्थों से है. शास्त्रों के अनुसार यह अवधारणा मानव शरीर, योग और आत्मा की यात्रा से जुड़ी है, जो अयोध्या को केवल एक शहर नहीं बल्कि मोक्ष और चेतना का केंद्र बनाती है.

अयोध्या: प्रभु राम की नगरी अयोध्या रहस्यों से भरी पड़ी है. त्रेता युगीन अयोध्या में आज भी कई प्राचीन स्थल विद्यमान है, जो त्रेता युग की गवाही देते हैं. वैसे इसके अलावा, अयोध्या को कई नाम से भी जाना जाता है. इतना ही नहीं अयोध्या को 8 चक्र और 9 द्वार के नाम से भी जाना जाता है. इसके पीछे भी एक रहस्य छुपा हुआ है जिसका धार्मिक महत्व भी अपने आप में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसी स्थिति में आज हम आपको विस्तार से इस रिपोर्ट में बताएंगे कि आखिर क्यों अयोध्या को आठ चक्र और नौ द्वार का शहर कहा जाता है, तो चलिए इस रिपोर्ट में विस्तार से जानते हैं.

क्यों कहा जाता है अयोध्या को आठ चक्र और नौ द्वार वाली नगरी

प्रसिद्ध कथावाचक पवन दास शास्त्री बताते हैं कि अयोध्या को आठ चक्र और नौ द्वार वाली नगरी कहा जाना केवल एक धार्मिक नहीं बल्कि गहरे आध्यात्मिक और दार्शनिक अर्थों से जुड़ा हुआ है. अथर्ववेद में इस प्रकार की उल्लेख मिलता है.आठ चक्र का संबंध उन आध्यात्मिक ऊर्जा केंद्रों से जोड़ा जाता है जिन्हें योग और ध्यान की परंपरा में महत्वपूर्ण माना गया है.

मानव शरीर में सात प्रमुख चक्र बताए जाते हैं, लेकिन अयोध्या के संदर्भ में आठ चक्रों की अवधारणा इसे और अधिक दिव्य और विस्तृत बनाती है. यह आठ चक्र जीवन के विभिन्न शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक का प्रतिनिधित्व करते हैं. अयोध्या केवल एक भौतिक नगर नहीं बल्कि चेतना के उच्च स्तर तक पहुंचने का माध्यम भी है.

नौ द्वार की अवधारणा सीधे मानव शरीर से जुड़ी है

तो दूसरी तरफ नौ द्वार की अवधारणा सीधे मानव शरीर से जुड़ी है. शरीर में नौ प्रमुख द्वार माने जाते हैं दो आंखें, दो कान, दो नासिका छिद्र, एक मुख और दो अन्य (मल और मूत्र द्वार) शास्त्रों में कहा गया है कि आत्मा इन द्वारों के माध्यम से संसार का अनुभव करती है. जब अयोध्या को नौ द्वारों वाली नगरी कहा जाता है, तो इसका अर्थ यह होता है कि यह शहर स्वयं एक जीवित शरीर की तरह है जहाँ हर मार्ग और द्वार आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक है.

अयोध्या सत्य और मोक्ष का केंद्र

त्रेता युग में अयोध्या को इस दिव्य स्वरूप में देखने की मान्यता और भी प्रबल थी उस समय यह केवल एक राजधानी नहीं, बल्कि धर्म, सत्य और मोक्ष का केंद्र मानी जाती थी. यहां का जीवन, संस्कृति और व्यवस्था भी इसी आध्यात्मिक दर्शन पर आधारित थी. प्रसिद्ध कथावाचक पवन दास शास्त्री बताते हैं कि अयोध्या को समझने के लिए इसे केवल ऐतिहासिक या धार्मिक दृष्टि से नहीं बल्कि आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखना आवश्यक है.

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें



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