क्यों रासायनिक खेती नहीं छोड़ पा रहे किसान, जैविक में कितना घाटा…चौंका देंगे ये 7 अंतर
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Organic Farming Benefits : आजकल लोगों में खाने-पीने और सेहत को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ी है, जिसने खेती के तरीकों पर बहस छेड़ दी है. जहां रासायनिक खेती कम समय में अधिक पैदावार का वादा करती है, जैविक खेती मिट्टी की उर्वरता और शुद्धता पर जोर देती है. इसके बावजूद किसान ज्यादा उत्पादन लेने के चक्कर में रासायनिक स्थिति को तरजीह देते हैं. लोकल 18 ने इस बारे में शाहजहांपुर के कृषि एक्सपर्ट डॉ. एनपी गुप्ता से बात की. वे बताते हैं कि रासायनिक खेती मिट्टी के सूक्ष्मजीवों को नष्ट कर देती है, जिससे मिट्टी कठोर हो जाती है. जैविक खेती में जीवामृत और घनजीवामृत मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाते हैं.
बदलती जलवायु और बढ़ती बीमारियों को देखते हुए जैविक खेती भविष्य की जरूरत बन गई है. हालांकि पूरी तरह जैविक होने में समय लगता है, इसलिए किसान धीरे-धीरे रसायनों का उपयोग कम कर सकते हैं. सरकारें भी अब जैविक खेती को बढ़ावा दे रही हैं. डॉ. एनपी गुप्ता के मुताबिक, शुद्ध भोजन और सुरक्षित पर्यावरण के लिए हमें रसायनों की जगह प्रकृति की ओर लौटना ही होगा ताकि मानव जाति स्वस्थ रह सके.

डॉ. एनपी गुप्ता कहते हैं कि शुरुआत में रासायनिक खेती सस्ती लग सकती है क्योंकि खाद और बीज आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन समय के साथ रसायनों का खर्च बढ़ता जाता है. जैविक खेती में बाजार से कुछ भी खरीदने की जरूरत कम होती है, जिससे लागत घटती है. जैविक उपज की कीमत बाजार में अधिक मिलती है, जिससे किसानों को लंबे समय में बेहतर मुनाफा और टिकाऊ आय प्राप्त होती है.

रासायनिक खेती मिट्टी के सूक्ष्मजीवों को नष्ट कर देती है, जिससे मिट्टी कठोर हो जाती है. इसके विपरीत, जैविक खेती में उपयोग होने वाला जीवामृत और घनजीवामृत मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाते हैं. इससे मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ती है और सूखे जैसी स्थिति में भी फसलें बेहतर प्रदर्शन करती हैं. यह आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन को सुरक्षित रखने का तरीका है.
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रासायनिक खेती की शुरुआत मिट्टी परीक्षण के साथ होती है, जिसके बाद यूरिया, डीएपी और पोटाश जैसे उर्वरक डाले जाते हैं. बीजों को रसायनों से उपचारित किया जाता है. फसल चक्र के दौरान खरपतवार और कीड़ों को मारने के लिए जहरीले स्प्रे का उपयोग होता है. इसमें सिंचाई की अधिक आवश्यकता होती है क्योंकि रसायनों के कारण मिट्टी की नमी सोखने की क्षमता कम हो जाती है.

जैविक खेती से मिलने वाले उत्पाद रसायन मुक्त और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं. यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल है क्योंकि इसमें मिट्टी की प्राकृतिक उपजाऊ शक्ति बनी रहती है. इसमें मित्र कीट जैसे केंचुए जीवित रहते हैं, जो मिट्टी की गुणवत्ता को बेहतर बनाते हैं. यह न केवल हमारी सेहत सुधारती है बल्कि ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में भी मदद करती है.

रासायनिक खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे फसल तेजी से बढ़ती है और उत्पादन बहुत अधिक होता है. यह कीटों के हमले को तुरंत नियंत्रित करने में सक्षम है. हालांकि, लंबे समय में यह मिट्टी को बंजर बना देती है, भूजल को प्रदूषित करती है और रसायनों के अंश फसलों के जरिए हमारे शरीर में पहुंचकर बीमारियां फैलाते हैं.

जैविक खेती की शुरुआत देशी बीजों और जैविक खाद से होती है. इसमें गोबर की खाद, कंपोस्ट और हरी खाद का उपयोग किया जाता है. कीड़ों को भगाने के लिए नीम का तेल, दशपर्णी अर्क या ब्रह्मास्त्र जैसे प्राकृतिक घोल बनाए जाते हैं. यह प्रक्रिया थोड़ी धीमी जरूर है, लेकिन यह मिट्टी को फिर से जीवित करने का काम करती है.

कृषि एक्सपर्ट डॉ. एनपी गुप्ता बताते हैं कि रासायनिक खेती (Chemical Farming) पूरी तरह कृत्रिम उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भर होती है, जिसका लक्ष्य सिर्फ उत्पादन बढ़ाना है. इसके विपरीत, जैविक खेती (Organic Farming) पूरी तरह प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित है. जहां रासायनिक तकनीक में रसायनों से पौधों को पोषण दिया जाता है, जैविक खेती में मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधारा जाता है ताकि पौधा प्राकृतिक रूप से मजबूत बन सके.