‘खाइए वहां हाथ धोइए यहां’, पत्र में लिखे एक मुहावरे ने अंग्रेजों की उड़ाई नींद
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Sultanpur News: बात है जब देश में 1857 की क्रांति का बिगुल बज चुका था. कंपनी की सेवा के विद्रोही सैनिकों की ओर से पत्र लिखने पर शीतल मिसिर नाम के व्यक्ति पर मुकदमा चलाया गया और उन्हें फांसी दी गई. इस पत्र में लिखा था, “खाइए वहां हाथ धोइए यहां”.
सुल्तानपुर: कभी-कभी कुछ ऐसी घटनाएं हो जाती हैं, जो भविष्य में इतिहास की किताबों में दर्ज हो जाती हैं. एक ऐसी ही घटना उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में हुई, जिसे बाद में मुहावरे का रूप ले लिया. एक मुहावरा अवध और पूर्वांचल क्षेत्र में काफी प्रसिद्ध है, “खाइए वहां हाथ धोइए यहां”. इस मुहावरे का इजाद उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में हुआ. सुल्तानपुर का एक गांव जो अंबेडकर नगर और सुल्तानपुर जनपद की सीमा पर मौजूद है. वहीं पर एक ऐसी घटना हुई, जिसके बाद यह मुहावरा अत्यंत प्रसिद्ध हो गया. आइए जानते हैं क्या है इस मुहावरे का अर्थ और यह क्यों सुल्तानपुर में इतना प्रसिद्ध हो गया.
यह है पूरा किस्सा
यह उस समय की बात है जब देश में 1857 की क्रांति का बिगुल बज चुका था. कंपनी की सेवा के विद्रोही सैनिकों की ओर से पत्र लिखने पर शीतल मिसिर नाम के व्यक्ति पर मुकदमा चलाया गया और उन्हें फांसी दी गई. वहीं गोकुल मिसिर को बंदूक से उड़ा दिया गया. इसके बाद करीमुल्ला को भी फांसी की सजा दे दी गई.
दरअसल यह उस समय की कहानी है, जब पेशावर की 91वीं मुल्की सेना के एक पुरबिया ब्राह्मण शीतल मिसिर ने 64वीं मुल्की सेना व खिल्लते खिलजी रेजीमेंट स्थित सब कदर छावनी को चिट्ठी लिखी जिसमें कहा गया था कि 22 मई को हम हिंदू मुसलमान भाइयों को चर्बी लगी कारतूस दी जाएगी, इसलिए इस पत्र को पढ़कर आप सब हिंदू मुसलमान भाइयों की जो राय हो लिखिएगा कि क्या होना चाहिए. हिंदू और मुसलमान दोनों का धर्म एक है. हम जब सिपाही जमादार, हवलदारों में खूब असंतोष फैला हुआ है, इसलिए सब लोग पेशेवर आ जाइए. वहां पर जैसा होगा, वैसा किया जाएगा.
“खबर पाकर तुरंत पेशावर आइए”
वरिष्ठ पत्रकार विक्रम बृजेंद्र सिंह आगे बताते हैं कि यह चिट्ठी सब कदर छावनी 18 मई को पहुंच गई, जिसे 64वीं मुल्की सेना का एक सैनिक ले गया था, जिसका नाम करीमुल्ला था. उससे इस चिट्ठी को गुप्त रखने के लिए कहा गया था, लेकिन यह पत्र ब्रिगेडियर कॉटन को मिल गया. इसमें यह बात अधिक चुभने वाले लिखी थी कि “खबर पाकर तुरंत पेशावर आइए” हिंदी में लिखा था कि “खाना वहां खाईए हाथ यहां धोइए” इससे यह प्रमाणित हुआ कि मामला अत्यंत गंभीर था.
अंग्रेजों में बढ़ा खौफ
इस पत्र का खौफ इतना अधिक था कि पत्र के पढ़ते ही अंग्रेज अधिकारी काफी घबरा गए और इसके बाद करीमुल्ला और शीतल मिसिर पर मुकदमा चलाकर उनको फांसी दी गई और गोकुल मिसिर को तोप के गोलों से उड़ा दिया गया. मिसिर शब्द सुल्तानपुर में प्रयोग किया जाता है, जो इस बात का प्रमाण है कि शीतल और गोकुल सुल्तानपुर या आसपास के जिलों के थे. “खाईए वहां हाथ यहां धोइए” यह मुहावरा भी आज इस जिले में खूब प्रयोग में लाया जाता है. इस मुहावरे की प्रसिद्धि सुल्तानपुर समेत आसपास के जिलों में भी है.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ल…और पढ़ें