गोंडा की रेनू ने सिर्फ 70 हजार में शुरू किया यह काम, आज घर बैठे कमा रही 4 से 5 लाख रुपए , बंपर है डिमांड

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गोंडा की रेनू ने सिर्फ 70 हजार में शुरू किया यह काम, आज घर बैठे कमा रही 4 से 5 लाख रुपए , बंपर है डिमांड


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Gonda News: गोंडा की रेनू मिश्रा ने 70 हजार रुपये से दोना-पत्तल का बिजनेस शुरू कर सफलता हासिल की. स्वयं सहायता समूह के जरिए शुरू हुए इस काम से आज 10–12 महिलाओं को रोजगार मिल रहा है और सालाना 4–5 लाख रुपये की आमदनी हो रही है.

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड छपिया की रहने वाली रेनू मिश्रा ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कम पूंजी में भी बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है. कभी एक सामान्य हाउसवाइफ रहीं रेनू मिश्रा आज दोना-पत्तल बनाने के बिजनेस के जरिए न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि कई अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं. महज 70 से 80 हजार रुपये की शुरुआती लागत से शुरू हुआ उनका यह व्यवसाय आज सालाना 4 से 5 लाख रुपये की आय का जरिया बन चुका है.

लोकल 18 से बातचीत में रेनू मिश्रा बताती हैं कि उन्हें स्वयं सहायता समूह की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने ‘जय अंबे मां स्वयं सहायता समूह’ का गठन किया. शुरुआत में समूह से जुड़ी महिलाएं अचार, बड़ी, पापड़ और सिरका जैसे पारंपरिक उत्पाद तैयार करती थीं, लेकिन बाजार में अलग पहचान बनाने के लिए रेनू ने कुछ नया करने का फैसला किया. इसी सोच से दोना-पत्तल बनाने के बिजनेस का आइडिया आया और उन्होंने इस दिशा में काम शुरू कर दिया.

रेनू मिश्रा के अनुसार दोना-पत्तल बनाने के लिए उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मशीन खरीदी है. इस मशीन में अलग-अलग डाई लगाई जाती हैं, जिससे जरूरत के अनुसार विभिन्न आकार और प्रकार के दोने व पत्तल तैयार किए जाते हैं. उनके यहां पानी-पूरी, टिक्की, चाऊमीन और अन्य खाद्य पदार्थों के लिए खास तरह के दोने और पत्तल बनाए जाते हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है.

बिजनेस के लिए जरूरी सारा रॉ मैटेरियल गोंडा जिले से ही मंगाया जाता है, जिससे लागत भी कम रहती है. वर्तमान समय में उनके बनाए दोना-पत्तल की सप्लाई बभनान, मसकनवां, मनकापुर, गोंडा, बस्ती और अयोध्या जैसे क्षेत्रों में हो रही है. स्थानीय दुकानदारों और आयोजनों में इनके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है.

इस यूनिट के माध्यम से 10 से 12 महिलाओं को नियमित रोजगार मिला हुआ है. रेनू मिश्रा का कहना है कि उनका लक्ष्य आगे चलकर इस काम को और बढ़ाना है, ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सके. उनकी यह कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो घर बैठे कुछ करने का सपना देखती हैं और अपने दम पर आगे बढ़ना चाहती हैं.

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Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें

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