चित्रकूट का छुपा खजाना, मिनी खजुराहो कहलाने वाला ऐतिहासिक गणेश बाग, जाने इसकी खासियत
Last Updated:
चित्रकूट में धार्मिक पहचान के बीच स्थित गणेश बाग अपनी अनोखी वास्तुकला और नक्काशी के कारण “मिनी खजुराहो” के नाम से प्रसिद्ध है. 19वीं सदी में मराठा शासक विनायक राव पेशवा द्वारा निर्मित यह स्थल कभी राजपरिवार के विश्राम और मेहमानों के स्वागत का केंद्र था. यहां की खूबसूरत मूर्तियां, मेहराबें और सात मंजिला जलाशय उस दौर की कला और दूरदर्शिता को दर्शाते हैं, जो आज भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं.
चित्रकूट. इस शहर का नाम आते ही सबसे पहले लोगों के मन में प्रभु श्रीराम की तपोस्थली और मंदाकिनी नदी की तस्वीर उभरती है. लेकिन इसी धार्मिक पहचान के बीच एक ऐसा ऐतिहासिक स्थल भी मौजूद है, जो अपनी वास्तुकला, नक्काशी और शाही बनावट के कारण लोगों को पहली नजर में ही आकर्षित कर लेता है. इस स्थान को गणेश बाग, जिसे लोग आज मिनी खजुराहो के नाम से भी जानते हैं. बता दें कि, यह स्थल सिर्फ एक बाग या पुरानी इमारत नहीं है, बल्कि यह चित्रकूट के इतिहास, कला और मराठा कालीन की एक जीवंत कहानी है. कहा जाता है कि इसका निर्माण 19वीं सदी में मराठा शासक विनायक राव पेशवा ने कराया था. उस समय यह स्थान धार्मिक उपासना, राज परिवार के विश्राम और मेहमानों के स्वागत के लिए तैयार किया गया था. पेशवा शासक अपने खास मेहमानों को यहां ठहराते थे और गणेश बाग की भव्यता दिखाकर उनका स्वागत करते थे.
वही चित्रकूट के वरिष्ठ नागरिक सत्य प्रकाश द्विवेदी ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि गणेश बाग की सबसे बड़ी खासियत इसकी अद्भुत नक्काशी और स्थापत्य कला है. यहां की दीवारों, खंभों और मंदिरों में बनी आकृतियां लोगों को आज भी खजुराहो की याद दिलाती हैं. यही वजह है कि इसे मिनी खजुराहो कहा जाता है. मंदिर परिसर में बनी मूर्तियां, मेहराबें और नक्काशी इतनी खूबसूरत हैं कि हर किसी को अपने ओर आकर्षक कर लेती है.
सात मंजिला जलाशय
उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि इस ऐतिहासिक स्थल की एक और खास बात यहां मौजूद सात मंजिला जल संरचना है. यह जलाशय इस तरह बनाया गया था कि भीषण गर्मी में भी यहां ठंडक बनी रहती थी. इसके आसपास बावड़ी, तालाब और खुले प्रांगण मौजूद हैं, जो उस समय के शासकों की दूरदर्शिता को दर्शाते हैं. गणेश बाग केवल इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह चित्रकूट की सांस्कृतिक पहचान भी है. यहां देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी पर्यटक पहुंचते हैं. जानकारी के लिए बता दें कि, गणेश बाग आज भी पुरानी दीवारों और नक्काशीदार पत्थरों के जरिए इतिहास की एक अनकही कहानी सुनाता नजर आता है.
About the Author
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें