जमीन नहीं फिर भी बंट गए प्लॉट! UP के इस जिले में 6 अधिकारियों पर लटकी निलंबन..

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जमीन नहीं फिर भी बंट गए प्लॉट! UP के इस जिले में 6 अधिकारियों पर लटकी निलंबन..


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Greater Noida Land Scam: ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर कोर्ट की फटकार के बाद 6 अधिकारियों पर कार्रवाई होगी. 2008 में पतवारी गांव में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन 2023 में आवंटित जमीन पर कब्जा नहीं …और पढ़ें

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ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण.

हाइलाइट्स

  • ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर कोर्ट की फटकार के बाद 6 अधिकारियों पर कार्रवाई होगी.
  • 2008 में पतवारी गांव में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई थी.
  • कोर्ट ने प्राधिकरण की कार्रवाई को गलत बयानी और छल मानते हुए कड़ी नाराजगी जताई.

ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले में स्थित ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर कोर्ट की फटकार के बाद बड़ी कार्रवाई होने जा रही है. प्राधिकरण ने बिना जमीन अधिग्रहण किए ही पतवारी गांव में पांच अवंटियों को 9600 वर्ग मीटर जमीन का आवंटन और लीज जारी कर दी थी. अब इस मामले में संबंधित 6 अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी.
सहारनपुर प्राधिकरण ने इस मामले में 6 अधिकारियों को निलंबित करने की संस्तुति की है. इसमें प्राधिकरण में तैनात प्रबंधक और सहायक प्रबंधक भी शामिल हैं. इससे पहले, एक महीने पहले उप जिला अधिकारी, एक महाप्रबंधक और एक वरिष्ठ प्रबंधक सहित पांच अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी थी.

क्या है पूरा मामला?
यह मामला 2008 का है, जब पतवारी गांव में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई थी. 2023 में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने आवासीय प्लॉट योजना की शुरुआत की और पांच अवंटियों को सबसे अधिक बोली लगाने पर आवंटन पत्र जारी कर दिया.
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 2 में 5 अवंटियों को 9600 वर्ग मीटर जमीन का आवंटन किया गया, लेकिन जमीन का सिर्फ 1660 वर्ग मीटर हिस्सा ही कब्जे में था. नवंबर 2023 में दो अवंटियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने बताया कि पूरी राशि का भुगतान करने और रजिस्ट्री के बाद भी उन्हें प्लॉट पर कब्जा नहीं मिला.

रजिस्ट्री के बाद भी नहीं मिला कब्जा
अवंटियों ने कोर्ट में यह भी बताया कि सभी दस्तावेजों के बावजूद जब वे प्लॉट पर कब्जा लेने गए, तो उन्हें बताया गया कि अधिकांश जमीन अभी भी किसानों के कब्जे में है. इसके बाद, उन्होंने प्राधिकरण से वैकल्पिक जमीन देने का भी प्रस्ताव रखा था.
कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रवि कुमार ने एक सात सदस्यीय जांच समिति का गठन किया. इस समिति की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जा रही है.

6 अधिकारियों के भेजे नाम 
कोर्ट ने इस मामले में प्राधिकरण की कार्रवाई को गलत बयानी और छल मानते हुए कड़ी नाराजगी जताई थी. न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने आदेश दिया कि इसमें शामिल अधिकारियों के नाम बताकर हलफनामा पेश किया जाए.
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में तैनात सहायक प्रबंधक वैभव नागर, तत्कालीन प्रबंधक मनोज धारीवाल, सहायक विधि अधिकारी वंदना राघव, तत्कालीन प्रबंधक अतुल शुक्ला, वरिष्ठ योजना विभाग के सुरेश कुमार और वरिष्ठ कार्यकारी प्रबंधक सुखबीर सिंह के नाम इस जांच में शामिल किए गए हैं.

यह गंभीर आरोप लगाए गए
प्राधिकरण की जांच में इन अधिकारियों पर दस्तावेजों की दोषपूर्ण तैयारी, सत्यापन में चूक और जमीन स्वामित्व की पुष्टि किए बिना कार्रवाई करने का आरोप लगाया गया है.

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