टस से मस नहीं हुए लक्ष्यवीर सोराह, अब भी अधूरा है दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे
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गाजियाबादः 12000-13000 करोड़ की लागत से बना दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर अब गाड़ियां फर्राटा भर रही हैं. जगह-जगह फ्लाईओवर, ब्रिज और सर्विस लेन बना हुआ है. जो लोग पहले देहरादून करीब 6 घंटे में पहुंचते थे, अब वह महज ढाई से तीन घंटे में दिल्ली से देहरादून और देहरादून से दिल्ली पहुंच रहे हैं. दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे भले ही पूरी तरह तैयार है. लेकिन एक जगह अब भी उसका निर्माण अधूरा है, जो गाजियाबाद के हिस्से में आता है. गाजियाबाद के मंडोला गांव में एक घर दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के अहम हिस्से के निर्माण में बाधा बनने के चलते चर्चा में है. इस घर का नाम स्वाभिमान है.
करीब 213 किलोमीटर के इस रास्ते पर एक घर अब भी सर्विस रोड के बीचें-बीच खड़ा है. यह करीब 1600 वर्ग मीटर में फैला दो मंजिला मकान है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस घर के मालिक नोएडा में रहते हैं. इस मकान को लेकर 1998 से ही जमीन विवाद चल रहा है. इस मकान के मालिक स्वर्गीय डॉ. वीरसेन सोराह ने यूपी आवास बोर्ड द्वारा मंडोला आवास योजना के लिए अपनी जमीन के अधिग्रहण को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल यह जमीन वीरसेन सोराह के पोते लक्ष्यवीर सरोह के नाम पर है. साल 2020 में एनएचआई ने दिल्ली के अक्षरधाम से देहरादून तक एक्सप्रेसवे शुरू करने का फैसला किया. एनएचआई को सरोहा परिवार के स्वामित्व वाली इस जमीन की जरूरत थी, ताकि सर्विस रोड बनाई जा सके. हालांकि पहले से इस जमीन को लेकर मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में था, तब लक्ष्यवीर ने अपने घर को गिराए जाने के खतरे का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया.

लक्ष्यवीर की याचिका पर सुनवाई करेत हुए सुप्रीमकोर्ट ने घर की यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया और किसी भी तरह की विध्वंस या आगे के निर्माण पर रोक लगा दी. इसके अलावा हाईकोर्ट को मामले की सुनवाई में तेजी लाने को कहा. वहीं लक्ष्यवीर की मां ने जानकारी देते हुए कहा था कि उनकी मांग बिल्कुल स्पष्ट है. हमें वर्तमान बाजार दर के हिसाब से मुआवजा दिया जाए, वरना हमारी जमीन को भूल जाएं.
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भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ाने और शहर में यातायात की भीड़ को कम करने के उद्देश्य से दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे को जोड़ने वाले 12 किलोमीटर लंबे चार लेन के नये बाईपास का निर्माण कर रहा है. एनएचएआई ने एक बयान में कहा कि यह परियोजना झाझरा से शुरू होकर राष्ट्रीय राजमार्ग-7 के पोंटा साहिब-बल्लूपुर खंड को जोड़ेगी और देहरादून जिले में आशारोड़ी सीमा चौकी के पास दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे से मिलेगी.

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ाने और शहर में यातायात की भीड़ को कम करने के उद्देश्य से दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे को जोड़ने वाले 12 किलोमीटर लंबे चार लेन के नये बाईपास का निर्माण कर रहा है. एनएचएआई ने एक बयान में कहा कि यह परियोजना झाझरा से शुरू होकर राष्ट्रीय राजमार्ग-7 के पोंटा साहिब-बल्लूपुर खंड को जोड़ेगी और देहरादून जिले में आशारोड़ी सीमा चौकी के पास दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे से मिलेगी.