पत्तियां हो रहीं छलनी या सूख रहा पौधा…अप्रैल-मई में गन्ने के लिए कहर हैं ये 5 रोग
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Sugarcane diseases : अप्रैल का महीना गन्ने की फसल के लिए घातक है. इस समय तापमान में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, जिस कारण खेतों में नमी की स्थिति बदलने लगती है. इससे कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है. गन्ने की फसल में अप्रैल से जून के महीने में सबसे अधिक अंकुर वेधक कीट का प्रकोप दिखाई देता है. यह कीट गन्ने के पौधे को नष्ट कर देता है. तने के अंदर घुसकर मुख्य कल्ले पर हमला करता है, जिससे बीच वाली पत्तियां सूख जाती हैं. इसी समय पोक्का बोइंग रोग का प्रकोप भी देखने को मिलता है. ऐसे कुल पांच रोग गन्ने पर कहर बनकर टूटते हैं. आइये कृषि एक्सपर्ट से बचाव का तरीका जानते हैं.
अप्रैल में तापमान 40 डिग्री पार कर चुका है. दिन में तेज धूप और रात में हल्की ठंडक के कारण वातावरण में नमी और तापमान में असंतुलन पैदा हो रहा है. इस स्थिति में फफूंद और बैक्टीरिया जनित रोगों का प्रकोप बढ़ जाता है. समय रहते अगर इन कीटों पर ध्यान नहीं दिया गया तो गन्ने की फसल बर्बाद हो जाएगी. इस समय सबसे अधिक पोक्का बोइंग रोग का प्रकोप देखा जाता है. इसमें गन्ने की पत्तियां पर सफेद और पीले धब्बे होने लगते हैं, जिस कारण पौधे की वृद्धि रुक जाती है और पत्तियां मुरझने लगती हैं

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसान गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं. यहां के करीब 8 लाख किसानों में से 5 लाख किसान गन्ने की खेती पर निर्भर हैं. अप्रैल का महीना गन्ने की फसल के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण माना जाता है. इस समय तापमान में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, जिस कारण खेतों में नमी की स्थिति बदलने लगती है. इससे कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है.

अप्रैल के महीने में गन्ने की फसल में स्मट रोग का प्रकोप भी बढ़ जाता है, जिसे काला चूरा रोग भी कहा जाता है. यह रोग लग जाने से गन्ने के पौधों से काला पाउडर जैसा पदार्थ निकलने लगता है, जिससे पौधा कमजोर हो जाता है और वह धीरे-धीरे सूख जाता है. यह रोग अधिक सिंचाई होने के कारण जब एक जगह पानी एकत्र हो जाता है, तब तेजी से फैलता है. अगर खेतों में यह रोग दिखाई दे तो संक्रमित पौधे को तुरंत हटा दें.
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खीरी के कृषि वैज्ञानिक प्रदीप बिसेन लोकल 18 से बताते हैं कि अप्रैल के महीने में अगर सही तरीके से गन्ने की देखभाल नहीं की गई तो किसानों का भारी नुकसान हो सकता है. अप्रैल से जून के महीने तक सिर्फ कीटों का प्रकोप सबसे अधिक रहता है. जिन किसानों को कीटों के बारे में सही से जानकारी नहीं हो पाती है, वह कृषि विज्ञान केंद्र पर पहुंचकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

गन्ने की फसल में इस समय टॉप बोरर कीट का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. थोड़ी सी लापरवाही किसानों के लिए भारी पड़ सकती है. यह एक ऐसा कीट है जो की गन्ने की पत्तियों को छलनी कर देता है, जिस कारण धीरे-धीरे पौधा सूखने लगता है. ऐसे में किसानों को नीम के तेल का भी छिड़काव करना चाहिए. टॉप बोरर कीट एक सुंडी कीड़ा है, जो गन्ने के पौधे की पत्ती के माध्यम से तने में प्रवेश करता है. इस कीट का जीवन चक्र एक साल में 5 से 6 बार हो सकता है.

कृषि वैज्ञानिक के मुताबिक, गन्ने की फसल में माहू तना छेदक जैसे कीटों का प्रकोप अगर दिखाई दे तो सबसे पहले किसान फसल की सिंचाई कर दें. इससे खेत में नमी बनी रहेगी. उसके बाद लेम्बडा साईहेलोथ्रिन 4.9% कीटनाशक का छिड़काव कर सकते हैं.

अप्रैल से जून के महीने में गन्ने की फसल में अंकुर वेधक कीट का प्रकोप भी दिखाई देता है. यह कीट तने के अंदर घुसकर मुख्य कल्ले को नष्ट देता है, जिससे बीच वाली पत्तियां सूख जाती हैं. इससे गन्ने के तने के निचले हिस्से में छोटे-छोटे छेद हो जाते हैं. यह रोग जल भराव या मिट्टी में नमी की कमी होने पर सबसे अधिक प्रभावित करता है. इसके लिए किसान भाई फिप्रोनिल 40% + इमिडाक्लोप्रिड को मिलकर खेतों में स्प्रे कर दें.

किसान भाई गन्ने की फसल में प्रोफेनोफॉस 40% + साइपरमेथ्रिन 4% ईसी दवा का छिड़काव कर सकते हैं. यह कीटनाशक कीटों को खत्म करता है. अगर गन्ने की फसल में चूसक कीटों, सुंडी और ब्लैक बग का प्रकोप दिखाई दे रहा हो तो 750 मिली 1 लीटर प्रति हेक्टेयर कीटनाशक को पर्याप्त पानी (500-600 लीटर) में घोलकर छिड़काव कर सकते हैं.