पीला, सफेद या नीला टैग? बीज खरीदने से पहले जान लीजिए इन रंगों का राज, कभी नहीं होगा नुकसान
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Agriculture Tips for Farmers: खेतों में बंपर पैदावार और रोगमुक्त फसल के लिए सही बीज का चुनाव सबसे पहला और जरूरी कदम है. अक्सर किसान बिना जांचे-परखे बाजार से कोई भी बीज खरीद लेते हैं, जिससे उन्हें बाद में भारी नुकसान उठाना पड़ता है. असल में, बीजों के पैकेट पर लगे पीले, सफेद, नीले और हरे रंग के टैग सिर्फ सजावट के लिए नहीं होते, बल्कि ये बीज की शुद्धता और उसकी असली कैटेगरी की गारंटी देते हैं. कौन से रंग का टैग किस बीज की पहचान है और खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
खेती में अच्छी फसल और मुनाफे के लिए प्रामाणिक बीजों का होना बेहद जरूरी है. सरकारी और प्रामाणिक बीजों पर लगे अलग-अलग रंगों के टैग किसानों को नकली और घटिया क्वालिटी के बीजों के धोखे से सुरक्षित रखते हैं. जब किसान सही टैग देखकर प्रमाणित या आधार बीज चुनते हैं, तो उन्हें बेहतर अंकुरण, मजबूत पौधे और रोगमुक्त फसल मिलती है. आइए जानते हैं कि बीज की अलग-अलग श्रेणियां क्या हैं और उनके टैग के रंगों का क्या मतलब होता है.

न्यूक्लियस बीज यानि मूल बीज. यह सभी बीजों की जननी यानी सबसे शुरुआती बीज होता है, जिसे सीधे प्लांट ब्रीडर (वैज्ञानिकों) की देखरेख में तैयार किया जाता है. इसकी आनुवंशिक और भौतिक शुद्धता पूरी तरह से 100% होती है. यह बीज बहुत ही कम मात्रा में उपलब्ध होता है. इस प्रारंभिक चरण के बीज पर कोई खास रंगीन टैग नहीं लगाया जाता, क्योंकि यह केवल वैज्ञानिकों के अनुसंधान केंद्रों और प्रयोगशालाओं तक ही सीमित रहता है.

ब्रीडर बीज वैज्ञानिकों की सीधी निगरानी में तैयार किया जाता है. न्यूक्लियस बीज से ही ‘ब्रीडर’ यानी प्रजनक बीज तैयार किया जाता है. इसे कृषि विश्वविद्यालयों या अनुसंधान संस्थानों में वैज्ञानिकों की सीधी निगरानी में उगाया जाता है. यह बीज भी 100% शुद्ध होता है और इसका इस्तेमाल आगे के बीज बनाने के लिए होता है. पहचान के लिए इस बीज के थैले पर सुनहरे पीले रंग का टैग लगाया जाता है, जो इसकी उच्च गुणवत्ता को दर्शाता है.
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ब्रीडर बीज से ‘फाउंडेशन’ यानी आधार वर्ष का बीज तैयार किया जाता है. इसे राष्ट्रीय या राज्य बीज निगमों और प्रमाणित प्रगतिशील किसानों के खेतों पर उगाया जाता है. इस बीज की शुद्धता लगभग 99.5% होती है. यह बीज उत्पादन चक्र की सबसे मजबूत कड़ी है. बाजार में असली फाउंडेशन बीज की पहचान के लिए इसके बोरे या पैकेट पर सफेद रंग का टैग लगाया जाता है.

फाउंडेशन बीज से ‘सर्टिफाइड’ यानी प्रमाणित बीज तैयार होता है. यह वही बीज है जिसे राज्य बीज प्रमाणन संस्थाओं की कड़ी जांच के बाद आम किसानों को खेती के लिए बेचा जाता है. इसकी शुद्धता का स्तर बेहतरीन होता है और यह बंपर पैदावार देने में सक्षम है. इस बीज के पैकेट पर हमेशा नीले रंग का टैग होता है, जो इसकी सरकारी प्रामाणिकता की गारंटी है.

‘ट्रूथफुल लेबल्ड’ (टीएफएल) बीज को उत्पादक कंपनियां या प्रगतिशील किसान खुद तैयार करते हैं. इसके लिए सरकारी प्रमाणन की जरूरत नहीं होती, लेकिन बीज की शुद्धता और अंकुरण क्षमता की पूरी जिम्मेदारी खुद निर्माता कंपनी की होती है. इसमें आनुवंशिक शुद्धता थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन यह आम किसानों के लिए किफायती होता है. इस बीज के पैकेट पर हरे रंग का टैग होता है.

अक्सर किसान बिना टैग देखे ही बीज खरीद लेते हैं, जो नुकसान का सौदा साबित हो सकता है. पीला, सफेद, नीला और हरा टैग केवल सजावट के लिए नहीं हैं. ये टैग इस बात का सबूत हैं कि बीज किस प्रक्रिया से होकर गुजरा है. सरकारी और प्रामाणिक बीजों पर लगे ये रंगीन टैग किसानों को नकली और घटिया क्वालिटी के बीजों के धोखे से सुरक्षित रखते हैं.

अशुद्ध या बिना टैग वाले बीजों से फसल में बीमारियां लगने और पैदावार घटने का खतरा हमेशा बना रहता है. जब किसान सही टैग देखकर प्रमाणित या आधार बीज चुनते हैं, तो उन्हें बेहतर अंकुरण, मजबूत पौधे और रोगमुक्त फसल मिलती है. सही बीज पर किया गया थोड़ा सा अतिरिक्त खर्च, फसल कटाई के समय कई गुना मुनाफे के रूप में किसान की किस्मत बदल देता है.

किसान को हमेशा अधिकृत डीलरों या सरकारी केंद्रों से ही बीज खरीदना चाहिए. बीज लेते समय पक्का बिल जरूर मांगें और पैकेट पर लगे टैग के रंग तथा उसकी एक्सपायरी डेट को ध्यान से जांचें. टैग और सील टूटी होने पर बीज हरगिज़ न खरीदें. आपकी यही छोटी सी समझदारी और सतर्कता खेतों में सही मायने में खुशहाली और बंपर पैदावार का रास्ता साफ करेगी.