बलिया का अनोखा पोखरा, जहां स्नान से मिलती है रोगों से राहत! जानिए मान्यता
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उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्थित नवका बाबा का पोखरा वर्षों से आस्था और लोकमान्यताओं का केंद्र बना हुआ है. स्थानीय लोगों का मानना है कि इस पोखरे में स्नान करने से चर्म रोग और प्रेत बाधा से राहत मिलती है. हालांकि इन मान्यताओं की कोई आधिकारिक या वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है, फिर भी हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.
Ballia News: आज हम आपके जनपद बलिया के एक ऐसे पोखरे के बारे में दिखाने और बताने जा रहे हैं, जिसकी मान्यता चौंकाने वाली है. आपने बिल्कुल सही सुना, न केवल इस पोखरे की गहरी मान्यता है, बल्कि यह स्थान भी बेहद फेमस है.

बताया जाता है कि यहां प्रेत बाधा दूर होती है और इस पोखरे में स्नान करने से चर्म रोग जैसी बीमारियां खत्म हो जाती हैं. अब यह आस्था है, चमत्कार है या अंधविश्वास, शायद इस पर कुछ कहना मुश्किल होगा. लेकिन लोक कथाओं के अनुसार, बलिया की धरती का पानी हमेशा से चमत्कारिक रहा है. बताया जाता है कि बलिया के एक गड्ढे के पानी में नहाने से राजा सूरत का कुष्ठ रोग दूर हो गया था. आइए, आज हम इस पोखरे की पूरी मान्यता को विस्तार से जानते हैं.

प्रख्यात इतिहासकार डॉ. शिवकुमार सिंह कौशिकेय ने बताया कि जो तालाब, झीलें या नदियां होती हैं, वे कहीं न कहीं भूमिगत रूप से आपस में जुड़ी होती हैं. खासतौर से उत्तर प्रदेश के जनपद बलिया में जलस्रोतों की बहुत ही बड़ी धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यता है. यहां आपको ऐसे तमाम तालाब और सरोवर मिलेंगे, जिनमें स्नान करने से लोगों को गंभीर बीमारियों से निजात मिलती है. अगर बात बलिया के नवका बाबा की करें, तो यहां भी एक चमत्कारिक पोखरा स्थित है.
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हालांकि, नवका बाबा का यह स्थान देश-दुनिया में विख्यात है. मान्यता है कि यहां आने से प्रेत बाधा से मुक्ति मिलती है. यहां हर समय महिलाएं अपना बाल खोलकर बाबा के दरबार में झूमती नजर आती हैं. बताया जाता है कि उन महिलाओं पर प्रेतात्मा का साया है, इसलिए वे झूम रही हैं. यह चमत्कार है या अंधविश्वास, इसकी पुष्टि आधिकारिक रूप से नहीं की जा सकती.

हालांकि, यहां लोग प्रेत बाधा से मुक्ति पाने की आस लगाए सालों से डेरा डाले हुए आपको मिल जाएंगे. नवरात्र के दौरान तो यहां बाकायदा भूतों का मेला लगता है. वहीं, अगर बात यहां के चमत्कारिक पोखरे की करें, तो इसमें नहाने से चर्म रोग से छुटकारा मिलता है, ऐसी मान्यता है. यही वजह है कि यहां अन्य प्रदेशों से आए लोग भी प्रतिदिन स्नान करते हैं. इतिहासकार ने इसका वैज्ञानिक और भौगोलिक कारण बताते हुए कहा कि यहां का प्रसिद्ध सुरहा ताल, जिसे भारत का 100वां रामसर आर्द्रभूमि स्थल घोषित किया गया है, ऐतिहासिक महत्व रखता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, अयोध्या के राजा सूरत का कुष्ठ रोग बलिया की इसी धरती पर खत्म हुआ था. उनका पूरा शरीर कुष्ठ रोग से गल रहा था, लेकिन इस धरती के पानी के स्पर्श से उन्हें इस भयानक रोग से मुक्ति मिली थी.

इसके अलावा, जिले में कई ऐसे सरोवर हैं, जिनमें अनेकों प्रकार के जीव-जंतु और वनस्पतियां पाई जाती हैं. अनेक दुर्लभ वनौषधियों के संपर्क में रहने के कारण ही इन सरोवरों का पानी चमत्कारिक और औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है. यही मुख्य वजह है कि इससे चर्म रोग जैसी बीमारियां दूर हो जाती हैं. गंगा नदी, घाघरा, विभिन्न ताल, सरोवर, झील और पोखरे आदि सभी प्राकृतिक रूप से आपस में इंटरकनेक्टेड (जुड़े) होते हैं. इसी कड़ी में बलिया के नवका बाबा का पोखरा भी शामिल है.