बाबा रामदेव के सफल होने के बाद बने इल्जामों के पहाड़। पतंजलि आयुर्वेद के हुए 14 दवाऐं बंद ।
पतंजलि आयुर्वेद का एक जाना माना नाम बन गया था। देश के हर व्यक्ति को इसके बारे में पता है। और पतंजलि आयुर्वेद के साथ-साथ बाबा रामदेव का नाम भी काफी मशहूर हो चुका था।लेकिन आई एक खबर से सभी के कान खड़े हो गए।
बताया जाता है कि –
स्वामी रामदेव योग गुरु है, वह योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में काम करते हैं। उन्होंने योगासन और प्राणायाम योग में योगदान दिया है। वह देश-विदेश के कई लोगों को योग सीख चुके हैं।
स्वामी रामदेव के बारे में कुछ खास बातें;-
- उनका जन्म 25 दिसंबर 1965 को हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के सैयद पुर गांव में हुआ था ।
- उन्होंने हरियाणा के शहजाद पुर सरकारी स्कूल में स्कूल शिक्षा हासिल की।
- उन्होंने हरिद्वार के गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय से पुराण वेदों का अध्ययन किया।
- उन्होंने अपने जीवन में पतंजलि के योग और आयुर्वेदिक मेडिकल तकनीक के लोगों के बीच लोकप्रिय किया।
रामदेव बाबा के माता-पिता का नाम-
रामदेव के पिता रामनिवास यादव और माता का नाम गुलाबो देवी है। वह अपने माता-पिता के बड़े बेटे हैं। उनके छोटे भाई भी हैं, जिनका नाम राम भारत है, यह सब पारंपरिक, समाज से संबंध रखते हैं।
दिव्या कोरोनिल किट के बारे में
कोरोनिल किट कोरोना काल में निकला एक आयुर्वेदिक दवा है। जो पतंजलि कंपनी से निकला। इस दवाई से पतंजलि को चार महीने में 250 करोड रुपए कमाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पतंजलि ने अपने प्रचार के जरिए पूरे देश को मूर्ख बनाने की कोशिश की है। और यह सिर्फ एक घटना नहीं। इसके अलावा एक पतंजलि गिलोय घनवटी दवा आयुर्वेदिक औषधि है। लेकिन जब मार्च 2018 में लोगों ने यह दवा खरीदी तो वह अचंभित रह गए चौंक गए, क्योंकि मार्च 2018 में इस दवा के निर्माण तिथि अप्रैल 2018 लिखी गई थी।
2006 में पहला आरोप लगा बाबा रामदेव पर
बाबा रामदेव की लोकप्रियता धीरे-धीरे इतनी बढ़ती चली गई, की दिव्य फार्मेसी की बिक्री भी बढ़ती गई।
विपिन प्रधा, जो 2002-2005 के बीच आश्रम में काम करते थे उन्होंने बताया कि वह हर रात घंटे बैठकर दवा की दुकान से आए पैसे गिनते थे, वह कहते थे कि उन्होंने एक दिन में 22 लख रुपए कमाए।
रामदेव बाबा का पहला विवाद-
लोकप्रियता बढ़ाने के साथ ही बाबा रामदेव को पहली बार विवाद का सामना करना पड़ा 2006 में CPIM की नेता वृंदा करात ने उन पर दिव्य फार्मेसी की कई दवाओं में मानव और पशु के हड्डियों का उपयोग करने का आरोप लगाया था।
उन्होंने दवाओं के नमूने सरकारी प्रयोगशालाओं को भी भेजे। इस बीच कई बड़े राजनेता बाबा रामदेव का बचाव करने आए।
लालू प्रसाद ने यहां तक कहा कि क्या फर्क पड़ता है,अगर दवाइयां में हड्डियां है। जब तक वह कारगर है, यह विवाद ज्यादा दिन तक नहीं चला, क्योंकि दो लैब के दो अलग-अलग रिपोर्ट आए, की दवाइयां में हड्डियां है भी और नहीं भी।
पतंजलि आयुर्वेद कंपनी कैसे बनी
बाबा रामदेव ने योजना बनाई कि अगर हमें आगे बढ़ाना है, तो हमें इसके बारे में स्वयं तय करना होगा।
इस समय बाबा रामदेव की लोकप्रियता भी बढ़ रही थी,और उन्हें अनेक लोगों का समर्थन मिल रहा था इसके बाद उन्होंने यह नई कंपनी पतंजलि आयुर्वेद शुरू करने का फैसला लिया।
इसके बाद इस कंपनी ने भारतीय बाजार को बदल दिया। सबसे पहले इस कंपनी ने आयुर्वेद दवाइयां बेचना शुरू किया, इसके बाद उन्होंने कई अवसरों की तलाश की बाबा रामदेव के पड़ोसी तरुण कुमार ने कहा कि वह अवसरों को पहचानने में माहिर थे। यह कई बार दिखा जैसे 2006 में उत्तराखंड के किसान बाबा रामदेव के पास गए क्योंकि भारी बारिश के कारण उनके आंवले खराब हो गए थे।
बाबा रामदेव के मन में एक ख्याल आया कि, क्यों ना किसानों से बहुत कम दामों पर आंवला को खरीदा जाए ताकि किसानों को कुछ पैसे मिल जाए और हमे आंवला मिल जाए। फिर उन्होंने इस आंवले को पंजाब एग्रो इंडस्ट्रीज कंर्पेरेशन लिमिटेड को आंवला जूस बनाने के लिए दिया। यह आंवला जूस खूब बिकने लगा, ऐसे ही बाबा रामदेव ने अपने योग शिविर में जूस का प्रचार करना शुरू कर दिया।
“इसी तरह पतंजलि के कई प्रोडक्ट निकला और सभी फेमस हो गए और पतंजलि नाम चलना काफी बढ़ गया ”
पतंजलि की सफलता के तीन प्रमुख कारण।
पतंजलि की सफलता में सबसे प्रथम चीज है
- भरोसा – उन्होंने कई दिन लाखों लोगों को योग सिखाया। जिससे उनके ऊपर लोगों का भरोसा जम गया कई लोग करी ब्रेड के बारे में बात करते थे लेकिन भारत में OG निर्माता बाबा रामदेव थे पहली चीज तो स्पष्ट हो गई कि भरोसा सफ़लता का प्रथम कारण।
- सस्ता प्रोडक्ट– पतंजलि के उत्पादन प्रतिस्पर्छियो की तुलना में सस्ते भी थे। 2018 के एक शोध पत्र में पतंजलि और अन्य कंपनियों के उत्पादों की तुलना की गई और पाया गया की पतंजलि के उत्पाद 15 से 30% सस्ते थे, इसके पीछे कारण या था कि पतंजलि अपना कच्चा माल बिजोलिया के माध्यम से नहीं खरीद रही थी। वह सीधे किसानों से खरीद रहे थे जिससे उनके पैसे भी बचत हो रहे थे इसलिए उनके उत्पाद सस्ते दाम पर बिकते थे।
- स्वदेशी ब्रांडिंग– बाबा रामदेव हमेशा कहते रहे हैं, कि उनके उत्पाद आयुर्वेदिक पारंपरिक भारतीय और स्वदेशी है। वास्तव में उनकी टैगलाइन भी प्राकृतिक का आशीर्वाद है, अपने कई भाषणों में उन्होंने कहा कि वह स्वदेशी उत्पाद बना रहे हैं लेकिन बहु राष्ट्रीय कंपनियां हमें लूटने के लिए यहां है।
“यह पतंजलि के सफलता के पीछे का तीन प्रमुख कारण है”
वर्ष 2022 में पतंजलि का राजस्व कितना था।
धीरे-धीरे पतंजलि का साम्राज्य बड़ा होता गया। वित्त वर्ष 2022 में उनके पास 45,000 करोड रुपए का राजस्व था।
उन्होंने खुद कहा कि, पतंजलि का ग्रुप टर्नओवर लगभग 45,000 करोड रुपए के आसपास पहुंच चुका है। बाबा रामदेव ने स्पष्ट रूप से दिखा दिया कि वह एक बहुत ही चतुर व्यवसाय है। और यहां भी उन्हें कोई ऑफर दिखा तो उन्होंने कारोबार का विस्तार किया। लेकिन समस्या यह थी कि विस्तार के कारण उनकी समस्याएं बढ़ाने वाली थी जब उन्होंने आटा नूडल्स लॉन्च किया तो एक समस्या आई।
मार्च 2014 में क्या हुआ?
मार्च 2014 में उत्तर प्रदेश सरकार के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन में खाद निरीक्षक के पद पर कार्यरत, संजय सिंह ने मैगी के पैकेट में एक लेबल देखा। जिसमे लिखा की कोई अतिरिक्त MSG नहीं । उन्होंने मैगी के कुछ नमूने लिए और जून 2014 में उन्हें कोलकाता की केंद्रीय खाद प्रयोगशाला में भेजा।
उन्हें क्या मिला ?
उन्होंने पाया कि मैगी में विज्ञापन में हजार गुना अधिक सीसा है। उत्तर प्रदेश के कई स्थानीय समाचार चैनलों ने इस खबर को प्रचार करना शुरू कर दिया। लेकिन नेस्ले ने कोई कार्रवाई नहीं की उन्होंने बताया कि लैब में किए गए परीक्षित मैं ग्लूटामैट पाया गया। जो कई खाद्य पदार्थ में प्राकृतिक रूप में पाया जाता है। हमने MSG नहीं मिलाया लेकिन पूरे 1 साल बाद 6 जून 2015 को भारत सरकार ने पूरे देश में मैगी की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया। जिससे नेस्ले का 500 करोड़ का नुसकान हुआ।उसके बाद पतंजलि ने अपना प्रोडक्ट आटा नूडल्स लॉन्च किया।जिससे उनका यह आटा नूडल्स प्रोडक्ट खूब अच्छे से बिकने लगा। क्योंकि नेस्ले का मैगी प्रोडक्ट बैन हो चुका था। और लोग पतंजलि के आटा नूडल्स खरीदने लगे।
ASCI ने पतंजलि के विज्ञापनों की जांच की तो क्या निकला?
हमारे देश में कंपनियों के विज्ञापनों की जांच करने वाली भारतीय विज्ञापन मानव परिषद ने जब शिकायतें मिलनी शुरू हो गई तो पतंजलि की जांच शुरू हुई।
ASCI ने पतंजलि के 33 विज्ञापनों की जांच की जिनमे हेयर ऑयल, वाशिंग पाउडर और टूथपेस्ट के लिए और उन्हें पता चला कि पतंजलि 33 में से 25 विज्ञापनों में झूठ बोल रही है।
उन्होंने पाया कि पतंजलि के हेयर क्लींजर और तेल के एक विज्ञापन में यह दिखाया गया था, कि यह कैंसर को रोक सकता है, क्योंकि इसमें खनिज तेल नहीं होता।
पतंजलि ने अभी कहा कि उसके प्रति स्पर्श थी। अपने उत्पादों में सरसों के तेल में एक्शन नमक खतरनाक रसायन का इस्तेमाल कर रहे हैं जो तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन यह भी झूठ था।
पतंजलि पर सबसे बड़ी खबर कोविद के दौरान आई।
जब देश में कोविद की लहर थी। और लाखों मामले सामने आए तब 23 जून 2020 को पतंजलि ने कोरोनिल किट लॉन्च की और दावा किया कि, यह आपको कोविद से बचा सकती है।
कोरोनिल की किट में तीन प्रोडक्ट थे,दो गोलियों के पैकेट कोरोनिल स्वसारी वटी जो आयुर्वेदिक दवाई थी। और एक तेल की बोतल अणु तेल इस पूरे किट को आप 545 रू में खरीद सकते हैं।
कोरोनिल किट के उपर आचार्य बाल कृष्ण का बयान
आचार्य बाल कृष्ण ने कहा कि कोरोनिल किट दुनिया की पहली आयुर्वेदिक दवा है। जो कोविद के लिए सक्षम आधारित दवा है।
और उसे समय कोई भी कोविद वैक्सीन सार्वजनिक रूप में उपलब्ध नहीं थी 6 महीने बाद कोविद वैक्सीन का परीक्षण शुरू हुआ। और उससे पहले कोरोनिल किट लॉन्च हो गई थी।
बाबा रामदेव ने कहा कि यह दवा खाने के बाद 69 % मरीज 3 दिन में ठीक और 7 दिन में 100% मरीज ठीक हो जाएंगे। और जिस दिन रामदेव ने यह कहा उसी दिन आयुष सरकारी मंत्रालय ने कहा कि किसी भी मंत्रालय या चिकित्सा प्राधिकरण में या साबित नहीं किया कि कोरोनिल वास्तव में काम करता है।
पतंजलि के कौन-कौन सी दवाइयां बंद हो गई।
उत्तराखंड सरकार ने पतंजलि के 14 उत्पादों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं इन उत्पादों में यह शामिल है।
- श्वासारि गोल्ड
- श्वासारि वटी
- ब्रोंकोम
- श्वासारि प्रवाही
- श्वासारि अवलेह
- मुत्का वटी एक्स्ट्रा पावर
- लिपिडोम
- बीपी ग्रिट
- मधुग्रित
- मधुनाशिनी वटी एक्स्ट्रा पावर
- लिवामृत एडवांस
- लिवोग्रिट
- आइग्रिट गोल्ड
- पतंजलि दृष्टि आई ड्रॉप
इसमें अस्थमा , ब्रोंकाइटिस ,और डायबिटीज के लिए रामदेव की पारंपरिक दवाएं भी शामिल है ।
इन उत्पादों पर बैन लगने की वजह;
भ्रामक विज्ञापनों के मामले में सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद बाबा रामदेव की पतंजलि को एक और बड़ा झटका लगा है।
उत्तराखंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने बाबा रामदेव की कुछ दवाइयां पर प्रतिबंध लगा दिया है।
पतंजलि ने दवा को लेकर बार बार भ्रामक विज्ञापन छापे थे।
इस मामले में , उत्तराखंड सरकार ने 16 अप्रैल 2024 को हरिद्वार के औषधि निरीक्षक ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज की थी।
पतंजलि के कुल कितने प्रोडक्ट हैं
बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड करीब 500 तरह के उत्पाद बनती है। पतंजलि के कई तरह के उत्पाद है। जैसे कि, घी ,चवनप्राश, आयुर्वेदिक दवाई, केश कांति, शहद आटा नूडल्स दूध, दही, छाछ, पनीर और कई तरह के फूड प्रोडक्ट।
पतंजलि के कुछ और उत्पाद;
- घृतकुमारी का रस
- आंवला का रस चूर्ण और गोलियां
- पतंजलि दिव्य दंत मंजन
- पंचगव्य साबुन
- शैंपू
- कायाकल्प वटी
- अर्शकल्प वटी
- ईसबगोल की भूसी
- एलोवेरा जेल
- त्रिफला चूर्ण
- पतंजलि फेस वॉश
- दिव्य पेय
- पतंजलि कच्ची घानी सरसों का तेल
पतंजलि ने साल 2018 में डेरी प्रोडक्ट फ्रोजन सब्जी सोलर पैनल, सोलर लाइट और पीने का फिल्टर पानी भी लॉन्च किया था। साल 2023 में पतंजलि ने न्यूट्रास्यटिकतस हेल्थ बिस्किट न्यू ट्रेला मिलेट बेस्ट प्रोडक्ट और प्रीमियम ड्राई फ्रूट्स कई नई प्रोडक्ट लॉन्च किए थे।
“सही समय पे सरकार ने यह सभी प्रोडक्ट को बंद कर दिया नही तो यह दवाइयां मानुष की जान न बचा कर और जान ले लेती और यह मानव जीवन के लिए हानिकारक साबित हो सकता था।”