बीएचयू में लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम जैसी लाइब्रेरी, एक साथ पढ़ सकते हैं 4000 छात्र

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बीएचयू में लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम जैसी लाइब्रेरी, एक साथ पढ़ सकते हैं 4000 छात्र


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बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी को सर्व विद्या की राजधानी कहा जाता है.यह यूनिवर्सिटी एशिया की सबसे बड़ी आवासीय यूनिवर्सिटी है.इस यूनिवर्सिटी में एक सेंट्रल लाइब्रेरी भी है. खास बात ये है की यह लाइब्रेरी लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम लाइब्रेरी के तर्ज पर बनाया गया है.इस लाइब्रेरी में किताबों का खजाना भरा हुआ है. बीएचयू की सेंट्रल लाइब्रेरी देश की सबसे बड़ी लाइब्रेरी में से एक है.इस लाइब्रेरी में 16 लाख से ज्यादा पुस्तकों का अनोखा संग्रह है. इसके अलावा यहां 14 से 16 वीं शताब्दी की दुर्लभ पांडुलिपियां भी रखी गई है. इस लाइब्रेरी में इसके अलावा भी कई दुर्लभ अभिलेख रखें हुए हैं.

बीएचयू की सेंट्रल लाइब्रेरी देश की सबसे बड़ी लाइब्रेरी में से एक है.इस लाइब्रेरी में 16 लाख से ज्यादा पुस्तकों का अनोखा संग्रह है. इसके अलावा यहां 14 से 16 वीं शताब्दी की दुर्लभ पांडुलिपियां भी रखी गई है. इस लाइब्रेरी में इसके अलावा भी कई दुर्लभ अभिलेख रखें हुए हैं.

10 लाख से ज्यादा किताबें ऑनलाइन मोड में

इन सब के अलावा इस लाइब्रेरी में गवर्मेंट डॉक्यूमेंट,10 हजार से ज्यादा शोधपत्र यहां रखें गए है. इन सब के अलावा यहां 10 लाख से ज्यादा किताबें ऑनलाइन मोड भी पड़ी हुई है. इस लाइब्रेरी में हर दिन करीब 4 हजार स्टूडेंट्स पढ़ने आतें हैं.

राउंड टेबल

इस लाइब्रेरी के मेन हॉल में गोल राउंड टेबल है.ऐसा ही राउंड टेबल लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम लाइब्रेरी में है. आम तौर पर ऐसी लाइब्रेरी देश के दूसरे यूनिवर्सिटी में नहीं है.बदलतें दौर में अब इसका विस्तार तक यहां साइबर लाइब्रेरी भी बनाया गया है.

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महामना ने लिया था संकल्प

बीएचयू के प्रोफेसर प्रवीण सिंह राणा ने बताया कि महामना पण्डित मदन मोहन मालवीय 1931 में लंदन में आयोजित राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए थे.इसी कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय में ऐसी लाइब्रेरी बनाने का संकल्प लिया.

यहां से मिली थी आर्थिक मदद

लंदन से वापस लौटने के बाद महामना भारतरत्न पण्डित मदन मोहन मालवीय ने इसपर काम शुरू किया.इसके लिए वो महाराष्ट्र के बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ से मिलें. उन्हें अपना प्रस्ताव रखा वो तैयार हो गए. उन्होंने इसके लिए आर्थिक सहयोग भी किया.

1941 में बनकर हुआ तैयार

उसके बाद इस लाइब्रेरी का निर्माण शुरू हुआ.साल 1941 में सयाजीराव गायकवाड़ सेंट्रल लाइब्रेरी बनकर तैयार हुआ. हालांकि इस लाइब्रेरी के नींव 1917 में ही पड़ी थी.उस समय बीएचयू के सेंट्रल लाइब्रेरी सेंट्रल हिन्दू स्कूल में था.

पहले सेंट्रल हिन्दू स्कूल में था लाइब्रेरी

बाद में इसको वहां से कैम्पस में शिफ्ट हुआ. साल 1921 में आर्ट्स फैकल्टी में बीएचयू की सेंट्रल लाइब्रेरी में चलना शुरू हुआ.वर्तमान में बीएचयू की सेंट्रल लाइब्रेरी यूनिवर्सिटी सिस्टम में चलने वाली एशिया की सबसे बड़ी लाइब्रेरी में से एक है.

बाहर के स्टूडेंट्स के लिए व्यवस्था

इस लाइब्रेरी में शोध के लिए बाहरी स्टूडेंट्स भी आतें है.जो यहां शोध और दूसरे काम के लिए यहां आते है.बीएचयू की यह लाइब्रेरी अपने आप में अनोखी लाइब्रेरी है.



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