बोलने और सुनने में दिक्कत वाले बच्चों का चित्रकूट में होगा मुफ्त इलाज, कराएं पंजीकरण
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Chitrakoot news: स्वास्थ्य विभाग की ओर से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत ऐसे बच्चों का पंजीकरण शुरू कर दिया गया है, जिन्हें सुनने या बोलने में परेशानी हो रही है,इस योजना का लाभ 5 वर्ष तक के बच्चों को दिया जाएगा. इसके लिए अभिभावकों को किसी बड़े शहर में भटकने या इलाज में भारी खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी,पूरी प्रक्रिया स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में नि:शुल्क कराई जाएगी.
चित्रकूटः बुंदेलखंड का चित्रकूट जिला लंबे समय से स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और आर्थिक तंगी जैसी समस्याओं से जूझता रहा है. यहां के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले कई परिवार आज भी पैसों की कमी के कारण अपने बच्चों का सही इलाज नहीं करवा पाते हैं, खासकर छोटे बच्चों में सुनने और बोलने से जुड़ी समस्याएं समय पर सामने नहीं आ पातीं, जिससे बच्चे बड़े होने तक उसी परेशानी से संघर्ष करते रहते हैं. ऐसे परिवारों के लिए अब राहत भरी खबर है,क्योंकि चित्रकूट में अब ऐसे बच्चों का निशुल्क में इलाज कराया जाएगा.
5 साल तक के बच्चों को सुविधा
बता दे कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत ऐसे बच्चों का पंजीकरण शुरू कर दिया गया है, जिन्हें सुनने या बोलने में परेशानी हो रही है,इस योजना का लाभ 5 वर्ष तक के बच्चों को दिया जाएगा. इसके लिए अभिभावकों को किसी बड़े शहर में भटकने या इलाज में भारी खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी,पूरी प्रक्रिया स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में नि:शुल्क कराई जाएगी.
ऐसे कराएं रजिस्ट्रेशन
चित्रकूट के खोह स्थित सरकारी अस्पताल में इसके लिए विशेष DEIC केंद्र बनाया गया है, यहां अभिभावक अपने बच्चों को लेकर पहुंच सकते हैं और जांच के बाद उनका रजिस्ट्रेशन कराया जाएगा. MCH विंग खोह में DEIC के अंतर्गत नियुक्त डॉ संदीप सिंह और डॉ एश्वर्या सिंह द्वारा जरूरत के अनुसार बच्चों को नजदीकी शहर कानपुर या प्रयागराज लखनऊ या अन्य विशेषज्ञ अस्पतालों में रेफर किया जाएगा, जहां उनका इलाज RBSK कार्यक्रम के तहत पूरी तरह मुफ्त कराया जाएगा.
फ्री में हो रहा इलाज
वही इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी DEIC आरबीएसके डॉक्टर पवन कुमार सिंह ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि भारत सरकार की इस योजना का उद्देश्य छोटे बच्चों में सुनने और बोलने की समस्या की समय रहते पहचान कर उनका इलाज कराना है. उन्होंने बताया कि कई बार बच्चे जन्म से या अन्य कारणों से सुन नहीं पाते, जिसकी वजह से उनके बोलने की क्षमता भी प्रभावित हो जाती है, अगर समय रहते इलाज हो जाए तो बच्चे काफी हद तक सामान्य रूप से सुनना और बोलना शुरू कर देते हैं.
इलाज के लिए अभिभावकों को अपना आधार कार्ड और बच्चे का आधार कार्ड, यदि बना हो, लेकर खोह स्थित केंद्र पर पहुंचना होगा, वहां विशेषज्ञ टीम बच्चों की प्राथमिक जांच करेगी और आगे की प्रक्रिया पूरी कराएगी.उनका कहना है कि कई बार कई गरीब परिवार इलाज महंगा होने के कारण बच्चों को अस्पताल नहीं ले जा पाते थे, लेकिन अब सरकार की इस योजना के जरिए उन्हें निशुल्क सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें