भूजल संकट: मेरठ में बारिश से पहले साफ कर लें हार्वेस्टिंग सिस्टम, दी चेतावनी
Last Updated:
Meerut Groundwater Crisis: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तेजी से गिरता भूजल स्तर अब भविष्य के लिए एक बड़ा संकट बनता जा रहा है. अगर समय रहते जन-भागीदारी से कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में शुद्ध पेयजल मिलना भी दूभर हो जाएगा. आगामी मानसून को इस संकट से उबरने का एक बड़ा जरिया बताते हुए मेरठ भूगर्भ जल विभाग की सीनियर जियोफिजिस्ट अधिकारी अदिति सिंह ने ‘लोकल 18’ से खास बातचीत में जल संचय की अहमियत समझाई. उन्होंने साफ कहा कि बारिश से पहले वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की सफाई और अमृत सरोवरों का रखरखाव ही हमें इस बड़े संकट से बचा सकता है.
Meerut Groundwater Crisis: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ सहित अन्य जनपदों की अगर बात की जाए, तो लगातार भूजल में गिरावट देखने को मिल रही है. इसका सीधा असर अब आम लोगों के जीवन पर भी पड़ने लगा है. क्योंकि जिस तरह से पानी के स्तर में गिरावट आ रही है, उससे भविष्य में स्वच्छ जल पीने का संकट भी उत्पन्न होगा. इसी को लेकर सरकार द्वारा भी विभिन्न प्रकार के जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं. इन्हीं बातों का विशेष ध्यान रखते हुए लोकल 18 की टीम द्वारा मेरठ भूगर्भ जल विभाग की सीनियर जियोफिजिसिस्ट अधिकारी अदिति सिंह से खास बातचीत की गई.
मानसून का कर सकते हैं बेहतर उपयोग
लोकल-18 की टीम से खास बातचीत करते हुए भूगर्भ जल विभाग की सीनियर जियोफिजिसिस्ट अधिकारी अदिति सिंह ने बताया कि जल्द ही मानसून का आगाज होगा. ऐसे में मानसून के दौरान होने वाली बारिश के स्वच्छ जल का उपयोग करते हुए यदि हम उसे धरातल में पहुंचाएं, तो यह हम सभी के जीवन के लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकता है. रेन वाटर हार्वेस्टिंग सहित अन्य माध्यमों से सीधे भूगर्भ में यह जल जाएगा, तो भविष्य में वही जल हमारे लिए जीवन साबित होगा. क्योंकि बरसात के समय जितनी बारिश होती है, उसे जन-भागीदारी के माध्यम से अगर बेहतर तरीके से संचित किया जाए, तो वह सभी के लिए काफी अच्छा होगा.
वॉटर हार्वेस्टिंग की साफ-सफाई का रखें विशेष ध्यान
उन्होंने बताया कि जिन लोगों ने भी वॉटर हार्वेस्टिंग सहित अन्य वैकल्पिक माध्यमों पर कार्य किया है, वे सभी लोग अपने वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की अच्छे से सफाई कर लें. क्योंकि जो स्वच्छ जल है, वही धरातल में जाना चाहिए और उसका ही सदुपयोग हो सकता है. उन्होंने कहा कि अगर हार्वेस्टिंग सिस्टम की अच्छे से साफ-सफाई नहीं होगी, तो हम जल संचय नहीं कर पाएंगे. इसलिए अभी समय है कि सभी लोग सतर्क होते हुए वर्षा के जल का संचय कर सकें.
उन्होंने बताया कि मेरठ से संबंधित कई ऐसे औद्योगिक क्षेत्र हैं, जहां पर जल स्तर लगातार गिरावट की तरफ जा रहा है. ऐसे में विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं कि सभी लोगों को जागरूक करते हुए जल संचय किया जाए. उन्होंने बताया कि मेरठ में ‘अमृत सरोवर योजना’ के तहत विभिन्न तालाबों का भी निर्माण किया गया है, जिससे जल संचय की दिशा में बेहतर कार्य किया जा सके. बताते चलें कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय सहित विभिन्न स्थानों पर वॉटर हार्वेस्टिंग के लिए बेहतर इंतजाम किए गए हैं, लेकिन जिस तरह से उनकी साफ-सफाई होनी चाहिए, वह अभी देखने को नहीं मिली है. ऐसे में अगर वर्षा से पहले यह सभी कार्य हो जाएं, तो निश्चित तौर पर परिणाम काफी बेहतर होंगे.
About the Author
राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें