मन्नतों से जुड़ा 400 साल पुराना पोखरा, सूफी संत की कहानी सुनकर रह जाएंगे हैरान

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मन्नतों से जुड़ा 400 साल पुराना पोखरा, सूफी संत की कहानी सुनकर रह जाएंगे हैरान


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उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में स्थित करीब 400 साल पुराना एक ऐतिहासिक पोखरा आज भी स्थानीय लोगों के बीच विशेष महत्व रखता है. माना जाता है कि इसका निर्माण सूफी संत मीर सम्सी ने कराया था. इस पोखरे से जुड़ी कई स्थानीय मान्यताएं और लोककथाएं प्रचलित हैं, जिसके कारण यह आज भी श्रद्धा और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

मऊः मऊ जिले का एक ऐसा पोखरा जो 400 वर्ष पुराना हो और आज भी उसे पोखरे पर कब्जा करने से लोग डरते हो. क्योंकि यह पोखरा आम पोखरा नहीं है. लगभग 52 बिगहा में बना यह पोखरा आज भी लोगों के लिए श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है. मान्यता है कि यह पोखरा एक सूफी संत ने खुदवाया था और यह अभीश्राप दिया था कि जो इस पोखरे पर कब्जा करेगा वह परेशान हो जाएगा.

लोकल 18 से बात करते हुए करहा निवासी वकील बताते हैं कि उनके यहां लगभग 400 वर्ष पूर्व एक पोखरा की खुदाई की गई है. इस पोखरे की खुदाई सूफी संत मीर सम्सी द्वारा कराई गई है. क्योंकि एक बादशाह हुआ करते थे वह सरजू महाराज के यहां गए उन्हें बाल बच्चे नहीं हुआ करते थे तो उन्हें सरजू महाराज ने यह बताया कि आप चले जाइए सूफी संत मीर सम्सी बाबा के यहां आपका संकट वहा दूर हो जाएगा. वह उनके पास पहुंचे तो अपनी परेशानियां बताई बाबा ने उन्हें उपाय बताया और कहा कि जाइए आपके बाल बच्चे हो जाएंगे. जब बादशाह के बाल बच्चे हो गए तो वह काफी जेवरात और आभूषण लेकर बाबा के यहां पहुंचे और देने लगे.

सूफी संत मीर सम्सी बाबा ने कहा कि मैं तो फकीर हूं इस आभूषण और जेवरात का क्या करूंगा, ले जाइए इसे आप गरीबों में दान कर दीजिए. लेकिन बादशाह ने इसे नकार दिया और आभूषण और जेवरात नहीं छोड़कर चले गए और काहे की बाबा यहां आप एक आलीशान भवन बनाकर रखिए.

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आपके यहां ऐसे झोपड़पट्टी में नहीं रहना है. लेकिन सूफी संत ने आलीशान मकान तो नहीं बनवाया लेकिन बादशाह के द्वारा दिए गए जेवरात और आभूषण के पैसे से गरीबों को पानी के लिए परेशानी ना हो उसके लिए उन्होंने एक बड़े पोखर की खुदाई करवाया. यह पोखरा लगभग 52 बीघा में आज भी कागज में दर्ज है. और उसे समय उन्होंने यह अभीश्राप दिया कि इस पोखरे पर यदि कोई कब्जा करेगा तो वह परेशान हो जाएगा जो आज भी उदाहरण के तौर पर देखा जाता है.

हालांकि कागज में तो यह पोखरा 52 बीघा का है लेकिन मौके पर पोखर की लंबाई चौड़ाई कम है लेकिन आज भी पोखर की जमीन पर यदि कोई कब्जा करना चाहता है तो वह परेशान हो जाता है. कई बार ऐसा हुआ है कई लोगों ने कब्जा करने की कोशिश किया है तो वह लंगड़ लूला और अन्य बीमारियों से परेशान हो गए हैं. हार मन कर उन्हें इस पोखरे की जमीन को छोड़ने पड़ी. आज भी बाबा का चमत्कार माना जाता है और यहां लोग उनके बड़े ही श्रद्धा भाव से पूजा पाठ करते हैं.

यहां हर किसी की मन्नत भी पूरी होती है. लगभग 400 वर्ष होने के बाद भी यह पोखरा आज तक कभी सुखा नहीं है हालांकि शासन प्रशासन की इस पोखरे पर नजर नहीं पड़ी जिसके वजह से आज यह दुर्व्यवस्था की मार झेल रहा है. लेकिन आज भी लोग इस पोखरे पर हाथ पैर धुलकर सूफी संत के मजार पर जाकर पूजा पाठ करते हैं.

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