महिलाओं में बढ़ रही है गॉलब्लैडर स्टोन-फेफड़ों की समस्या, जानिए क्या है कारण

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महिलाओं में बढ़ रही है गॉलब्लैडर स्टोन-फेफड़ों की समस्या, जानिए क्या है कारण


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स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए प्रो. कुमार का सुझाव है कि लोग व्यक्तिगत सफाई, शुद्ध पानी का सेवन, और संतुलित खान-पान को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं. फेफड़ों को सुरक्षित रखने के लिए पेड़-पौधे लगाएं, धूल से …और पढ़ें

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बिहार के वैशाली में ऑपरेशन के दौरान महिला के पेट में तौलिया छोड़ दिये जाने का मामला सामने आया. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पूर्वांचल के तराई इलाकों की आबोहवा अब बीमारियों की बड़ी वजह बनती जा रही है. गोरखपुर यूनिवर्सिटी के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर अभय कुमार की हालिया रिसर्च में यह खुलासा हुआ है कि इस इलाके के लोग खासतौर पर दो बीमारियों से ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. फेफड़ों का संक्रमण और महिलाओं में गॉलब्लैडर स्टोन की बढ़ती समस्या.

प्रो. अभय कुमार के मुताबिक, तराई इलाका सालभर अधिक नमी और बारिश झेलता है. यह ह्यूमिड वातावरण जब बढ़ती धूल-मिट्टी से मिलता है, तो यह फेफड़ों के लिए घातक बन जाता है. ब्रोंकाइटिस जैसे लंग्स इंफेक्शन के मामले यहां आम होते जा रहे हैं. वातावरण में मौजूद महीन धूलकण (Dust Particles) जब सांस के जरिए शरीर में जाते हैं, तो फेफड़ों की कार्यप्रणाली पर बुरा असर डालते हैं. लगातार ऐसा होने पर संक्रमण पनपता है और सांस लेने में तकलीफ शुरू हो जाती है.

महिलाओं में बढ़ती पथरी की परेशानी  

तराई की महिलाओं के लिए और भी चिंताजनक है गॉलब्लैडर स्टोन की तेजी से बढ़ती समस्या. प्रो. कुमार बताते हैं कि यहां की जलवायु के साथ-साथ पानी की गुणवत्ता और खान-पान की आदतें भी इस बीमारी को जन्म दे रही हैं. पानी में मौजूद कुछ खास तरह के मिनरल्स पथरी बनने की प्रक्रिया को तेज करते हैं. इसके साथ ही टाइफाइड का कारण बनने वाला साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया कई बार पेट में लंबे समय तक सक्रिय रहता है और यही आगे चलकर गॉलब्लैडर में स्टोन की वजह बनता है.

क्या हैं बचाव के उपाय  

स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए प्रो. कुमार का सुझाव है कि लोग व्यक्तिगत सफाई, शुद्ध पानी का सेवन, और संतुलित खान-पान को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं. फेफड़ों को सुरक्षित रखने के लिए पेड़-पौधे लगाएं, धूल से बचें और जरूरत हो तो मास्क पहनें. वहीं, महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए और पानी की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना चाहिए. इस रिसर्च के जरिए पूर्वांचल के तराई क्षेत्रों के लिए एक चेतावनी जरूर दी गई है कि, समय रहते ध्यान न दिया गया तो ये समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं.

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