मेरठ में दिखेगा जगन्नाथ पुरी जैसा नजारा, चांदी के रथ पर नगर भ्रमण करेंगे भगवान जगन्नाथ
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मेरठ ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है. यहां सदर स्थित बिलेश्वर नाथ मंदिर से निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा अपनी अनोखी परंपरा और भव्यता के लिए जानी जाती है. चांदी के विशाल रथ पर सवार भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मेरठ प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के आगाज के लिए जाना जाता है. ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ धार्मिक दृष्टि से भी यह शहर बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. रावण की ससुराल के रूप में प्रसिद्ध मेरठ में कई प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर हैं, जिनके प्रति श्रद्धालुओं में गहरी आस्था और जिज्ञासा देखने को मिलती है.
ऐसा ही नजारा मेरठ सदर स्थित बिलेश्वरनाथ मंदिर में भी देखने को मिलता है, जहां परिसर में भगवान जगन्नाथ अपने परिवार सहित विराजमान हैं. हर वर्ष यहां भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा विशेष श्रद्धा और भव्यता के साथ निकाली जाती है. इस दौरान भगवान जगन्नाथ, बलदेव और बहन सुभद्रा 450 किलो चांदी से बने रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं.
इस वर्ष भी मंदिर प्रशासन ने रथ यात्रा की भव्य तैयारियां की हैं. मेरठ में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान उत्सव जैसा माहौल देखने को मिलता है, जिसमें बड़ी संख्या में शहरवासी शामिल होते हैं. रथ यात्रा आयोजन समिति के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की यह रथ यात्रा देश की आजादी से पहले से ही निरंतर इसी परंपरा के साथ निकाली जा रही है.
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आयोजन समिति के अनुसार, जब मेरठ में इस रथ यात्रा की शुरुआत हुई थी, तब भगवान जगन्नाथ पहली बार 65 किलो चांदी के रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकले थे. इसके बाद से यह परंपरा लगातार जारी है. समिति का कहना है कि हर वर्ष रथ की मरम्मत कराई जाती है और उसमें भी चांदी का ही उपयोग किया जाता है. लगातार मरम्मत और चांदी जुड़ने के कारण वर्तमान में इस रथ का वजन 450 किलो से अधिक हो चुका है, जिस पर भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते हैं.
उन्होंने बताया कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के साथ विभिन्न धार्मिक झांकियां भी निकाली जाती हैं. इनमें भगवान श्रीगणेश, खाटू श्याम, श्रीराधा-कृष्ण सहित अन्य देवी-देवताओं की झांकियां शामिल होती हैं. यह रथ यात्रा रावण की ससुराल से जुड़े क्षेत्र से शुरू होकर भैंसाली मैदान, दालमंडी, बेकर स्ट्रीट, सदर, थाना सदर बाजार, चौक बाजार, मुंबई बाजार, हनुमान चौक, आबू लेन और भारत चौक होते हुए गंज बाजार व ढोलकी मोहल्ला से गुजरकर पुनः मंदिर परिसर में संपन्न होती है.
उन्होंने बताया कि जिस तरह जगन्नाथ पुरी में श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के रथ को अपने हाथों से खींचते हैं, उसी तरह का दृश्य मेरठ में भी देखने को मिलता है. यहां भी श्रद्धालु चांदी के रथ पर विराजमान भगवान जगन्नाथ के रथ को विशाल रस्सियों की मदद से अपने हाथों से खींचते हैं. यह परंपरा रथ यात्रा का प्रमुख आकर्षण मानी जाती है.
जिस परिसर में भगवान जगन्नाथ परिवार सहित विराजमान हैं, उसी मंदिर परिसर में भगवान भोलेनाथ बिलेश्वरनाथ के रूप में स्थापित हैं. मान्यता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी प्रतिदिन इस मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना किया करती थीं. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ ने मंदोदरी को मनचाहा वर मांगने के लिए कहा था. इसके बाद मंदोदरी ने रावण जैसा विद्वान पति मांगा था.
बताते चलें कि भगवान श्री जगन्नाथ मंदिर से 16 जुलाई 2026 को भव्य रथ यात्रा निकाली जाएगी. ऐसे में जो भी श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होना चाहते हैं, वे सम्मिलित होकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन का लाभ उठा सकते हैं. मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं और उनके दुखों को दूर करते हैं.