राम जी के चिरई, राम जी के खेत, खा लअ चिरई भर-भर पेट! कहानी चिरैया बाबा की
बलिया: यह धरती न केवल क्रांतिकारियों की है. बल्कि सिद्ध संतों और अद्भुत लोकपरम्पराओं के साथ भक्ति में शक्ति का संगम भी है. जी हां बिल्कुल सही सुना आपने, इसी पवित्र मिट्टी के जनाड़ी गांव में जन्मे एक ऐसे संत, जिनका नाम सुनते ही लोगो के सिर श्रद्धा से झुक जाते हैं. कहते हैं कि बाबा न केवल इंसानों के लिए हैं. बल्कि पक्षियों के भी संत थे. जहां बाबा बैठ जाए, वहां गौरैया, तोता और तमाम चिड़ियां अपने आप आकर उनके शरीर और आसपास मंडराने लगती थीं. इसी अलौकिक दृश्य के बाद शुरू होती है, चिरैया बाबा की कहानी.
चिरैया बाबा के बारे में क्या कहते हैं इतिहासकार
प्रख्यात इतिहासकार डॉ. शिवकुमार सिंह कौशिकेय ने कहा कि, चिरैया बाबा रामानंद परंपरा के महान सिद्ध संत थे. उसी परंपरा में कबीर और रैदास जैसे महापुरुष भी हुए थे, जिन्होंने समाज में बराबरी और मानवता का संदेश दिया था. चिरैया बाबा ने भी गुरु रामानंद के विचारों को गांव-गांव पहुंचाने का काम किया था. बाबा का संदेश साफ था कि राम सबके हैं, खेत भी राम के, जीव-जंतु भी राम के ही हैं. जाति, धर्म और ऊंच-नीच से ऊपर उठकर बाबा ने प्रेम और समानता का जोरदार संदेश दिया था.
एक ही समय पर कई जगह दिखते थे चिरैया बाबा
आज भी जनपद बलिया के आमघाट में चिरैया बाबा की जिंदा समाधि स्थल वाला मंदिर आस्था का बहुत बड़ा केंद्र बना हुआ है. मान्यता के अनुसार, जो भी व्यक्ति सच्चे मन से बाबा की समाधि पर माथा टेकता है, उसकी हर मनोकामना जरूरी पूरी होती है. चिरैया बाबा के बारे में कई चमत्कारी कथाएं भी सुनाई जाती हैं. कहा जाता हैं कि, वे एक ही समय अलग-अलग स्थानों पर दिखाई देते थे. कभी मठिया पर, कभी (अन्य प्रदेश/जनपद), कभी गंगा घाट पर तो कभी किसी भक्त के द्वार पर खड़े मिलते थे. बाहर नौकरी करने वाले लोग बताते थे.
राम जी के चिरई, राम जी के खेत… बाबा की प्रसिद्ध लाइन
बाबा का सबसे प्रिय वाक्य था कि राम जी के चिरई, राम जी के खेत, खाल चिरई भर-भर पेट. यह न केवल एक पंक्ति है, बल्कि प्रकृति, प्रेम और समानता का संदेश भी है. चिरैया बाबा की कहानी आज भी बलिया की लोकआस्था में जीवित है, जहां इंसान और पक्षियों के बीच प्रेम का ऐसा रिश्ता शायद ही कहीं और देखने को मिला हो, चिरैया बाबा से लाखों लोगों कि आस्था जुड़ी हुई है.
एक बार बाबा के शरण में गए फिर कभी किसी जंतु ने नहीं काटा
अयोध्या से बाबा की सेवा करने आए सत्यम शरण ने कहा कि, बताया जाता है कि, यह चिरैया बाबा की तपोस्थली है. यह बहुत ही सिद्ध पुरुष थे. जानकारी के मुताबिक, प्राचीन समय में यहां एक व्यक्ति को बिच्छू ने काट लिया, तो वह बाबा के शरण में गया, उसके बाद उक्त व्यक्ति को कभी भी कोई जंतु ने नहीं काटा. यह बहुत रमणीय स्थान है, जहां बच्चे पढ़ते भी हैं. यहां बहुत हरियाली और एक सुंदर सरोवर भी है.