रेप पीड़िता के हित में फैसला, हाईकोर्ट ने दिए गर्भपात के निर्देश
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Allahabad High Court: हरदोई की एक नाबालिग रेप पीड़िता को बड़ी राहत देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसके 22 सप्ताह के अनचाहे गर्भ के चिकित्सकीय गर्भपात की अनुमति दे दी है. अदालत ने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के गांधी मेमोरियल एंड एसोसिएटेड हॉस्पिटल को सुरक्षित तरीके से गर्भपात कराने के निर्देश दिए हैं. साथ ही कोर्ट ने भ्रूण को सुरक्षित रखने का आदेश भी दिया है, ताकि डीएनए जांच के जरिए आरोपी की संलिप्तता की पुष्टि की जा सके. पीड़िता के पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सीएमओ हरदोई को निर्देश दिया कि 20 मई को एंबुलेंस से पीड़िता को लखनऊ भेजा जाए और एक से दो दिन के भीतर गर्भपात की प्रक्रिया पूरी कराई जाए.
लखनऊ. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम मामले में नाबालिग रेप पीड़िता को बड़ी राहत देते हुए उसके 22 सप्ताह के अनचाहे गर्भ के चिकित्सकीय गर्भपात की अनुमति दे दी है. कोर्ट ने यह आदेश पीड़िता के स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति और भविष्य को ध्यान में रखते हुए दिया. मामले की सुनवाई लखनऊ बेंच में हुई, जहां पीड़िता के पिता की ओर से याचिका दाखिल की गई थी.
केजीएमयू को सुरक्षित गर्भपात कराने के निर्देश
हाईकोर्ट ने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के गांधी मेमोरियल एंड एसोसिएटेड हॉस्पिटल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) को निर्देश दिया है कि पीड़िता का सुरक्षित तरीके से चिकित्सकीय गर्भपात कराया जाए. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि पीड़िता को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा और विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में इलाज उपलब्ध कराया जाए, ताकि उसकी जान को किसी प्रकार का खतरा न हो.
भ्रूण सुरक्षित रखने का भी आदेश
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि गर्भपात के बाद भ्रूण को सुरक्षित रखा जाए. इसका उद्देश्य डीएनए जांच के जरिए आरोपी की संलिप्तता की पुष्टि करना है. अदालत ने माना कि वैज्ञानिक साक्ष्य मामले की निष्पक्ष जांच और आरोपी को सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
20 मई को एंबुलेंस से भेजी जाएगी पीड़िता
मामला हरदोई जिले से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) हरदोई को निर्देश दिया है कि 20 मई को पीड़िता को एंबुलेंस के जरिए लखनऊ स्थित केजीएमयू भेजा जाए. अदालत ने यह भी आदेश दिया कि अस्पताल पहुंचने के बाद एक से दो दिनों के भीतर गर्भपात की प्रक्रिया पूरी कराई जाए.
पीड़िता के हित में अदालत का संवेदनशील फैसला
हाईकोर्ट के इस फैसले को नाबालिग पीड़िता के हित में एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. अदालत ने अपने आदेश में यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि पीड़िता को समय पर इलाज मिले और साथ ही मामले की कानूनी जांच भी प्रभावित न हो. इस फैसले से यह संदेश भी गया है कि न्यायालय गंभीर अपराधों में पीड़ितों के अधिकारों और स्वास्थ्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें