शादी का वादा पूरा ना होना रेप के अपराध का आधार नहीं, HC का अहम फैसला

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शादी का वादा पूरा ना होना रेप के अपराध का आधार नहीं, HC का अहम फैसला


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Allahabad High Court News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि शादी का वादा पूरा ना होने रेप के अपराध का आधार नहीं हो सकता. साथ ही कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि टूटे हुए रिश्ते को अपराध का रंग देने की बढ़ती प्रवृत्ति चिंताजनक है. कोर्ट याची के खिलाफ सभी आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए याचिका पारित कर दी.

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शादी के वादे का टूटना रेप केस का आधार नहीं

प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए रेप के आरोपी के खिलाफ पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी. कोर्ट ने कहा कि पीड़िता और आरोपी के बीच पांच सालों तक चला संबंध पूरी तरह से सहमति पर आधारित था. बाद में रिश्ते बिगड़ने पर दर्ज कराई गई FIR कानूनी प्रक्रिया का दुरूपयोग है. जस्टिस विवेक कुमार सिंह की सिंगल बेंच ने यह आदेश पारित किया.

दरअसल, पीड़िता ने 10 अगस्त 2019 को थाना कर्नलगंज, प्रयागराज में याची संजय सरोज के खिलाफ धारा 376, 323, 504 व 506 आईपीसी के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी. उसका आरोप था कि याची ने वर्ष 2014 से शादी का झूठा वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए. विवेचना के बाद 8 जनवरी 2020 को चार्जशीट दाखिल की गई और 4 सितंबर 2021 को विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने संज्ञान लिया. अदालत ने पाया कि पीड़िता एफआईआर दर्ज होने के बाद 27 अगस्त 2019 को स्वयं याची से विवाह कर चुकी थी, जिसे उसने अपने एफिडेविट में स्वीकार किया. कोर्ट ने माना कि एफआईआर का मुख्य उद्देश्य विवाह के लिए दबाव बनाना था, न कि वास्तविक अपराध की रिपोर्ट करना. कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़िता एमए, एलएलबी व बीएड योग्यताधारी एक शिक्षित व परिपक्व महिला है.

कोर्ट ने कहा कि पांच साल तक बिना किसी शिकायत के संबंध बनाए रखना यह सिद्ध करता है कि संबंध सहमति से थे. इसके अलावा, एफआईआर में पहली घटना की तिथि, स्थान व समय का उल्लेख नहीं था. हाईकोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि विवाह के वादे का उल्लंघन मात्र बलात्कार नहीं बनता जब तक यह न सिद्ध हो कि वादा शुरू से ही झूठा था. कोर्ट ने कहा टूटे हुए रिश्ते को अपराध का रंग देने की बढ़ती प्रवृत्ति चिंताजनक है. बलात्कार जैसे गंभीर अपराध का आरोप केवल वास्तविक यौन हिंसा या सहमति के अभाव में ही लगाया जाना चाहिए. हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए चार्जशीट, संज्ञान आदेश और समस्त आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी.

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Amit Tiwariवरिष्ठ संवाददाता

अमित तिवारी, News18 Hindi के डिजिटल विंग में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. वर्तमान में अमित उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, ब्यूरोक्रेसी, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और रिसर्च बेस्ड कवरेज कर रहे हैं. अख़बार…और पढ़ें



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