सैलून मैनेजर की आत्महत्या केस में 2 गिरफ्तार, CM से मिले थे रत्ना के पिता
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Lucknow ki local news : लखनऊ में सैलून मैनेजर रत्ना सिंह की आत्महत्या केस में मुख्य आरोपी समेत 2 को गिरफ्तार कर लिया गया है. दोनों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम था. रत्ना सिंह ने 11 मई को अपने फ्लैट में आत्महत्या कर ली थी. आत्महत्या से पहले उन्होंने एक वीडियो बनाया था जिसमें कई लोगों को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया. रत्ना के पिता की तहरीर पर गोमती नगर पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज किया था.
लखनऊ. राजधानी लखनऊ में सैलून मैनेजर रत्ना सिंह की आत्महत्या केस में 25-25 हजार रुपये के दो इनामी गिरफ्तार कर लिए गए हैं. पुलिस ने विरासत ग्रुप का मालिक बिल्डर शरद सिंह और उसके साथी प्रशांत शर्मा गिरफ्तार किया. शरद सिंह मानसून सैलून का मालिक है. इसी सैलून में रत्ना सिंह मैनेजर थीं. मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली रत्ना सिंह ने 11 मई को अपने फ्लैट में आत्महत्या कर ली थी. आत्महत्या से पहले उन्होंने एक वीडियो बनाया था जिसमें वे बिल्डर शरद सिंह, उसकी पत्नी पल्लवी, मंगलनाथ यादव, वैशाली और प्रशांत शर्मा समेत कई लोगों को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया. रत्ना के पिता की तहरीर पर गोमती नगर पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज किया था. आरोपी तब से फरार चल रहे थे.
अवैध निर्माण पर बुलडोजर
इनकी गिरफ्तारी के लिए रत्ना के पिता सीएम योगी से भी मिले थे. शनिवार को शरद सिंह के अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाया गया था. प्रशासनिक टीम भारी पुलिस बल के साथ आरोपी के ऑफिस पहुंची, जहां अवैध हिस्से को ध्वस्त किया गया. शरद सिंह, उसकी पत्नी पल्लवी सिंह, वैशाली और प्रशांत शर्मा पर पुलिस ने 25-25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया था. सैलून मैनेजर रत्ना सिंह के पिता सुरेंद्र सिंह का कहना है कि ये लोग मेरी बेटी को शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना देते थे, जिसकी वजह से रत्ना ने आत्महत्या की.
और क्या बोले पिता
सुरेंद्र सिंह ने कहा था कि आज 16 तारीख हो गया आरोपी फरार हैं. हमें न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा है. देखिये आगे क्या होता है. पुलिस टीम आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही थीं. बाराबंकी, गोरखपुर और देवरिया समेत कई जिलों में छापेमारी की गई. मंगलनाथ यादव को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. शुक्रवार को पुलिस ने शरद सिंह से जुड़े विरासत होटल, सैलून और दूसरे व्यापारिक प्रतिष्ठानों को भी सील कर दिया था.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें