अंगूर नहीं नूरजहां आम से जहांगीर के लिए तैयार करती थी वाइन, रोचक है इतिहास, जाने

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अंगूर नहीं नूरजहां आम से जहांगीर के लिए तैयार करती थी वाइन, रोचक है इतिहास, जाने


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इस आम का नाम मुगल बादशाह जहांगीर के नाम पर रखा गया है, जो कला और प्रकृति के प्रेमी थे. यह माना जाता है कि मुगलों के समय में ही इसे शाही बगीचों में विकसित किया गया था. जहांगीर आम मुख्य रूप से हैदराबाद के आसपास के क्षेत्रों में उगाया जाता है. जहांगीर आम जिससे वाइन भी तैयार होती है और जहांगीर की बेगम नूरजहां इस आम से वाइन तैयार कर दिया करती थी.

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सहारनपुर:  मैंगो बेल्ट के नाम से जाना जाता है सहारनपुर. यहां पर किसान आम की सैकड़ो प्रकार की प्रजाति लगाते है, लेकिन जहांगीर आम बेहद खास है. वह सभी आम से बेहद अलग होता है. जहांगीर आम भारत की सबसे पुरानी, दुर्लभ और शाही आम की किस्मों में से एक है, जिसका इतिहास सीधे तौर पर मुगल बादशाहों और हैदराबाद के नवाबों से जुड़ा है. जो कला और प्रकृति के प्रेमी थे.

शाही बगीचों में विकसित किया गया

यह माना जाता है कि मुगलों के समय में ही इसे शाही बगीचों में विकसित किया गया था. जहांगीर आम मुख्य रूप से हैदराबाद के आसपास के क्षेत्रों में उगाया जाता है. यह उन दुर्लभ किस्मों में से है जिन्हें निज़ाम के दौर में बहुत पसंद किया जाता था और इसे आमों का राजा (बादशाह-ए-आम) कहा जाता है. जहांगीर आम जिससे वाइन भी तैयार होती है और जहांगीर की बेगम नूरजहां जहांगीर को इस आम से वाइन तैयार कर दिया करती थी. इसलिए यह आम अपने स्वाद के साथ-साथ वाइन बनाने में भी बेहद कारगर साबित होता था.

जहांगीर के लिए नूरजहां आम और गुलाब को मिलाकर वाइन बनाती थी. यह वाइन मदहोश करने के साथ ही इम्यूनिटी पावर बढ़ा देती थी. सहारनपुर में भी जहांगीर आम का क्षेत्रफल धीरे-धीरे बढ़ रहा है और इस रेयर प्रजाति को भी यहां के किसान लगाना बेहद पसंद कर रहे हैं. यह आम अब बहुत कम देखने को मिलता है, जो इसे और भी कीमती बनाता है. यह आम तौर पर सीजन के मध्य में उपलब्ध होता है.

नूरजहां तैयार करती जहांगीर वाइन

कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी व प्रोफेसर डॉक्टर आईके कुशवाहा ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि आम की बहुत सी प्रजातियां हैं. उन्हें में से जहांगीर प्रजाति भी एक है. जिस तरीके से इस आम का नाम जहांगीर है उसी तरीके से उसका इतिहास भी किसी ना किसी चीज से जुड़ा होता है. जहांगीर के साथ  नूरजहां थी जो की जहांगीर को वाइन बनाकर दिया करती थी. इस जहांगीर आम की शुरुआत इसी वाइन से हुई है जिस तरीके से हमारे यहां भी दशहरी और लंगड़े से वाइन तैयार की जाती है.

BHU के अधिकारियों ने भी जहांगीर नाम से वाइन बनाया, जिसका इतिहास देखा जाए तो नूरजहां के नाम से जुड़ा हुआ है. जहांगीर आम को मिलाकर के नूरजहां उसमें गुलाब भी मिलती थी. जहांगीर आम में एक तो एंटीऑक्सीडेंट ज्यादा पाया गया दूसरा पोनिफिनॉल एक ऐसा रसायन होता है जो की वाइन में स्वाद पैदा करता है इसलिए हमारे क्षेत्र में भी जहांगीर आम धीरे-धीरे बढ़ रहा है. जहांगीर आम खाने में स्वाद के साथ-साथ इसकी वाइन भी तैयार होती है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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