अनमोल ने पास की NEET परीक्षा, फिर भी नहीं मिला MBBS में एडमिशन, भड़क गया सुप्रीम कोर्ट
Agency:News18.com
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NEET UG Exam, MBBS Admission: मेडिकल की तैयारी करने वाले हर युवा का सपना होता है कि उसे एमबीबीएस में एडमिशन मिल जाए. यही सपना लेकर अनमोल ने वर्ष 2024 में नीट यूजी की परीक्षा दी. उन्होंने परीक्षा पास भी की, लेक…और पढ़ें
NEET UG Exam, MBBS Admission: एमबीबीएस में एडमिशन का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट.
हाइलाइट्स
- अनमोल ने NEET 2024 में 2462वीं रैंक हासिल की.
- मेडिकल कॉलेज ने नियम का हवाला देकर एडमिशन नहीं दिया.
- सुप्रीम कोर्ट ने नियम को भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताया.
NEET UG Exam, MBBS Admission: अनमोल ने नीट यूजी परीक्षा 2024 में दिव्यांग श्रेणी में ऑल इंडिया 2462वीं रैंक हासिल की, लेकिन उसके बाद भी मेडिकल कॉलेज ने उन्हें एडमिशन देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद अनमोल ने हाईकोर्ट में गुहार लगाई, लेकिन राहत नहीं मिली. इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. आइए आपको बताते हैं अनमोल और एमबीबीएस एडमिशन (MBBS Admission) की पूरी कहानी…
नीट यूजी 2024 की परीक्षा में 2462वीं रैंक हासिल करने वाले अनमोल को चंडीगढ़ का सरकारी मेडिकल कॉलेज अलॉट हुआ. यहां पर उन्हें एमबीबीएस में एडमिशन मिलना था, लेकिन मेडिकल कॉलेज ने अनमोल को एडमिशन देने से मना कर दिया. इसके लिए कॉलेज ने नेशनल मेडिकल काउंसिल के एक नियम का हवाला भी दिया. जब इसको लेकर अनमोल ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में अपील की, तो उन्हें राहत नहीं मिली. जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई.
NEET UG Exam: क्या हुआ सुप्रीम कोर्ट में?
जब अनमोल का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के उस नियम पर ही आपत्ति दर्ज करा दी, जिसका हवाला देते हुए कॉलेज ने दिव्यांग अनमोल को एडमिशन देने से मना कर दिया था. असल में, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के इस नियम के अनुसार, अगर कोई उम्मीदवार MBBS की पढ़ाई करना चाहता है, तो उसके दोनों हाथ सही होने चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने एमसीआई के इस नियम को न केवल भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताया, बल्कि इसकी कड़ी आलोचना भी की. जस्टिस बी.आर. गवई और के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि यह नियम न केवल संविधान के अनुच्छेद 41 के खिलाफ है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र के दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों पर समझौते और भारत के दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम का उल्लंघन भी है.
पैनल ने की थी जांच
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एम्स, नई दिल्ली के छह डॉक्टरों का एक पैनल बनाया और अनमोल की शारीरिक क्षमता की जांच कराई. इनमें से पांच एक्सपर्ट्स ने उसे एमबीबीएस के लिए अयोग्य करार दिया, जबकि एक अन्य सदस्य, डॉ. सत्येंद्र सिंह का तर्क था कि अनमोल सहायक उपकरण के साथ मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. सिंह की राय के आधार पर कहा कि मेडिकल स्टूडेंट्स को एंट्री लेवल पर बाहर करने की बजाय, उन्हें अपनी विशेषज्ञता चुनने की आजादी देनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 3 मार्च 2025 को करेगा.
February 24, 2025, 12:39 IST