अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं लाखों रुपयों वाले कूड़ेदान, नगर निगम ने नहीं ली सुध
मथुरा: उत्तर प्रदेश के मथुरा में स्वच्छ भारत मिशन को जमकर पलीता लगाया जा रहा है. नगर निगम के द्वारा शहर में जगह-जगह लगवाए गए भूमिगत कचरा पात्र सफेद हाथी साबित हो रहे हैं. आलम यह है कि यह कचरा पात्र अब खुद ही कचरे में तब्दील हो गए हैं. धूल फांकते भूमिगत कचरा पात्र नगर निगम की लापरवाही को दर्शाते नजर आ रहे हैं. बता दें कि एक कचरा पात्र की कीमत करीब 5 लाख रुपए थी और एक दर्जन के अधिक कचरा पात्र खुद ही अब कचरा बने हुए हैं.
अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं कचरा पात्र
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा स्वच्छ भारत मिशन के तहत देश को स्वच्छ साफ देखने की परिकल्पना की गई थी, लेकिन प्रधानमंत्री का यह सपना एक सपना ही बनकर रह जाएगा. स्वच्छ भारत मिशन की सोच को साथ लेकर चलते नगर निगम के द्वारा शहर में जगह जगह भूमिगत कचरा पात्र लगवाए गए, ताकि लोग अपने घरों के कूड़े को इन कचरा पात्रों में डालकर स्वच्छ भारत मिशन में अपना योगदान दें.
भूमिगत कचरा पात्र कूड़े के ढेर में तब्दील
शहर में जगह-जगह लाखों रुपये की लागत से लगवाए गए भूमिगत कचरा पात्र इन दिनों खुद ही कचरे के ढेर में तब्दील हैं. जिला कलेक्ट्रेट कोर्ट के पास लगे भूमिगत कचरा पात्र इन दिनों सफेद हाथी बना हुआ है. वहीं मसानी बिजली घर, महोली रोड स्थित धर्म कांटे के पास सड़क किनारे बनाया गया भूमिगत कचरा पात्र कूड़े के ढेर में तब्दील है.
कचरा पात्र में कचरा है या कचरे में कचरा पात्र
कॉलोनी के लोग इस कचरा पात्र में घर का कूड़ा डालते हैं. यहां आपको समझ में नहीं आएगा कि कचरा पात्र में कचरा है या कचरे में कचरा पात्र है. कचरे पात्र के ऊपर सीमेंट की पानी की टंकी रखी हुई है. दूसरी तरफ भूमिगत कचरा पात्र के आसपस घास खड़ी हुई है. 2017 में शहर में 10 ऐसे भूमिगत कचरा पात्र बनवाए गए थे. इन भूमिगत कचरा पात्रों को बनवाने की कीमत करीब 50 लाख रुपये आई थी. तब से लेकर आज तक यह कचरा पात्र अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं.
जांच के बाद कार्यवाही
स्थानीय नागरिक लक्ष्मण ने बताया कि पंचवटी के पास जब से ये कचरा पात्र यहां बने हैं तब से लेकर आज तक किसी भी व्यक्ति ने इन कचरा पात्रों में अपने घर का कूड़ा नहीं डाला है. यहां नगर निगम के द्वारा कचरा पात्र बनवाने का कोई औचित्य नहीं था फिर भी नगर निगम के द्वारा यहां भूमिगत कचरा पात्र को लगवा दिया गया. लाखों रुपए खर्च किए गए इन कचरा पात्रों को लगवाने के लिए लेकिन नतीजा सिर्फ वहीं ढाक के तीन पात है.
नगर निगम करता है अनदेखी