अफगान कबीलों ने बसाया, मुगलों ने दी मजबूती, अंग्रेजों ने बनाया मॉर्डन! जानें बेमिसाल आर्किटेक्ट वाले बहादुरगंज की कहानी

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अफगान कबीलों ने बसाया, मुगलों ने दी मजबूती, अंग्रेजों ने बनाया मॉर्डन! जानें बेमिसाल आर्किटेक्ट वाले बहादुरगंज की कहानी


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Shahjahanpur Bahadurganj History: यूपी के शाहजहांपुर की स्थापना 1647 में मुगल बादशाह शाहजहां के आदेश पर नवाब बहादुर खान द्वारा की गई थी. यह शहर अपनी अनूठी वास्तुकला, ऐतिहासिक मोहल्लों और व्यापारिक केंद्रों के लिए जाना जाता है. बहादुरगंज जैसे मोहल्ले और यहां का बाजार शाहजहांपुर की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान को दर्शाते हैं. शहर की ऐतिहासिक धरोहर, व्यापारिक गतिविधियां और सांस्कृतिक महत्व इसे उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में शामिल करते हैं.

शाहजहांपुर: यूपी में स्थित शाहजहांपुर की स्थापना 1647 में मुगल बादशाह शाहजहां के आदेश पर नवाब बहादुर खान द्वारा की गई थी. इस शहर को बसाने का मुख्य उद्देश्य राजपूती प्रभाव वाले क्षेत्र में एक मजबूत अफगान शक्ति केंद्र स्थापित करना था. बादशाह के फरमान पर अफगानिस्तान से 52 विभिन्न कबीले यहां आए, जिनके नाम पर आज भी शहर के कई मोहल्लों की पहचान है. यह शहर अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए इतना प्रसिद्ध है कि आज भी कई विश्वविद्यालयों के सिविल इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में इसे पढ़ाया जाता है.

बहादुरगंज बना शाहजहांपुर का पहला मोहल्ला
इतिहासकार डॉ. विकास खुराना ने बताया कि 1652 में अस्तित्व में आया बहादुरगंज शाहजहांपुर का सबसे पहला मोहल्ला था. इसे बसाने के लिए एक बहुत बड़ा बलिदान दिया गया था, ब्रिटिश गजेटियर के अनुसार, यहां घने जंगलों से एक लाख खिरनी के पेड़ों को काटा गया था. यही कारण है कि आज भी यहां ‘खिरनी बाग’ नाम का मोहल्ला मौजूद है. मोहल्ला बहादुरगंज का नाम शहर के संस्थापक नवाब बहादुर खान के नाम पर रखा गया था. यहां स्थित नवाब बहादुर खान का मकबरा शहर की सबसे पुरानी ऐतिहासिक इमारत मानी जाती है, जो इस क्षेत्र की शुरुआती बसावट का प्रतीक है.
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धीरे-धीरे बदला बहादुरगंज का नक्शा
समय बीतने के साथ बहादुरगंज का स्वरूप बदला और यह एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र बन गया. जिसके बाद ब्रिटिश दौर 1868 में नगर पालिका द्वारा यहां आधुनिक दुकानों का निर्माण कराया गया, जिससे होने वाली आय शहर के विकास का मुख्य स्रोत बनी. ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ यह क्षेत्र तकनीकी रूप से भी आगे रहा, 1869 में यहां जलापूर्ति के लिए शहर का पहला पानी का टैंक बनवाया गया था. आज बहादुरगंज बाजार शाहजहांपुर का दिल है, जहां सर्राफा, बर्तन और कपड़ों का बड़ा व्यापार होता है. यहां न केवल स्थानीय लोग, बल्कि पड़ोसी जिलों के व्यापारी भी खरीदारी के लिए पहुंचते हैं, जो इसके आर्थिक महत्व को दर्शाता है.

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Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें

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अफगान कबीलों ने बसाया, जानें बेमिसाल आर्किटेक्ट वाले शहर बहादुरगंज की कहानी



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