अब पहाड़ों पर घूमने और हवाई यात्रा से नहीं आएंगे चककर, एएमयू छात्रा ने की खोज
अलीगढ़: एएमयू के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के फार्माकोलॉजी विभाग की पीजी छात्रा डॉक्टर स्वाति ने पैसिफ्लोरा इंकार्नाटा नामक पौधे के फ्लेवोन कॉम्पोनेंट क्राइसिन पर रिसर्च की है. उनकी स्टडी में यह पाया गया कि यह कंपोनेंट, मॉर्फिन एडिक्शन में फायदेमंद हो सकता है. साथ ही, यह हवाई यात्रा, ट्रैवल या हिल स्टेशन जाने पर होने वाले इम्बैलेंस और चक्कर जैसी समस्या में भी सुधार करता है.
रिसर्च में हुआ इन बातों का खुलासा
जानकारी देते हुए एएमयू के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के फार्मोकोलॉजी डिपार्टमेंट की पीजी छात्रा डॉक्टर स्वाति ने बताया कि मैंने पैसिफ्लोरा इंकार्नाटा नामक प्लांट के फ्लेवोन कॉम्पोनेंट क्राइसिन पर रिसर्च की है. इस स्टडी में मैंने पाया कि मॉर्फिन एडिक्शन में यह उपयोगी हो सकता है. इसके अलावा, हवाई यात्रा व ट्रैवल करते समय या हिल स्टेशन पर जाने पर जब हमारा बैलेंस इम्बैलेंस होता है, और चककर से आते हैं या कान गुम से हो जाते हैं, जिसे वेस्टिबुलर डिस्फंक्शन कहते हैं, तो इस प्लांट के क्राइसिन कंपोनेंट से इस समस्या में सुधार होता है. मैंने यह रिसर्च रैट्स पर की है, जिसमें क्राइसिन की वजह से बैलेंस सुधरता पाया गया. इस प्रोडक्ट को वेस्टिबुलर डिस्फंक्शन के स्क्रीनिंग मॉडल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.
कई समस्याओं से दिलाएगा मुक्ति
डॉ स्वाति बताती हैं कि क्राइसिन मशरूम्स, पैशन फ्लावर और हनी में पाया जाता है. जो लोग पहाड़ों या हिल स्टेशन पर जाते हैं, उनमें डिजीनेस की समस्या होती है, जिससे यह प्रोडक्ट मदद करता है. जो पहले से एंटी-एंग्जायटी या नींद के लिए पैशन फ्लावर का उपयोग कर रहे हैं, उनके लिए यह और भी लाभकारी है. मैंने अपने इस रिसर्च पेपर को इंडियन अकेडमी ऑफ न्यूरोसाइंस के कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत किया था. जहां मुझे न्यूरोसाइंटिस्ट्स से बातचीत करने का मौका मिला और मुझे ट्रैवल फेलोशिप अवार्ड भी मिला.
वहीं, मेडिकल के फार्माकोलॉजी डिपार्टमेंट के चेयरमेन व प्रोफेसर सैयद ज़िया रहमान कहते हैं कि हमारे मॉर्फिन एडिक्शन ग्रुप ने पिछले 25 सालों से काम किया है. कई प्लांट्स पर रिसर्च की गई है. हमारे यहां की स्टूडेंट स्वाति जी ने अपने रिसर्च के लिए पैसिफ्लोरा इंकार्नाटा के फ्लेवोन कॉम्पोनेंट क्राइसिन को चुना.
बेहतर रिजल्ट की उम्मीद
मॉर्फिन के विड्रॉल को कम करने में परिणाम मिले. साथ ही जानवरों में बैलेंस का इम्बैलेंस पाया गया, जिससे जानवर चक्कर खाते थे. यह बड़ी उपलब्धि है कि इस एरिया में हम इस दवा को वेस्टिबुलर डिस्फंक्शन इंड्यूस करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके बाद हम देखेंगे कि वेस्टिबुलर डिस्फंक्शन इस दवा से सही हुआ या नहीं. यह जानवरों में स्पिनिंग मॉडल बनाने के लिए अच्छा हो सकता है. हमारे फार्माकोलॉजी की दुनिया में स्क्रीनिंग मेथड्स बहुत महत्वपूर्ण होते हैं. बिना स्क्रीनिंग मेथड के किसी भी दवा का प्रभाव नहीं समझा जा सकता. पहले जानवरों में उस बीमारी का मॉडल बनाना होता है, जैसे अल्जाइमर या पार्किंसन, फिर दवा के असर को टेस्ट किया जाता है. इसलिए यह मॉडल बहुत बेहतरीन हो सकता है.