अयोध्या का प्राचीन ब्रह्म कुंड, जहां गुरु नानक देव ने किए ब्रम्हा के दर्शन, जाने

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अयोध्या का प्राचीन ब्रह्म कुंड, जहां गुरु नानक देव ने किए ब्रम्हा के दर्शन, जाने


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रामनगरी अयोध्या का हर कोना धार्मिक आस्था और पौराणिक रहस्यों से जुड़ा हुआ है. इन्हीं पवित्र स्थलों में एक है प्राचीन और रहस्यमयी ब्रह्म कुंड, जो टेढ़ी बाजार से राजघाट जाने वाले मार्ग पर स्थित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह वही स्थान है जहां सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने प्राचीन काल में यज्ञ किया था. इसी कारण इस स्थान को ब्रह्म कुंड के नाम से जाना जाता है आज भी यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.

अयोध्या: रामनगरी अयोध्या का हर कोना धार्मिक आस्था और पौराणिक रहस्यों से जुड़ा हुआ है. इन्हीं पवित्र स्थलों में एक है प्राचीन और रहस्यमयी ब्रह्म कुंड, जो टेढ़ी बाजार से राजघाट जाने वाले मार्ग पर स्थित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह वही स्थान है जहां सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने प्राचीन काल में यज्ञ किया था. इसी कारण इस स्थान को ब्रह्म कुंड के नाम से जाना जाता है आज भी यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.

धार्मिक ग्रंथों में है ब्रम्ह कुंड का उल्लेख

अयोध्या के संत एवं कथा व्यास पवन दास शास्त्री ने बताया कि ब्रह्म कुंड का उल्लेख कई प्राचीन धार्मिक मान्यताओं में मिलता है. मान्यता है कि जब भगवान श्रीराम लंका विजय के बाद अयोध्या लौटे थे, तब समस्त देवी-देवता भी अयोध्या पहुंचे थे.उसी दौरान भगवान ब्रह्मा इस स्थान पर विराजमान होकर भगवान विष्णु के राम अवतार की दिव्य लीला का आनंद ले रहे थे. यही कारण है कि यह स्थल देवताओं की उपस्थिति और दिव्यता से जुड़ा माना जाता है.

गुरुनानक देव को हुए थे दर्शन

ब्रह्म कुंड के समीप स्थित  इसके अलावा इसी परिसर के पास एक प्राचीन सिख मंदिर भी स्थित है. मान्यता है कि प्रथम सिख गुरु गुरु नानक देव जब अयोध्या आए थे, तब उन्हें इसी स्थान पर भगवान ब्रह्मा के साक्षात दर्शन हुए थे. इस वजह से यह स्थल हिंदू और सिख दोनों समुदायों की आस्था का केंद्र माना जाता है.पवन दास शास्त्री ने बताया कि ब्रह्म कुंड में श्रद्धा भाव से दर्शन और स्नान करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं खासकर अमावस्या, पूर्णिमा और धार्मिक पर्वों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं सुबह और शाम के समय यहां का वातावरण बेहद शांत और आध्यात्मिक दिखाई देता है.

धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक इतिहास और दिव्य अनुभूतियों से जुड़ा ब्रह्म कुंड आज भी अयोध्या की आध्यात्मिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है यही वजह है कि यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए केवल एक कुंड नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और सनातन परंपरा का प्रतीक माना जाता है

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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