इब्राहीम शर्की के समय के सुल्तानपुर में यहां मिले थे सिक्के, अब हुआ विलुप्त, जानिए इतिहास
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सुल्तानपुर जिला ऐतिहासिक रूप से जौनपुर की शर्की सल्तनत से गहराई से जुड़ा रहा है. इब्राहिम शाह शर्की (1402–1440 ई.) के शासनकाल में सुल्तानपुर का एक हिस्सा जौनपुर राज्य के अंतर्गत आता था. उस समय यह क्षेत्र राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र था. इतिहासकारों के अनुसार, सुल्तानपुर के धोपाप क्षेत्र में इब्राहिम शाह शर्की के काल के कई सिक्के प्राप्त हुए थे, जिन्हें कनिंघम और स्थानीय लोगों ने खोजा था, हालांकि वर्तमान में उनकी स्थिति स्पष्ट नहीं है.
सुल्तानपुर. ऐतिहासिक दृष्टिकोण से उत्तर प्रदेश का सुल्तानपुर जिला काफी महत्वपूर्ण जिला माना जाता है. एक समय ऐसा था जब सुल्तानपुर से सटा हुआ जनपद जौनपुर जिसे ‘पूर्व का सिराज’ कहा जाता था. शैक्षिक दृष्टिकोण से यह काफी महत्वपूर्ण था, उस समय सुल्तानपुर का कुछ हिस्सा भी जौनपुर में ही आता था लेकिन आजादी के बाद सुल्तानपुर की सीमा में परिवर्तन हुआ और जौनपुर का कुछ हिस्सा सुल्तानपुर में शामिल हो गया. अगर मध्यकाल के इतिहास के बारे में बात की जाए तो जौनपुर का शासक इब्राहिम शाह शर्की हुआ करता था. उसके समय सुल्तानपुर में कुछ स्थल ऐसे थे जिन पर वर्तमान खोजों में कुछ सिक्के प्राप्त हुए हैं. आज के इस लेख में हम जानेंगे कि इब्राहिम शाह शर्की का सुल्तानपुर से क्या संबंध था और कहां पर इब्राहिम शाह शर्की के शासनकाल के सिक्के सुल्तानपुर में मिलते हैं.
यहां मिले थे सिक्के
इतिहासकार व वरिष्ठ पत्रकार राजेश्वर सिंह ने अपनी किताब “सुल्तानपुर इतिहास की झलक” में लिखा है कि उस दौर में योग्य लोगों को उनकी क्षमता के आधार पर मलिक-उल-शर्क अथवा पूर्व का स्वामी जैसी उपाधियों से सम्मानित किया जाता था. उसी समय सुल्तानपुर भी जौनपुर के शर्की शासकों के अधीन हुआ करता था. सुल्तानपुर के धोपाप नामक स्थान पर इब्राहिम शाह शर्की के समय बड़ी मात्रा में सिक्के मिले थे . यह सिक्के कनिंघम और स्थानीय लोगों को प्राप्त हुए थे,हालांकि ये सिक्के अब कहां पर हैं इसकी जानकारी नहीं है.
यह है इतिहास
सुल्तानपुर के वरिष्ठ पत्रकार विक्रम बृजेंद्र सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि पुराने सुल्तानपुर में स्थित किले के उत्तर-पश्चिम दिशा में अलाउद्दीन खिलजी ने एक मस्जिद का भी निर्माण करवाया. दिल्ली के तुगलक शासकों ने मलिक सरवर ख्वाजा जहां को चौदहवीं शताब्दी के अंत में अवध सूबे का वजीर नियुक्त किया. उसके बाद में उन्हें गवर्नर भी बनाया गया ताकि क्षेत्र के विद्रोही सरदारों को नियंत्रित किया जा सके. जौनपुर शहर को बसाने और उसके विकास में ख्वाजाजहां ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. तुगलक वंश की कमजोरियों का फायदा उठाकर उन्होंने खुद को स्वतंत्र घोषित कर दिया और जौनपुर में शर्की सल्तनत की नींव रख दी. इसी दौर में पूर्वांचल के कई इलाकों में नई राजनीतिक और सांस्कृतिक पहचान विकसित हुई.शर्की वंश में इब्राहिम शर्की, जिनका शासनकाल 1402 से 1440 ईस्वी तक माना जाता है, एक महत्वपूर्ण इस्लाम परस्त शासक थे. सुल्तानपुर का कुछ हिस्सा उसे समय जौनपुर का है हिस्सा हुआ करता था. जौनपुर उस समय इस्लामी शिक्षा का एक बड़ा केंद्र बन गया था. शर्की शासकों सुल्तानपुर में ने बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन कराने का भी प्रयास किया. दिल्ली के सुल्तान बहलोल लोदी ने 1479 ईस्वी में जौनपुर के अंतिम शर्की शासक हुसैन शाह शर्की को पराजित कर शर्की शासन का अंत कर दिया. हालांकि इब्राहिम शाह शर्की का सुल्तानपुर से काफी गहरा संबंध रहा है क्योंकि उसने अपनी यात्राओं में भी सुल्तानपुर में आगमन किया था.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें