कभी थीं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, अब BJP की चहेदी विधायक, कौन हैं कृष्णा पासवान, जिन्हें UP कैबिनेट में मिल सकती है जगह?
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UP Cabinet Expansion: यूपी कैबिनेट विस्तार की चर्चा के साथ-साथ कई चेहरे मंत्री बनने की दौड़ में शामिल बताए जा रहे हैं. इस लिस्ट में भाजपा की विश्वसनीय नेता और विधायक कृष्णा पासवान भी अपनी मजबूत दावेदारी पेश करती नजर आ रही हैं. आइए जानते हैं कि आखिर कृष्णा पासवान को यूपी कैबिनेट में शामिल करने से भाजपा को क्या फायदा हो सकता है.
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अगले साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं. इससे पहले कैबिनेट विस्तार के जरिए भाजपा चुनाव में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है. इसी को लेकर सोमवार को सीएम योगी ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ लगभग डेढ़ घंटे तक बैठक की. खबरों के अनुसार, इस बैठक में यूपी कैबिनेट विस्तार को लेकर भी दोनों के बीच चर्चा हुई.
यूपी कैबिनेट विस्तार की चर्चा के साथ-साथ कई चेहरे मंत्री बनने की दौड़ में शामिल बताए जा रहे हैं. कभी समाजवादी पार्टी से निष्कासित पूजा पाल का नाम सामने आ रहा है, तो कभी ओबीसी समाज से आने वाले आशीष कुमार आशु के नाम की अटकलें तेज हैं. वहीं इस सूची में बड़े मंत्रियों को पछाड़ते हुए दलित नेता कृष्णा पासवान भी अपनी मजबूत दावेदारी पेश करती नजर आ रही हैं. आइए जानते हैं कि आखिर कृष्णा पासवान को यूपी कैबिनेट में शामिल करने से भाजपा को क्या फायदा हो सकता है.
दलित समाज में पकड़ मजबूत
बता दें कि कृष्णा पासवान फतेहपुर जिले के धाता विकास खंड क्षेत्र से विधायक हैं. कृष्णा पासवान को भाजपा का एक विश्वसनीय चेहरा माना जाता है और दलित समाज के बीच उनकी अच्छी पकड़ है. ऐसे में यदि भाजपा उन्हें कैबिनेट में स्थान देती है, तो इसका सीधा फायदा दलित वोट बैंक के रूप में पार्टी को आगामी चुनावों में मिल सकता है.
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से विधायक तक का सफर
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से विधायक बनने तक का सफर कृष्णा पासवान ने अपने दम पर तय किया है. यही वजह है कि कैबिनेट विस्तार में उनके नाम की लगातार चर्चा हो रही है. जानकारी के मुताबिक, कृष्णा पासवान ने अपनी राजनीतिक शुरुआत भाजपा से ही की थी और आज भी वह पार्टी के एक मजबूत स्तंभ के रूप में काम कर रही हैं.
राजनीति में साफ-सुथरी नेता
कहा जाता है कि कृष्णा पासवान एक शांत स्वभाव की नेता हैं. वह दो बार जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं और कई बार विधायक भी बन चुकी हैं. इतने लंबे राजनीतिक सफर के बावजूद उनका नाम कभी किसी विवाद से नहीं जुड़ा, जिससे उनकी छवि एक ईमानदार और कर्मठ नेता की बनती है. भाजपा के लिए ऐसे साफ-सुथरे चेहरे को कैबिनेट में शामिल करना यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में बड़ा राजनीतिक लाभ दिला सकता है.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.