कानपुर का 80 फीट ऊंचा रावण, मुंह से फव्वारे, आंखों से आग और नाभि में तीर
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Kanpur News:कारीगर मोहम्मद इकबाल ने इसे बेहद खास तरीके से डिजाइन किया है. जब तीर रावण की नाभि पर लगेगा तो उसके दसों सिर एक-एक करके धमाके के साथ नीचे गिरेंगे. यही नहीं, रावण के मुंह से रंग-बिरंगे फव्वारे भी निकलेंगे और आंखों से आग बरसेगी.
कानपुर दशहरे का त्योहार नजदीक है.शहर में रामलीला मैदानों में रावण दहन की तैयारियां जोरों पर हैं. इस बार कानपुर की छावनी रामलीला में सबसे ऊंचा 80 फीट का रावण दहन किया जाएगा. खास बात यह है कि यह रावण सिर्फ देखने में विशालकाय ही नहीं होगा. बल्कि इसमें ऐसे-ऐसे फीचर्स होंगे. जिन्हें देखकर लोग दंग रह जाएंगे.
तीन पीढ़ियों से चला आ रहा है रावण बनाने का हुनर
शहर के मोहम्मद इकबाल का परिवार पिछले तीन पीढ़ियों से रावण और उसके साथ मेघनाद, कुंभकरण व अन्य पुतले बनाता आ रहा है. इस परंपरा की शुरुआत उनके बाबा नूर मोहम्मद और रहमतुल्लाह ने की थी. इकबाल खुद भी पिछले 35 साल से इस काम को कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि कई बार शुरुआती दिनों में पुतले ठीक नहीं बने, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और मेहनत जारी रखी. आज उनकी कारीगरी की चर्चा न सिर्फ कानपुर में बल्कि आस-पास के जिलों में भी होती है.
रोजगार का भी साधन, 25 लोगों को मिलता है काम
इकबाल का यह काम सिर्फ परंपरा को आगे बढ़ाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह कई लोगों के लिए रोजगार का जरिया भी है. पुतला तैयार करने में उनके साथ करीब 25 लोग काम करते हैं. इनमें कुछ लोग बांस काटने का काम करते हैं, तो कुछ फिनिशिंग और सजावट का काम संभालते हैं. परिवार के सदस्य भी इसमें पूरा हाथ बंटाते हैं. इकबाल बताते हैं कि वह पुतला बनाने में होने वाले खर्च और बचत का हिसाब नहीं रखते, बल्कि जो भी बचत होती है उसे सभी कारीगरों में बराबर बांट देते हैं.
सांप्रदायिक सौहार्द की अनोखी मिसाल
हर साल जब छावनी की रामलीला में इकबाल द्वारा बनाया गया रावण दहन होता है तो यह हिंदू-मुस्लिम एकता की एक मिसाल बन जाता है. दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इकबाल का यह प्रयास समाज में आपसी भाईचारे का संदेश भी देता है. उनके बनाए पुतले न सिर्फ कानपुर बल्कि कई जिलों में भी भेजे जाते हैं.
नजारा देखने को जुटेगी भीड़
इस बार 80 फीट ऊंचे रावण के दहन का दृश्य शहरवासियों के लिए बेहद खास होने वाला है. जब नाभि पर तीर लगते ही उसके सिर धमाके के साथ गिरेंगे और आंख-मुंह से आग व फव्वारे निकलेंगे तो दर्शक हैरान रह जाएंगे. दशहरे पर होने वाला यह दृश्य बुराई पर अच्छाई की जीत के साथ-साथ कानपुर की कारीगरी और परंपरा को भी जीवंत कर देगा.