कानपुर के बाद अब रायबरेली में मृत मिली डॉल्फिन, पोस्टमार्टम की रिपोर्ट सुनकर चकरा जाएगा आपका सिर

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कानपुर के बाद अब रायबरेली में मृत मिली डॉल्फिन, पोस्टमार्टम की रिपोर्ट सुनकर चकरा जाएगा आपका सिर


कानपुर: कानपुर और आसपास के इलाकों में गंगा नदी की स्थिति को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. बीते 10 दिनों के भीतर दो गंगा डॉल्फिन का मृत मिलना इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि गंगा का जल अब जलीय जीवों के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है. पहले कानपुर के जाजमऊ इलाके में गंगा किनारे एक डॉल्फिन मिली थी और अब दूसरी डॉल्फिन रायबरेली की एक नहर में मृत पाई गई है. लगातार दो घटनाओं ने गंगा की स्वच्छता और जल गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

जाजमऊ में मिली पहली डॉल्फिन

कानपुर के जाजमऊ इलाके में गंगा किनारे मिली पहली गंगा डॉल्फिन की जांच के बाद यह सामने आया था कि उसका लीवर बुरी तरह से खराब था. पोस्टमार्टम में लीवर डैमेज की पुष्टि हुई, जिससे यह संकेत मिला कि डॉल्फिन लंबे समय तक प्रदूषित पानी के संपर्क में रही होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा के पानी में मौजूद केमिकल, सीवर और औद्योगिक कचरे का सीधा असर डॉल्फिन जैसे संवेदनशील जीवों पर पड़ता है.

रायबरेली की नहर में दूसरी डॉल्फिन

वहीं दूसरी घटना रायबरेली की है, जहां एक नहर में गंगा डॉल्फिन मृत अवस्था में मिली. इस डॉल्फिन को जांच के लिए कानपुर चिड़ियाघर लाया गया, जहां उसका पोस्टमार्टम किया गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार डॉल्फिन की उम्र करीब 8 साल बताई गई है और उसकी मौत का प्राथमिक कारण हार्ट फेल्योर बताया गया है. हालांकि, विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं कि हार्ट फेल्योर के पीछे भी खराब पानी और लंबे समय तक प्रदूषण में रहने की भूमिका हो सकती है.

आईवीआरआई भेजी गई दोनों डॉल्फिन की जांच

दोनों ही मामलों में एक अहम बात यह है कि जाजमऊ और रायबरेली में मिली दोनों गंगा डॉल्फिन की सैंपल जांच भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) भेजी गई है. पहली डॉल्फिन के सैंपल भी आईवीआरआई गए थे और दूसरी डॉल्फिन के सैंपल भी वहीं जांच के लिए भेजे गए हैं. फिलहाल, दोनों की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि अभी तक आईवीआरआई बरेली से अंतिम रिपोर्ट नहीं आई है, जिसके बाद ही मौत के कारणों को लेकर पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी.

गंगा की गुणवत्ता पर उठे सवाल

गंगा डॉल्फिन को नदी की सेहत का संकेतक माना जाता है. अगर डॉल्फिन सुरक्षित नहीं हैं, तो इसका मतलब है कि नदी का पानी भी गंभीर रूप से प्रभावित है. लगातार दो डॉल्फिन की मौत यह साफ दिखा रही है कि गंगा में प्रदूषण का स्तर खतरनाक है, खासकर औद्योगिक और शहरी इलाकों के आसपास.

प्रशासन और समाज की जिम्मेदारी

स्थानीय लोगों और पर्यावरण से जुड़े संगठनों का कहना है कि गंगा की सफाई को लेकर योजनाएं तो बन रही हैं, लेकिन उनका असर जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा. नालों का गंदा पानी, फैक्ट्रियों का अपशिष्ट और अन्य कचरा अब भी गंगा में जा रहा है. बीते 10 दिनों में दो गंगा डॉल्फिन की मौत एक चेतावनी है कि अगर समय रहते गंगा की स्वच्छता पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और भी गंभीर हो सकते हैं.



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