‘कानून रक्षा के लिए, न कि…’, थारू जनजाति के वन अधिकारों पर लखनऊ हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

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‘कानून रक्षा के लिए, न कि…’, थारू जनजाति के वन अधिकारों पर लखनऊ हाईकोर्ट का बड़ा आदेश


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UP Tharu Tribe News : लखनऊ हाईकोर्ट ने थारू जनजाति के वन अधिकारों के खिलाफ आए लखीमपुर खीरी जिला समिति के आदेश को रद्द कर दिया है. अदालत ने कहा कि जब तक नया आदेश पारित नहीं हो जाता, तब तक याची अपने मौजूदा वन अधिकारों का उपयोग पहले की तरह करते रहेंगे. मामले के याची लखीमपुर खीरी के पलिया कला के थारू जनजाति से संबंधित हैं, जिन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिला है.

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लखनऊ हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट ने “उदासा व अन्य बनाम भारत संघ” की ओर से दाखिल एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया. (फाइल फोटो)

लखनऊ. यूपी में थारू जनजाति के वन अधिकारों से जुड़े मामले में बड़ा अपडेट है. लखनऊ हाईकोर्ट ने लखीमपुर खीरी जिला समिति का आदेश रद्द कर दिया है. हाईकोर्ट ने पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है, तब तक वनवासियों के अधिकार बहाल रहेगा. हाईकोर्ट लखनऊ बेंच ने लखीमपुर खीरी के वन अधिकार मामले में जिला स्तरीय समिति के आदेश को निरस्त कर दिया है. अदालत ने कहा कि याचियों के दावों पर सुनवाई कर समयबद्ध ढंग से नया आदेश पारित किया जाए. जब तक नया आदेश पारित नहीं हो जाता तब तक याची अपने मौजूदा वन अधिकारों का उपयोग पहले की तरह करते रहेंगे.

5 साल पहले पहुंचे हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने “उदासा व अन्य बनाम भारत संघ” की ओर से दाखिल एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया. मामले के याची लखीमपुर खीरी के पलिया कला के थारू जनजाति से संबंधित हैं, जिन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है. याचियों ने 15 मार्च 2021 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके सामुदायिक वन अधिकारों के दावों को खारिज कर दिया गया था. हाईकोर्ट ने कहा कि जिला स्तरीय समिति ने वन अधिकार अधिनियम 2006 की मंशा और प्रावधानों पर समुचित विचार नहीं किया. केवल वर्ष 2000 के सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के आधार पर फैसला दे दिया.

‘पूरा मौका दिया जाए’
उच्च न्यायालय ने कहा कि अधिनियम का उद्देश्य वनवासियों के पारंपरिक अधिकारों को मान्यता देना और उनकी आजीविका, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. ऐसे वनवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा करना कानून का मूल उद्देश्य है. अदालत ने कहा कि याचियों को सुनवाई का पूरा मौका दिया जाए और सभी तथ्यों, अभिलेख पर विचार करते हुए कारण युक्त आदेश पारित किया जाए.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें



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