किशोरी से राधा तक…चित्रकूट की इन गायों का अलग भौकाल, छत पर टहलती हैं, पंखा-कूलर में सोती

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किशोरी से राधा तक…चित्रकूट की इन गायों का अलग भौकाल, छत पर टहलती हैं, पंखा-कूलर में सोती


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Chitrakoot news : वह गौतस्करों को पकड़ने के लिए लाठी लेकर सड़कों पर नहीं टहलते. चित्रकूट के पवन का गौसेवा का तरीका जितना अलग है, उतना ही जमीनी है. वह करीब 16 साल से गायों की सेवा में जुटे हैं. अपने घर में देशी, गिरी, शाहीवाल और जर्सी नस्ल की लगभग आधा दर्जन गायों को जगह दे रखी है. इन गायों के लिए घर में कूलर और पंखा लगाया हुआ है. गायों को खुला वातावरण मिले, इसके लिए इनके छत तक जाने का अलग रास्ता बनवाया है. लोकल 18 ने पवन से बात की.

चित्रकूट. आज के समय में जहां लोग कामकाज की भागदौड़ में अपने लिए समय नहीं निकाल पाते हैं, कुछ लोग ऐसे भी हैं जो बेजुबान जानवरों की सेवा को ही अपना सबसे बड़ा धर्म मानते हैं. आपने कई लोगों को पशुओं से प्रेम करते और उन्हें पालते हुए देखा होगा, लेकिन चित्रकूट के गंगाजी रोड निवासी पवन की गौ सेवा की कहानी बाकी लोगों से बिल्कुल अलग है. उनके अनोखे गौ प्रेम की इलाके में खूब चर्चा होती है. पवन करीब 16 वर्षों से गायों की सेवा कर रहे हैं. उन्होंने अपने घर में देशी, गिरी, शाहीवाल और जर्सी नस्ल की लगभग आधा दर्जन गायों को पाल रखा है. उन्होंने इनके लिए घर में विशेष व्यवस्था की है. गायों को खुला वातावरण मिले, इसके लिए उन्होंने छत तक जाने का अलग रास्ता बनवाया है, जहां गौवंश खुले में घूमते और टहलते हैं, भीषण गर्मी से राहत देने के लिए उनके रहने के स्थान पर कूलर और पंखों की भी व्यवस्था की गई है. पवन इनको अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं.

3 गायों की मौत ने झकझोरा

लोकल 18 से पवन कहते हैं कि यह सेवा आसान नहीं रही. एक समय उनके पास 7 से 8 जानवर थे, लेकिन छत से नीचे उतरते समय ऊपर से गुजर रही बिजली लाइन की चपेट में आने से तीन गायों की दर्दनाक मौत हो गई. लेकिन इसके बावजूद पवन ने गौ सेवा का रास्ता नहीं छोड़ा. वर्तमान में उनके पास लगभग आधा दर्जन गायें हैं, जिनका बाकायदा नाम उन्होंने रखा है. इनके नाम किशोरी, बिटो, ओम, राधा, भोला राम है. देखभाल की पूरी जिम्मेदारी पवन देखेते हैं.

अब क्यों असमर्थ

पवन बताते हैं कि वह गायों के खान-पान से लेकर उनके इलाज तक की व्यवस्था खुद करते हैं, लेकिन अब आर्थिक और पारिवारिक परिस्थितियां उनके लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं. बढ़ते खर्च और सीमित संसाधनों के कारण अब वह इन जानवरों का पालन-पोषण करने में खुद को असमर्थ महसूस कर रहे हैं. ऐसे में उन्होंने लोगों से मदद की अपील की है. पवन का कहना है कि जो भी व्यक्ति गौ सेवा में सहयोग करना चाहता है, वह उनसे संपर्क कर सकता है. यदि कोई व्यक्ति इन जानवरों को अपनाना चाहे तो वह भी उनसे संपर्क कर सकता है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें



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