किसका ‘आम’ सबसे ज्यादा मीठा? UP में ‘मैंगो डिप्लोमेसी’ Vs ‘बुलडोजर पॉलिटिक्स’!

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किसका ‘आम’ सबसे ज्यादा मीठा? UP में ‘मैंगो डिप्लोमेसी’ Vs ‘बुलडोजर पॉलिटिक्स’!


लखनऊ. यूपी चुनाव 2027 को लेकर राजनीति गर्म है. एक तरफ सीएम योगी ने मोर्चा थाम लिया है तो दूसरी तरफ अखिलेश यादव भी मैदान में उतर गए हैं. मंगलवार को भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रतापगढ़ और सुलतानपुर की धरती से समाजवादी पार्टी पर खूब गरजे.यूपी में कानून-व्यवस्था और भू-माफियाओं के खिलाफ उनका तेवर एक बार फिर सातवें आसमान पर है. वहीं दूसरी तरफ हैं सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव, जो इन दिनों बेहद शांत, मुस्कुराते हुए जनता और कार्यकर्ताओं के बीच ‘आम की टोकरी’ बांटकर एक नया सोशल इंजीनियरिंग नैरेटिव सेट कर रहे हैं. एक तरफ ‘कड़क तेवर’ है, तो दूसरी तरफ ‘आम की मिठास’. आखिर इन दोनों बयानों और अंदाज के सियासी मायने क्या हैं? दोनों तरफ का पूरा समीकरण क्या है?

अयोध्या में हाल ही में हुए चंदा चोरी घटनाक्रमों के बाद बीजेपी बैकफुट पर जाने के मूड में बिल्कुल नहीं है. खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कमान संभाल ली है. हर रोज योगी सपा पर बरस रहे हैं. मंगलावर को भी प्रतापगढ़ और सुलतानपुर के दौरों पर सीएम योगी का वही पुराना, आक्रामक ‘बुलडोजर वाला’ तेवर वापस लौट आया है. सुलतानपुर की जनसभा में उन्होंने सीधे समाजवादी पार्टी को आड़े हाथों लिया और साफ कहा कि सपा से जुड़े भू-माफिया अब ‘बाप-बाप’ कहकर सरेंडर कर रहे हैं.

सीएम योगी, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, दोनों डिप्टी सीएम आम का आनंद लेते हुए.

यूपी चुनाव 2027 में योगी बनाम अखिलेश की जंग का आगाज?

सीएम योगी का यह बयान केवल एक चुनावी भाषण नहीं है, बल्कि यह बीजेपी के ‘कोर एजेंडे’ यानी जीरो टॉलरेंस और सख्त कानून-व्यवस्था को दोबारा धार देने की कोशिश है. बीजेपी यह संदेश देना चाहती है कि चुनाव के नतीजे चाहे जो रहे हों, अपराधियों और अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सरकार की सख्ती में एक प्रतिशत की भी कमी नहीं आएगी.

योगी गरज रहे हैं तो अखिलेश मुस्कुरा रहे हैं!

सीएम योगी रैलियों में गरज रहे हैं, वहीं अखिलेश यादव का अंदाज बेहद ‘कूल’ नजर आ रहा है. अखिलेश यादव लखनऊ में मलिहाबादी आमों की टोकरियां बांटते और उपहार स्वीकार करते दिख रहे हैं. बीते रविवार को सीएम योगी ने भी बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के घर पर मलिहाबादी आम का स्वाद लिया था. मंगलवार को अखिलेश ने भी मलिहाबादी आम अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं में बांटे. 2027 के चुनाव को देखते हुए मलिहाबाद के किसानों ने उन्हें खास तौर पर 27 पेटी आम भेंट किए हैं.

योगी आम खा रहे हैं तो अखिलेश खिला रहे हैं!

अखिलेश की यह ‘आम पॉलिटिक्स’ दरअसल उनके ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और किसान-फ्रेंडली नैरेटिव का हिस्सा है. इसके जरिए सपा यह दिखाना चाहती है कि वे जनता के बुनियादी मुद्दों, किसानों की मेहनत और आम लोगों से सीधे जुड़े हुए हैं. अखिलेश बिना किसी आक्रामक बयानबाजी के, बेहद शांत रहकर बीजेपी के राष्ट्रवाद और सख्त शासन के मुकाबले अपनी ‘सॉफ्ट और समावेशी’ राजनीति को आगे बढ़ा रहे हैं.

बीजेपी और सपा का रुख, कौन किस पर भारी?

बीजेपी का मानना है कि यूपी में विकास की रफ्तार जैसे एक्सप्रेसवे और अयोध्या कनेक्टिविटी और अपराध मुक्त समाज ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है. योगी आदित्यनाथ अपराधियों पर चोट करके अपने पारंपरिक वोट बैंक को यह भरोसा दे रहे हैं कि राज्य में कानून का राज ही रहेगा. वहीं सपा और अखिलेश यादव का रुख (मुद्दे + किसान + पीडीए) है. समाजवादी पार्टी अयोध्या के बाद अति-उत्साह से बचते हुए जमीन पर पकड़ मजबूत कर रही है. आम बांटना, स्थानीय किसानों को तरजीह देना और बेरोजगारी-महंगाई जैसे मुद्दों को उठाना उनकी रणनीति का हिस्सा है. वे खुद को एक ‘सकारात्मक विकल्प’ के रूप में पेश कर रहे हैं.

एक तरफ योगी का भाषण, दूसरी तरफ अखिलेश आम पॉलिटिक्स

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह मुकाबला अब ‘परसेप्शन यानी धारणा’ की जंग बन चुका है. सीएम योगी जानते हैं कि 2027 की राह प्रतापगढ़, सुलतानपुर और अवध के इसी इलाके से होकर गुजरेगी. इसलिए वे लगातार विकास परियोजनाओं की सौगात दे रहे हैं और कानून-व्यवस्था पर हुंकार भर रहे हैं. दूसरी तरफ, अखिलेश यादव मलिहाबाद के मशहूर आमों की मिठास के सहारे किसानों और ग्रामीण वोटर्स में पैठ बनाए रखना चाहते हैं. वे संदेश दे रहे हैं कि सत्ता की कड़वाहट के बीच वे जनता के साथ मिठास बांटने आए हैं.

उत्तर प्रदेश की सियासत इस समय बेहद दिलचस्प मोड़ पर है. एक तरफ जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैलियां और अपराधियों पर उनका कड़ा प्रहार बीजेपी के कार्यकर्ताओं में नया जोश भर रहा है, वहीं अखिलेश यादव की ‘मैंगो डिप्लोमेसी’ और शांत रणनीति विपक्ष को एक नई दिशा दे रही है. 2027 की इस जंग में जनता ‘बुलडोजर की हुंकार’ को चुनती है या फिर ‘आम की मिठास’ को, यह तो वक्त ही बताएगा. लेकिन इतना तय है कि उत्तर प्रदेश का यह मुकाबला बराबरी का और बेहद कांटे का होने जा रहा है.



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