किसान भाई, धान के साथ इस दलहनी फसल की करें बुवाई, 3 महीने में डबल मुनाफा पक्का

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किसान भाई, धान के साथ इस दलहनी फसल की करें बुवाई, 3 महीने में डबल मुनाफा पक्का


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Arhar Farming With Paddy: धान की बुवाई के साथ किसान अपने खेतों में अरहर की फसल लगाकर कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं. मेड बनाकर अरहर की बुवाई से फसल जलभराव से सुरक्षित रहती है और पैदावार भी अच्छी होती है…और पढ़ें

हाइलाइट्स

  • किसान भाई धान के साथ अरहर की बुवाई करें और डबल मुनाफा पाएं.
  • खेत में मेड बनाकर अरहर की बुवाई से जलभराव का खतरा नहीं होता.
  • अरहर की फसल 110-140 दिनों में तैयार हो जाती है.

Toor Daal Ki Kheti: इन दिनों किसान अपने खेतों में धान की बुवाई में जुटे हुए हैं. ऐसे में किसान चाहें तो धान के साथ-साथ दलहनी फसलों की भी बुवाई कर सकते हैं. खासतौर पर अरहर की खेती इस समय के लिए बेहद लाभकारी मानी जाती है. अरहर न सिर्फ प्रोटीन से भरपूर होती है, बल्कि ये खेत की मिट्टी की उर्वरक क्षमता को भी बेहतर बनाती है. अगर किसान व्यावसायिक तौर पर अरहर की फसल करना चाहते हैं तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है.

मेड बनाकर करें अरहर की बुवाई
कृषि वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश बताते हैं कि अरहर की बुवाई अगर खेत में मेड बनाकर की जाए तो पानी रुकने का खतरा नहीं रहता. बरसात के मौसम में अक्सर खेतों में पानी भर जाता है जिससे फसल खराब हो जाती है. लेकिन मेड बनाकर बुवाई करने पर पानी नालियों के जरिए खेत से बाहर निकल जाता है. इससे फसल जलभराव से सुरक्षित रहती है और कम लागत में अच्छी पैदावार मिलती है.

जानिए कितने दिनों में होगी फसल तैयार
अरहर की बुवाई के लिए जून और जुलाई का महीना सबसे अच्छा माना जाता है. इन महीनों में खेत में पर्याप्त नमी रहती है, जिससे बीज का अंकुरण अच्छा होता है. अगर किसान जल्दी तैयार होने वाली किस्म चुनें तो फसल कम समय में पककर तैयार हो जाती है. किस्मों की बात करें तो पूसा अरहर 16 सिर्फ 110 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है. जबकि पूसा 992 और पूसा 2018 इन किस्मों को पकने में लगभग 130 से 140 दिन लगते हैं.

खेत की तैयारी और बुवाई का सही तरीका
अच्छी पैदावार के लिए खेत की मिट्टी की सही तैयारी बहुत जरूरी है. इसके लिए रोटावेटर से खेत की अच्छी तरह जुताई करें ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए
बुवाई करते समय किसानों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए. खेत में पंक्ति से पंक्ति की दूरी करीब 70 से 75 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 20 से 25 सेंटीमीटर रखना सबसे उपयुक्त माना जाता है. अगर सही दूरी और गहराई पर बुवाई की जाए तो फसल का विकास बेहतर होता है और समय पर अच्छी उपज मिलती है.

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