किस बीमारी में कौन सी दाल खाएं, यहां जानिए खाने का सही तरीका
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क्या आप जानते हैं कि आपकी थाली में मौजूद दालें दवाओं जैसा काम कर सकती हैं? डायबिटीज, हृदय रोग और पाचन की समस्याओं में सही दाल का चुनाव बेहद जरूरी है. जानें बीमारियों के अनुसार दालों के लाभ और उन्हें पकाने की सही विधि.
भारत में भोजन की थाली दाल के बिना अधूरी मानी जाती है. देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम और मिट्टी के हिसाब से विभिन्न प्रकार की दालों की खेती होती है. दालें न केवल हमारे भोजन का स्वाद बढ़ाती हैं, बल्कि ये प्रोटीन और आवश्यक पोषक तत्वों का सबसे सुलभ स्रोत भी हैं. हालांकि, जंक फूड के बढ़ते चलन ने हमारी थाली से दालों को कम कर दिया है. आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही मानते हैं कि सही बीमारी में सही दाल का चुनाव आपको दवाओं के भारी बोझ से बचा सकता है.

मधुमेह से जूझ रहे लोगों के लिए खान-पान का चयन सबसे चुनौतीपूर्ण होता है. शुगर रोगियों के लिए चना दाल, मूंग दाल और मसूर दाल का सेवन सर्वोत्तम माना जाता है. इन दालों का ‘ग्लाइसेमिक इंडेक्स’ कम होता है, जिससे ये रक्त में शुगर की मात्रा को अचानक नहीं बढ़ाती हैं. मधुमेह के रोगियों को अरहर की दाल का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए, क्योंकि यह तुलनात्मक रूप से शुगर लेवल पर अलग प्रभाव डाल सकती है.

उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए ऐसी डाइट जरूरी है, जो कोलेस्ट्रॉल को कम करे और पाचन में हल्की हो. मूंग और मसूर की दाल फाइबर से भरपूर होती हैं, जो धमनियों में जमा कोलेस्ट्रॉल को घटाने में मदद करती हैं. इससे रक्त वाहिनियों पर दबाव कम होता है और हृदय स्वस्थ रहता है. हृदय रोगियों को सलाह दी जाती है कि वे दाल में नमक की मात्रा कम रखें और भारी तड़के या घी के अधिक प्रयोग से बचें.
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यदि आप पेट दर्द, गैस या धीमी पाचन शक्ति से परेशान हैं, तो मूंग की दाल आपके लिए सबसे सुरक्षित विकल्प है. यह दाल पचने में सबसे हल्की होती है और इसमें फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो आंतों की सफाई करने में मदद करती है. अक्सर बीमारी के बाद शरीर को रिकवर करने के लिए भी डॉक्टर मूंग की दाल के पानी या खिचड़ी की सलाह देते हैं.

जो लोग अक्सर थकान और शारीरिक कमजोरी महसूस करते हैं, उनके लिए अरहर और उड़द की दाल बेहद लाभकारी है. ये दोनों दालें प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और फाइबर का भंडार हैं. उड़द दाल शरीर में रक्त की कमी को दूर करने और हड्डियों को मजबूती प्रदान करने में सहायक होती है. कैल्शियम से भरपूर होने के कारण यह बढ़ते बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी उत्तम है.

दालों के भरपूर पोषण को प्राप्त करने के लिए उन्हें पकाने का तरीका सही होना चाहिए. आमतौर पर भारतीय घरों में दाल को ढेर सारे मसालों और तेल-घी के तड़के के साथ पकाया जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार दाल को उबालकर और कम मसालों के साथ खाना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है. अधिक मसालों और बार-बार गर्म करने से दाल के प्राकृतिक पोषक तत्व और एंजाइम्स नष्ट हो जाते हैं. इसलिए स्वास्थ्य लाभ के लिए सादी और सुपाच्य दाल को प्राथमिकता दें.