क्या शादियों में महिलाओं का बाल खोल कर और मेकअप करके जाना गुनाह है, यहां जानिए
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इस्लाम में पर्दे और हिजाब की अहमियत को लेकर जहां कुरान में साफ निर्देश दिए गए हैं, वहीं आज के दौर में शादियों और फंक्शन कार्यक्रमों में बढ़ती बेपर्दगी और मर्द-औरत की मिश्रित मौजूदगी एक बड़ा सवाल बनती जा रही है. इसी मुद्दे पर शाही चीफ मुफ्ती ऑफ उत्तर प्रदेश मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने इस्लामी नजरिए से सख्त रुख अपनाते हुए इस बारे मे जानकारी दी.
अलीगढ़: इस्लाम में पर्दे और हिजाब की अहमियत को लेकर जहां कुरान में साफ निर्देश दिए गए हैं, वहीं आज के दौर में शादियों और फंक्शन कार्यक्रमों में बढ़ती बेपर्दगी और मर्द-औरत की मिश्रित मौजूदगी एक बड़ा सवाल बनती जा रही है. इसी मुद्दे पर शाही चीफ मुफ्ती ऑफ उत्तर प्रदेश मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने इस्लामी नजरिए से सख्त रुख अपनाते हुए शादियों में होने वाले ऐसे अमल को नाजायज और हराम करार दिया है.
इस्लाम में औरतों को पर्दे और हिजाब का विशेष हुक्म
शाही चीफ मुफ्ती ऑफ उत्तर प्रदेश मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने शादियों में बढ़ती बेपर्दगी और मर्द-औरत की मिश्रित मौजूदगी पर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में शादियों और फंक्शन कार्यक्रमों में जिस तरह से गैर-महरम मर्द और औरतें आमने-सामने और बेहद नजदीक रहते हैं, वह इस्लामी शिक्षाओं के खिलाफ है. मौलाना साहब ने स्पष्ट किया कि इस्लाम में औरतों को पर्दे और हिजाब का विशेष हुक्म दिया गया है.
कुरान में अल्लाह तआला ने मोमिन यानी मुस्लिम औरतों को अपनी निगाहें नीची रखने, शर्मगाहों की हिफाज़त करने और अपनी ज़ीनत ( खूबसूरती ) को छिपाकर रखने का आदेश दिया है. इसी तरह मोमिन यानी मुस्लिम मर्दों को भी निगाहें नीची रखने का हुक्म दिया गया है. यह हुक्म बिल्कुल साफ और स्पष्ट है.
क्या है इस्लाम में गुनाह
उन्होंने कहा कि आजकल शादियों की गैदरिंग में न तो निगाहों का पर्दा होता है और न ही दिल का. मर्द और औरत एक साथ बैठकर खान-पान करते हैं और ऐसे माहौल में दिल गुनाह की तरफ माइल हो जाता है. इस तरह का रहन-सहन और व्यवहार इस्लाम की नजर में नाजायज और हराम है. मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने यह भी कहा कि अक्सर देखा जाता है कि महिलाएं शादियों में सज-धज कर, मेकअप के साथ और बाल खुले हुए शरीक होती हैं. अगर हिजाब नहीं है, बाल खुले हैं और निगाहों का पर्दा नहीं रखा जाता, तो इस्लामी नजरिए से यह गुनाह के दायरे में आता है. ऐसी स्थिति में महिलाएं गुनाह में शरीक मानी जाएंगी.
अल्लाह के आदेशों का उल्लंघन करना हराम
उन्होंने जोर देकर कहा कि इस्लाम में पर्दे की सख्त जरूरत है और कुरान का हुक्म बिल्कुल वाज़ेह यानी ज़रूरी है. अल्लाह के आदेशों का उल्लंघन करना हराम और नाजायज अमल है, जिससे बचना हर मुसलमान मर्द और औरत दोनों के लिए जरूरी है.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें