क्या है शरीयत के अनुसार निकाह की सही उम्र? क्या चाइल्ड मैरेज रेस्ट्रेंट एक्ट होगा मुसलमानों पर लागू?

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क्या है शरीयत के अनुसार निकाह की सही उम्र? क्या चाइल्ड मैरेज रेस्ट्रेंट एक्ट होगा मुसलमानों पर लागू?


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Right Age For Marriage According To Shariat : शरीयत के अनुसार निकाह की उम्र बालिग़ होने से जुड़ी मानी जाती है, यानी शारीरिक और मानसिक परिपक्वता के बाद शादी जायज़ है. वहीं, भारतीय कानून में मुस्लिमों पर भी चाइल्ड मैरेज रेस्ट्रेंट एक्ट लागू होता है, जिसके तहत लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल और लड़कों की 21 साल तय की गई है.

अलीगढ़. इस्लाम में शादी की सही उम्र को लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल उठते रहते हैं. आखिर किस उम्र में लड़की और लड़के की शादी करना सही माना जाता है और शरीयत व भारतीय कानून इसमें क्या कहते हैं. इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए लोकल 18 की टीम ने मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन से खास बातचीत की. गौरतलब है कि शरीयत में शादी की न्यूनतम उम्र का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है, बल्कि “बालिग़ होने” को ही मूल आधार माना गया है. हालांकि, भारत में शादी की कानूनी उम्र लड़कियों के लिए 18 साल और लड़कों के लिए 21 साल ही मानी जाती है.

मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने बताया कि इस्लाम में शादी की उम्र के बारे में यह कहा गया है कि लड़की की उम्र 9 से 15 साल के बीच और लड़के की उम्र 12 से 15 साल के बीच मानी गई है. लेकिन इसके साथ यह शर्त भी है कि दोनों जिस्मानी तौर पर सेहतमंद और फिट होने चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर इस उम्र से ज्यादा उम्र में शादी की जाए तो उसमें कोई गलती या मनाही नहीं है. शुरुआती उम्र का जिक्र केवल एक बात के तौर पर किया गया है, वरना उसके बाद किसी भी उम्र में शादी की जा सकती है. इस्लाम में अधिक उम्र में शादी करने पर कोई पाबंदी नहीं है।

मौलाना इफराहीम हुसैन ने बताया कि कानूनी हिसाब से 9 से 12 साल की उम्र बालिग नहीं मानी जाती. भारत के संविधान में शादी की न्यूनतम उम्र लड़कियों के लिए 18 साल और लड़कों के लिए 21 साल तय है. आमतौर पर मुसलमान भी अब 18 साल के बाद ही शादी करते हैं. शरीयत के तहत शादी की उम्र का निर्धारण मुख्य रूप से व्यक्ति के बालिग़ होने पर आधारित है. इसका मतलब है कि लड़की और लड़के दोनों के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से परिपक्व होना आवश्यक है. आमतौर पर लड़कियों और लड़कों को 15 साल की उम्र के आसपास बालिग़ माना जाता है, लेकिन यह उम्र उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति पर भी निर्भर करती है. शरीयत में शादी की न्यूनतम उम्र का कोई निश्चित सीमा तय नहीं है.

क्या कहता है भारतीय कानून?
हालांकि, भारत में मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत शरीयत को मान्यता दी जाती है, लेकिन साथ ही चाइल्ड मैरेज रेस्ट्रेंट एक्ट और अन्य कानून भी लागू होते हैं. भारतीय कानून के अनुसार, लड़कियों की शादी की कानूनी न्यूनतम उम्र 18 साल और लड़कों की 21 साल निर्धारित है. इसका मतलब यह है कि धार्मिक दृष्टिकोण से बालिग़ होना पर्याप्त माना जाता है, लेकिन भारत में कानूनी रूप से शादी करते समय सरकार द्वारा तय न्यूनतम उम्र का पालन करना अनिवार्य है. इस तरह, शरीयत और भारतीय कानून के नियम दोनों को समझना और उनका पालन करना जरूरी होता है.

मृत्‍युंजय बघेल

मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु…और पढ़ें

मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु… और पढ़ें

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