खुद न बनें डॉक्टर…बहरा हो जाएगा आपका पेट्स, बारिश में इस रोग का खतरा सबसे ज्यादा

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खुद न बनें डॉक्टर…बहरा हो जाएगा आपका पेट्स, बारिश में इस रोग का खतरा सबसे ज्यादा


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खुद न बनें डॉक्टर…बहरा हो जाएगा पेट्स, बारिश में इस रोग का खतरा सबसे ज्यादा

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Pet care tips : मानसून की दस्तक के साथ मौसम लगातार बदल रहा है. कभी बारिश होने लगती है तो कभी अचानक धूप निकल आती है. ऐसे मौसम में कई छोटे-छोटे कीड़े पैदा होने लगते हैं. कई बार यह कीड़े पेट्स के कानों में घुसकर घाव कर देते हैं. लापरवाही होते ही ये यह घाव पूरे कान में फैल सकता है और उसमें पस पड़ जाता है. इससे पेट्स बहरे तक हो सकते हैं. आगरा के पशु चिकित्सक डॉ. संजीव नेहरू लोकल 18 को बताते हैं कि पशु चिकित्सालयों में इस वक्त सबसे ज्यादा केस कानों में कीड़े, कानों में घाव, पस और फंगल इन्फेक्शन के आ रहे हैं. कई बार पेट्स कानों को जरुरत से ज्यादा खुजाने लगता है. कई बार खुजा-खुजा कर खुद ही कानों में घाव कर लेता है.

आगरा. ताजनगरी आगरा का मौसम लगातार बदल रहा है. कभी बारिश तो कभी धूप होने से पेट्स (पालतू जानवर) तेजी से बीमार हो रहे हैं. ऐसे मौसम में कई तरह के छोटे-छोटे कीड़े पैदा होने लगते हैं. कई बार यह कीड़े पेट्स के कानों में चले जाते हैं और घाव कर देते हैं. बदलते मौसम में पेट्स के कानों में इन्फेक्शन या फंगल भी हो जाता है. अगर इसे नजरअंदाज कर दिया तो यह पूरे कान में फैल जाता है और घाव में पस पड़ जाता है. इससे पेट्स के सुनने की क्षमता तक खत्म हो सकती है. ऐसे में जरूरी है कि बारिश के मौसम में समय-समय पर पेट्स के कानों को क्लीन करते रहें. यदि पेट्स कानों को अधिक खुजा रहा है तो नजदीकी पशु चिकित्सक को जरूर दिखाएं.

अपना दर्द बता नहीं सकता

आगरा के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. संजीव नेहरू लोकल 18 को बताते हैं कि बारिश के मौसम में पेट्स के कानों की समस्या अधिक बढ़ जाती है. पशु चिकित्सालयों में इस वक्त सबसे ज्यादा मरीज कानों में कीड़े, कानों में घाव, पस और फंगल इन्फेक्शन के आ रहे हैं. बारिश में कई बार पेट्स के कानों में पानी चला जाता है. गंदा पानी कभी-कभी कानों के पर्दों तक पहुंच जाता है, जिससे फंगल का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में जरूरी है कि अपने पेट्स को साफ और स्वच्छ स्थान पर रखें. समय-समय पर उनके कानों और शरीर को चेक करें, क्योंकि कई बार बरसाती कीड़े भी पेट्स के कानों या शरीर पर घाव कर देते हैं. डॉ. संजीव के मुताबिक, हफ्ते 10 दिन में भी एक बार कान आदि चेक करते रहेंगे तो आपका पेट्स स्वस्थ रहेगा. यह बेजुबान जानवर होता है. अपना दर्द बता नहीं सकता है, इसलिए देखरेख जरूरी है.
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डॉक्टर को दिखाना क्यों जरूरी

डॉ. संजीव नेहरू बताते हैं कि कई बार पेट्स कानों को जरुरत से ज्यादा खुजाने लगता है. कई बार खुजा-खुजा कर खुद ही कानों में घाव कर लेता है. ऐसे में इन्फेक्शन या कोई भी घाव अपने आप सही नहीं होगा. इस स्थिति में पेट्स को मेडिसिन की जरूरत होती है और कानों को क्लीन कराने की. इस स्थिति में किसी नजदीकी पशु चिकित्सक को दिखाना बेहद जरूरी है. खुद इलाज नहीं करें. इससे पेट्स के कानों को भारी नुकसान पहुंच सकता है. वे बहरे तक हो सकते हैं. चिकित्सक कुछ ईयर ड्रॉप्स और टेबलेट देते हैं, जिससे पेट्स बहुत जल्दी रिकवर हो जाता है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें



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