गर्मियों में भी छप्परफाड़ कमाई देगा मौन पालन! अमेठी का किसान इस तरीके से कमा रहा लाखों
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Beekeeping Tips: खेती के साथ अगर किसान मधुमक्खी पालन को जोड़ लें, तो यह कमाई का शानदार जरिया बन सकता है. लेकिन गर्मियों में मधुमक्खियों को संभालना आसान नहीं होता. तेज गर्मी में कई बार मधुमक्खियां बॉक्स छोड़ देती हैं और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. अमेठी के एक किसान ने वैज्ञानिक तरीका अपनाकर इस चुनौती को आसान बना दिया है. अब वह सर्दियों के साथ-साथ गर्मियों में भी सफलतापूर्वक मधुमक्खी पालन कर रहे हैं और एक सीजन में लाखों रुपये तक की कमाई कर रहे हैं.
अमेठी: खेती-किसानी के साथ मधुमक्खी पालन आज किसानों के लिए कमाई का अच्छा जरिया बनता जा रहा है. शहद की बढ़ती मांग के कारण कई किसान इस व्यवसाय की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं. हालांकि गर्मियों के मौसम में मधुमक्खी पालन करना किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती माना जाता है. तेज धूप और बढ़ते तापमान की वजह से मधुमक्खियों को संभालना मुश्किल हो जाता है. कई बार मधुमक्खियां बॉक्स छोड़ देती हैं, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है. इस नुकसान से डरकर कई किसान इस काम को करने से कतराते हैं.
लेकिनथोड़ी सी समझदारी और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर गर्मियों के मौसम में भी मधुमक्खियों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सकता है. अमेठी जिले के एक प्रगतिशील किसान अनिरुद्ध सिंह ने इस तकनीक को न सिर्फ अपनाया है, बल्कि वे आज इलाके में एक सफल मधुमक्खी पालक के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं. उन्होंने बाकायदा इसका कड़ा प्रशिक्षण लिया है, जिसकी मदद से वे बिना किसी नुकसान के साल भर यह काम कर रहे हैं.
गर्मियों में इन चीजों का सेवन कराना है जरूरी
किसान अनिरुद्ध सिंह बताते हैं कि गर्मियों के मौसम में मधुमक्खी पालन करना बेहद आसान है, बशर्ते आप कुछ खास सावधानियों का पूरा ध्यान रखें. उन्होंने बताया कि गर्मियों के दिनों में मधुमक्खियों को हाइड्रेटेड और एक्टिव रखने के लिए उनके खान-पान पर विशेष ध्यान देना पड़ता है.
इस मौसम में मधुमक्खियों को पर्याप्त मात्रा में महुआ का जूस और चुकंदर का जूस देना बेहद जरूरी होता है. इस खास पोषक तत्व और रस के सेवन से मधुमक्खियां सेहतमंद रहती हैं और बहुत ही आसानी से अपने बॉक्स के अंदर टिकी रहती हैं. इसके अलावा, मक्खियों को सुरक्षित रखने के लिए उनके स्थान परिवर्तन की व्यवस्था भी करनी पड़ती है.
माइग्रेशन के जरिए सुरक्षित रहते हैं बॉक्स
अनिरुद्ध सिंह के मुताबिक, गर्मियों में जब स्थानीय स्तर पर फूलों का रस और अनुकूल मौसम कम होने लगता है, तो मधुमक्खियों के बॉक्स को दूसरे राज्यों या ठंडे व पर्याप्त वनस्पति वाले इलाकों में ले जाना पड़ता है. इसके लिए वे अपने बॉक्स को कासगंज और बिहार के अलग-अलग हिस्सों में शिफ्ट करते हैं.
इस माइग्रेशन व्यवस्था की वजह से मधुमक्खियों को नया और अनुकूल वातावरण मिल जाता है, जिससे वे भीषण गर्मी की मार से बच जाती हैं. यह वैज्ञानिक तरीका अपनाकर कोई भी किसान भाई गर्मियों के महीनों में भी अपने इस कारोबार को बिना किसी रुकावट के पूरी तरह सुरक्षित रख सकता है.
मात्र 500 रुपए की लागत और लाखों का मुनाफा
उन्होंने बताया कि इस व्यवसाय को शुरू करना बहुत ज्यादा खर्चीला नहीं है. शुरुआती दौर में मधुमक्खी के एक बॉक्स को पूरी तरह तैयार करने में महज 400 से 500 रुपए तक की लागत आती है.
एक बार जब काम सही तरीके से सेट हो जाता है और सीजन में शहद की अच्छी बिक्री होती है, तो सारे खर्चे निकालकर दो से ढाई लाख रुपए का शुद्ध मुनाफा बहुत ही आसानी से हो जाता है.
अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि उन्होंने इस काम की शुरुआत उद्यान विभाग की ‘राष्ट्रीय कृषि विकास योजना’ के तहत की थी. पहले के समय में उन्हें भी गर्मियों के दौरान मधुमक्खियों को बचाना काफी मुश्किल लगता था, लेकिन जब से उन्होंने इस वैज्ञानिक और आधुनिक तरीके को सीखा है, तब से उनका यह बिजनेस लगातार आगे बढ़ रहा है और वे हर साल बंपर कमाई कर रहे हैं.
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सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें