गाजियाबाद: इकलौता वाहन फिटनेस सेंटर ‘बीमार’, सॉफ्टवेयर अपडेट के नाम पर हजारों वाहन चालकों की थमी रफ्तार

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गाजियाबाद: इकलौता वाहन फिटनेस सेंटर ‘बीमार’, सॉफ्टवेयर अपडेट के नाम पर हजारों वाहन चालकों की थमी रफ्तार


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Ghaziabad News: गाजियाबाद का इकलौता वाहन फिटनेस सेंटर सॉफ्टवेयर अपडेट के चलते पिछले दो दिनों से बंद है, जिससे हजारों वाहन चालकों की मुसीबतें बढ़ गई हैं. फिटनेस सर्टिफिकेट न मिलने के कारण कमर्शियल वाहनों के पहिए थम गए हैं और चालकों के सामने ईएमआई (EMI) व रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. भारी चालान और इंश्योरेंस क्लेम न मिलने के डर से लोग गाड़ियां सड़क पर नहीं उतार पा रहे हैं. स्थानीय लोग अब जिले में दूसरे फिटनेस सेंटर की मांग कर रहे हैं.

फोटो-AI

Ghaziabad News: गाजियाबाद जिले का इकलौता ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर पिछले दो दिनों से ‘बीमार’ पड़ा है. सॉफ्टवेयर अपडेट होने के तर्क के साथ इस सेंटर पर ताला लटका है, जिसका सीधा असर हजारों वाहन मालिकों और चालकों पर पड़ रहा है. फिटनेस सर्टिफिकेट न मिलने के कारण कमर्शियल वाहनों के पहिए थम गए हैं, जिससे न केवल परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि चालकों के सामने परिवार पालने और गाड़ी की ईएमआई (EMI) भरने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है.

सॉफ्टवेयर अपडेट बना मुसीबत, RTO के चक्कर काट रहे लोग
सैकड़ों लोग अपनी गाड़ियों का फिटनेस कराने रोजाना सेंटर पहुंच रहे हैं, लेकिन वहां से उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ रहा है. सेंटर कब खुलेगा, इसकी कोई पुख्ता जानकारी न मिलने के कारण लोग आरटीओ ऑफिस के चक्कर काटने को मजबूर हैं. लोगों का कहना है कि प्रशासन को सॉफ्टवेयर अपडेट की सूचना पहले देनी चाहिए थी ताकि वे परेशान न होते.

गाड़ी चली नहीं तो EMI कहां से भरेंगे?
सड़क पर उतरते ही भारी चालान का डर और बिना फिटनेस इंश्योरेंस क्लेम न मिलने की चिंता ने चालकों को घर बैठने पर मजबूर कर दिया है. ट्रक ड्राइवरों का कहना है कि माल लदा हुआ है, लेकिन फिटनेस न होने से वे सड़क पर निकलने का जोखिम नहीं ले सकते. वहीं, ऑटो और टैक्सी चालकों की हालत और भी खराब है; उनके लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना भी मुश्किल हो गया है.

निजी वाहन मालिकों की भी बढ़ी परेशानी
यह समस्या सिर्फ कमर्शियल वाहनों तक सीमित नहीं है. निजी कार और बाइक मालिक भी फिटनेस के लिए छुट्टी लेकर सेंटर पहुंच रहे हैं, लेकिन काम न होने से उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है. लोगों का तर्क है कि अगर रास्ते में कोई दुर्घटना हो जाए या रूटीन चेकिंग हो, तो फिटनेस के अभाव में बीमा कंपनियां क्लेम देने से साफ मना कर देती हैं.

जिले में दूसरे फिटनेस सेंटर की उठ रही मांग
गाजियाबाद जैसे बड़े जिले में केवल एक ही फिटनेस सेंटर होने पर अब सवाल उठने लगे हैं. निवासियों और वाहन संघों की मांग है कि तकनीकी खराबी की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था की जाए. फिटनेस की समय सीमा में छूट दी जाए ताकि चालान का डर खत्म हो. इतना ही नहीं, जिले में कम से कम एक और फिटनेस सेंटर खोला जाए ताकि ऐसी स्थिति दोबारा न बने.

अधिकारी का क्या है कहना?
इस मामले पर एआरटीओ (प्रशासन) अशोक श्रीवास्तव ने कहा, ‘फिटनेस सेंटर का सॉफ्टवेयर अपडेट होने की वजह से काम प्रभावित हो रहा है. यह एक तकनीकी प्रक्रिया है और उम्मीद है कि कुछ ही दिनों में सेंटर का संचालन दोबारा सामान्य रूप से शुरू हो जाएगा.’

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें

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